सातारा जिला बैंक चुनाव: सात सीटों पर निर्विरोध चयन, बाकी 14 पर सीधी टक्कर
सातारा जिला मध्यवर्ती सहकारी बैंक के चुनाव में नाम वापसी के बाद सात सीटों पर चयन निर्विरोध हो गया है। बाकी 14 सीटों पर दोतरफा और तीनतरफा मुकाबले होंगे।
तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं
सातारा जिला मध्यवर्ती सहकारी बैंक के चुनाव में उम्मीदवारी आवेदन वापस लेने के आखिरी दौर में सियासी हलचल तेज हो गई। नाम वापसी के बाद सात सीटों पर चयन निर्विरोध होने का रास्ता खुल गया है। बाकी 14 सीटों के लिए दोतरफा और तीनतरफा मुकाबले होंगे।
बताया जा रहा है कि भाजपा, राष्ट्रवादी काँग्रेस और शिवसेना के बीच हर पार्टी को पाँच-पाँच सीटों के फॉर्मूले पर सहमति बनी है। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि इसी तालमेल से ज्यादा से ज्यादा सीटें निर्विरोध कराने की कोशिश हुई। फिर भी सभी निर्वाचन क्षेत्रों में एकमत नहीं बन पाया। कुछ जगह उम्मीदवारों ने नाम वापस नहीं लिया, इसलिए वहाँ सीधी लड़ाई तय हो गई है।
इस चुनाव में सुप्रीम कोर्ट ने दस साल पूरे कर चुके संचालकों के मामले में हाईकोर्ट का फैसला कायम रखा, जिससे बड़े बदलाव हुए। सांसद उदयनराजे भोसले, सार्वजनिक निर्माण मंत्री शिवेंद्रसिंहराजे भोसले, विधान परिषद के पूर्व सभापति रामराजे नाईक-निंबाळकर और सांसद नितीन पाटील समेत कुछ प्रमुख नेताओं ने नाम वापस ले लिया। इसका असर उम्मीदवारों के चयन पर पड़ा और कुछ निर्वाचन क्षेत्रों में नए नेतृत्व को मौका मिला है। हालाँकि बड़े नेता मैदान से हट गए हैं, फिर भी उनके गुटों और समर्थकों की अहमियत बनी रहेगी। उनकी गैरमौजूदगी में किस उम्मीदवार को कितना समर्थन मिलता है, यह नतीजों से साफ होगा।
जिन सात सीटों पर चयन का रास्ता साफ हुआ है, उनमें सातारा सोसायटी निर्वाचन क्षेत्र से सर्जेराव सावंत, वाई सोसायटी निर्वाचन क्षेत्र से सत्यजित वीर, कृषि विपणन संस्था और कृषि उपज प्रक्रिया निर्वाचन क्षेत्र से मकरंद पाटील और खटाव सोसायटी निर्वाचन क्षेत्र से नंदकुमार उर्फ नानासो मोरे शामिल हैं। कृषि उत्पादक और प्रक्रिया सहकारी संस्था निर्वाचन क्षेत्र से अतुल भोसले, शहरी बैंक और साख संस्था निर्वाचन क्षेत्र से रणजितसिंह नाईक-निंबाळकर और आवास निर्माण सहकारी संस्था और दुग्ध उत्पादन संस्था निर्वाचन क्षेत्र से सोमनाथ उर्फ काका धुमाळ का चयन भी निर्विरोध होने का रास्ता खुला है।
बाकी 14 सीटों में कराड में उदयसिंह उंडाळकर और धनंजय पाटील के बीच मुकाबला है। पाटण में पालक मंत्री शंभूराज देसाई के सामने सत्यजित पाटणकर की चुनौती है। फलटण में संजीवराजे नाईक-निंबाळकर और समशेर नाईक-निंबाळकर आमने-सामने हैं। महाबळेश्वर में संजय मोरे के सामने रूपाली राजपुरे हैं। जावली में ज्ञानदेव रांजणे और विठ्ठल गोळे के बीच टक्कर है, जबकि खंडाळा निर्वाचन क्षेत्र में शामराव गाढवे, संजीव गाढवे और अजय भोसले के बीच तीनतरफा मुकाबला होगा।
आरक्षित निर्वाचन क्षेत्रों में भी मुकाबला है। महिला आरक्षित सीट पर ऋतुजा राजेश पाटील और मंगल चंद्रकांत पाटील के बीच लड़ाई है। अनुसूचित जाति-जनजाति सदस्य गुट में चार उम्मीदवार मैदान में हैं, इसलिए वहाँ चौतरफा मुकाबला होगा। अन्य पिछड़ा वर्ग में योगेश फडतरे और संदीप पांचांगणे आमने-सामने हैं। विमुक्त जाति, घुमंतू जनजाति और विशेष पिछड़ा वर्ग में सुनील वाघ और अर्जुन काळे की टक्कर है। औद्योगिक, बुनकर और मजदूर सहकारी संस्था निर्वाचन क्षेत्र में सुनील वाघ और चंद्रकांत जाधव के बीच मुकाबला है, और कोरेगाव विकास सेवा सोसायटी निर्वाचन क्षेत्र में सुनील खत्री और सुनील माने आमने-सामने हैं।
पाँच-पाँच सीटों के फॉर्मूले से राजनीतिक तालमेल की कोशिश हुई, फिर भी असली निर्वाचन क्षेत्रों की लड़ाई अलग दिशा ले सकती है। दिग्गजों के हटने से जो खाली जगह बनी है, उसे कौन भरेगा और निर्विरोध सीटों के बाहर कौन बाजी मारेगा, यह अब मतदाताओं के फैसले पर टिका है।
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