अहिल्यानगर जिला बैंक चुनाव: सर्वसम्मति की कोशिश नाकाम, 13 सीटों पर 2 नवंबर को वोटिंग
अहिल्यानगर जिला मध्यवर्ती सहकारी बैंक की 21 में से 8 सीटें निर्विरोध हुईं, बाकी 13 सीटों पर 2 नवंबर को मतदान होगा और 3 नवंबर को नतीजे आएंगे।
तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं
अहिल्यानगर जिला मध्यवर्ती सहकारी बैंक का चुनाव सभी पार्टियों की सहमति से निर्विरोध कराने की कोशिशें आखिरकार कामयाब नहीं हो पाईं। जिले के बड़े नेताओं के बीच आपसी मतभेद, सीटों के बंटवारे पर खींचतान और प्रतिष्ठा की लड़ाई की वजह से चुनाव की तस्वीर बदल गई है।
बैंक की कुल 21 सीटों में से 8 सीटों पर उम्मीदवार निर्विरोध चुने जा चुके हैं। बाकी 13 सीटों के लिए 2 नवंबर को वोटिंग होगी और 3 नवंबर को मतगणना के बाद नतीजे घोषित किए जाएंगे। इसी वजह से जिले के सहकारी क्षेत्र में सियासी माहौल गरम है।
चुनाव निर्विरोध कराने के लिए पूर्व सांसद यशवंतराव गडाख ने सभी पार्टियों के नेताओं को एक साथ लाने की कोशिश की थी। राम शिंदे, पालकमंत्री राधाकृष्ण विखे पाटील और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता बालासाहेब थोरात के बीच बैठकें भी हुईं। लेकिन सीटों के बंटवारे और उम्मीदवारों के चयन पर सहमति नहीं बन सकी।
राम शिंदे ने कर्जत-जामखेड के अपने समर्थक चार उम्मीदवारों के नाम सोशल मीडिया पर जाहिर कर दिए। इससे विखे-थोरात गुट में नाराजगी पैदा हुई। दूसरी तरफ निलेश लंके ने भी अपनी अलग सियासी रणनीति बरकरार रखी, जिससे चुनाव में टकराव और तेज हो गया।
जिन आठ सीटों पर उम्मीदवार निर्विरोध चुने गए हैं, उनमें श्रीरामपुर से करण ससाणे, पाथर्डी से विधायक मोनिका राजळे, गैर-खेती निर्वाचन क्षेत्र से सचिन जगताप और राहाता से सुजय विखे पाटील शामिल हैं। इनके अलावा कोपरगांव से विवेक कोल्हे, संगमनेर से रंजीत देशमुख, नेवासा से शंकरराव गडाख और शेवगांव से राजश्री घुले पाटील भी निर्विरोध चुने गए हैं।
इसी बीच राहुल जगताप ने उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से बातचीत के बाद अपना नाम वापस ले लिया। इससे प्रताप पाचपुते की राह आसान हो गई है। मगर दत्तात्रय पानसरे ने उम्मीदवारी बरकरार रखी है, इसलिए इस निर्वाचन क्षेत्र में मुकाबले की तस्वीर अभी साफ नहीं है।
सियासी खींचतान के साथ बैंक के आर्थिक कामकाज पर भी सवाल उठ रहे हैं। बैंक के पास करीब 12 हजार करोड़ रुपये की जमा राशि है। बताया जा रहा है कि जिले के चीनी कारखानों को दिए गए कर्ज का आंकड़ा पौने तीन हजार करोड़ रुपये के आसपास है।
इस कर्ज में से कितनी रकम बकाया है, कितनी वसूली हुई और कितना कर्ज नियमित है, इस बारे में साफ जानकारी सामने आने की उम्मीद जताई जा रही है। सहकारी क्षेत्र में यह चर्चा भी है कि निदेशक पद के लिए चल रही प्रतिष्ठा की लड़ाई में किसानों और जमाकर्ताओं के हित की अनदेखी नहीं होनी चाहिए।
अब बाकी 13 सीटों के लिए 2 नवंबर को होने वाले मतदान पर पूरे जिले की नजर है। विखे-थोरात गुट का दबदबा रहेगा या शिंदे-लंके गुट बाजी मारेगा, इसका फैसला 3 नवंबर को आने वाले नतीजों से होगा।
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