टाटा और केईएम अस्पताल में मरीजों को दिवाली का नाश्ता, 75 जरूरतमंद महिलाओं को साड़ियां
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सौरभ मित्र मंडल ने टाटा और केईएम अस्पताल परिसर में 400 से ज्यादा मरीजों, उनके रिश्तेदारों और जरूरतमंदों को नाश्ते के डिब्बे दिए। 75 महिलाओं को साड़ियां भी बांटी गईं।
दिवाली सबके जीवन में खुशी और मिठास लेकर आती है, लेकिन अस्पताल में इलाज करा रहे मरीजों और उनके रिश्तेदारों को अक्सर त्योहार की यह खुशी नसीब नहीं होती। ऐसे लोगों के चेहरे पर मुस्कान लाने के लिए सौरभ मित्र मंडल ने पहल की। मंडल ने अपने अन्नमित्र सत्कार्य के जरिए टाटा और केईएम अस्पताल परिसर में 400 से ज्यादा मरीजों, उनके रिश्तेदारों और जरूरतमंदों को एक-एक किलो वजन के दिवाली पकवान के डिब्बे भेंट किए। इसके अलावा 75 जरूरतमंद महिलाओं को साड़ियां भी बांटी गईं।
घर का कोई सदस्य अस्पताल में भर्ती हो जाए तो पूरे परिवार का ध्यान इलाज और मरीज की सेहत पर ही टिका रहता है। पैसों की तंगी और इलाज की फिक्र के बीच त्योहार की खुशी पीछे छूट जाती है। टाटा और केईएम अस्पताल परिसर में ऐसे कई मरीज और उनके रिश्तेदार दिवाली से दूर रहते हैं। उनके जीवन में थोड़ी मिठास आए, इसी भावना से मंडल ने यह पहल की।
इस पहल के पीछे कई दानदाताओं की आर्थिक मदद, कार्यकर्ताओं की मेहनत और सामाजिक जिम्मेदारी की भावना रही। यह कार्यक्रम अन्नमित्र संजय सोमनाथ शेटये की अगुवाई में हुआ। खास बात यह है कि पांच साल पहले 150 पकवान के डिब्बों से शुरू हुआ यह काम इस बार 400 से ज्यादा लोगों तक पहुंच गया। दानदाताओं की बढ़ती संख्या और साथियों के हौसले से मंडल के इस सामाजिक काम का दायरा बढ़ रहा है।
पकवान के डिब्बों के लिए सान्वी पेडणेकर, आशालता खानोलकर, नुपूर खानोलकर, प्रल्हाद गवरे, उज्ज्वला गवरे, अशोक गोरीवले, सुलभा गोरीवले, विपुल छेडा, संजय मीना, सुनीता कोटियन, प्रसाद कोरगावकर, ज्योत्सना गुप्ते, दिलीप कदम, मनमोहन निंबालकर, सत्तार शेख और कल्पना वारिया ने आर्थिक मदद की।
मंडल के महासचिव मंगेश वरवडेकर ने अपील की कि अपनी खुशी में जरूरतमंदों को भी शामिल करने के इस काम से और संवेदनशील दानदाता जुड़ें। उन्होंने कहा कि दान की रकम कितनी बड़ी है, इससे ज्यादा अहम उसके पीछे की भावना होती है। इस पहल के जरिए यह संदेश दिया गया कि अपनी खुशी की थोड़ी मिठास किसी और के जीवन में उतारी जाए, तभी दिवाली सही मायने में मीठी होती है।


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