शेवगांव की श्मशानभूमि में रहने वाले गायकवाड परिवार की दिवाली गरीबी के साये में
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अहिल्यानगर जिले के शेवगांव तालुका की श्मशानभूमि में अनिल गायकवाड अपने परिवार के साथ रहते हैं और उसकी देखभाल करते हैं। थोड़ी आमदनी में उनकी दिवाली तंगी में बीत रही है, और परिवार के लिए मदद की अपील की जा रही है।
इन दिनों हर तरफ दिवाली की धूम है। रोशनी, उत्साह और पटाखों की आतिशबाजी के बीच यह त्योहार मनाया जा रहा है, जिसे मराठी संस्कृति में सबसे बड़ा और खुशी का त्योहार माना जाता है। लेकिन अहिल्यानगर जिले के शेवगांव तालुका की एक श्मशानभूमि में रहने वाले गायकवाड परिवार के जीवन में गरीबी का अंधेरा अब भी बना हुआ है। यह परिवार बेहद सादगी और संघर्ष के माहौल में अपनी दिवाली मना रहा है।
श्मशानभूमि का नाम सुनते ही बहुत से लोगों के मन में एक अनजाना डर बैठ जाता है। अंतिम संस्कार पूरा होने के बाद आम आदमी वहाँ पल भर भी नहीं रुकता। ऐसी डरावनी जगह, जिसके रास्ते से भी लोग जाना नहीं चाहते, वहीं अनिल गायकवाड अपने पूरे परिवार के साथ कई सालों से रह रहे हैं। उनका रोज का जीना डर के साये में बीतता है।
जब से अनिल गायकवाड यहाँ रहने आए, तब से इस पूरे परिसर की देखरेख और रखरखाव की जिम्मेदारी उन्होंने अपने कंधों पर ले रखी है। पहले यह श्मशानभूमि उपेक्षित और अनदेखी पड़ी रहती थी। दिन रात सफाई रखकर उन्होंने इस जगह की सूरत पूरी तरह बदल दी है। दुख की घड़ी में अपने परिजन का अंतिम संस्कार करने आने वाले रिश्तेदारों को कोई तकलीफ न हो, इसलिए वे परिसर को हमेशा साफ और सुथरा रखते हैं। यह काम वे पूरी ईमानदारी से कर रहे हैं।
इतनी ईमानदारी से सेवा करने के बावजूद इसके बदले गायकवाड को जो आमदनी मिलती है, वह बहुत थोड़ी है। श्मशानभूमि में मिलने वाली मजदूरी और छोटे मोटे मानदेय से ही उन्हें परिवार का पेट पालना पड़ता है। आर्थिक हालत इतनी कमजोर है कि दो वक्त के खाने की चिंता रहती है। ऐसे परिवार के लिए दिवाली जैसे बड़े त्योहार की खुशी मनाना एक सपने जैसा हो गया है। हर तरफ दीयों की रोशनी और खुशी का माहौल है, पर गायकवाड परिवार के घर में गरीबी की तपिश साफ दिखाई देती है।
अनिल गायकवाड और उनके परिवार के इस कठिन संघर्ष और तंग हालत को देखते हुए अपील की जा रही है कि स्थानीय नागरिक, सामाजिक संस्थाएँ और दानदाता आगे आएँ और इस परिवार की खुले हाथ से मदद करें। संवेदनशील नागरिकों की एक छोटी सी मदद भी गायकवाड परिवार के जीवन में उम्मीद की किरण ला सकती है, और उनकी दिवाली भी सही मायने में मीठी और रोशन हो सकती है।


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