संजय राऊत का मोदी से सवाल: देश संभालने की बात थी, तो हमारी पार्टियां क्यों तोड़ीं
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ठाकरे गुट के सांसद संजय राऊत ने मुंबई में प्रेस कॉन्फ्रेंस की। इसमें उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से सीधा सवाल पूछा। राऊत ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी फोन करके कहते हैं कि हम देश संभाल लेंगे, तो फिर उन्होंने हमारी पार्टियां क्यों तोड़ीं?
राऊत के मुताबिक शरद पवार और उनकी पार्टी को लेकर बार-बार खबरें आ रही हैं। उन्होंने कहा कि शरद पवार इंडिया गठबंधन के बड़े स्तंभ हैं। राऊत ने बताया कि वे कल भी पवार से मिले थे। लेकिन पवार का इलाज चल रहा है, इसलिए तफ़सील से बात करने जैसे हालात नहीं थे।
एनसीपी के विलय के सवाल पर राऊत ने कहा, "अजित पवार गुट क्या बोलता है, इसकी कोई अहमियत नहीं। आप जहां हैं, वहीं मुश्किल में हैं। अजित पवार गुट शरद पवार के साथ आकर काम करेगा या नहीं, यह फैसला शरद पवार लेंगे। शरद पवार आपके साथ सत्ता में नहीं जाएंगे।"
डिलिमिटेशन बिल को लेकर चल रही सियासी हलचल पर भी राऊत बोले। उनके शब्दों में, "राजनीतिक कवायद चल रही है। जाल फेंके जा रहे हैं। मगर इसमें छोटी या बड़ी, कोई मछली नहीं फंसेगी। जितने आंकड़े की उम्मीद है, वह पूरा नहीं होगा।"
सुनील तटकरे पर निशाना साधते हुए राऊत ने सवाल किया कि तटकरे को एक-दूसरे के उलट बयान क्यों देने पड़ रहे हैं। राऊत ने दावा किया कि मुश्रीफ और प्रफुल्ल पटेल के ईडी के केस निपट चुके हैं। उन्होंने यह भी कहा कि पार्टी की सारी बागडोर पार्थ पवार के हाथ में है और वे पार्टी के नेता हैं। राऊत के अनुसार सबको पार्थ पवार के साथ काम करना पड़ेगा। पार्थ पवार अपने तरीके से पार्टी को आगे ले जा रहे हैं, और पार्टी में कुछ नया करना हो तो वह भी उन्हीं के तरीके से होगा।
शरद पवार की राजनीतिक सक्रियता पर राऊत ने कहा कि पवार साहब पूरे वक्त के राजनेता हैं और उनका हर पल राजनीति की चर्चा में बीतता है। राऊत ने बताया कि पवार साहब को किताब पढ़नी थी, तो उन्होंने "बोध और कीर्तन" किताब की एक प्रति उन्हें दी।
राऊत ने मुंबई महानगरपालिका की आयुक्त अश्विनी भिडे की चिट्ठी का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि भिडे ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को पत्र लिखा है। राऊत के मुताबिक इस पत्र में बिल्डरों के नाम हैं और आरोप लगाया गया है कि काम में गैरकानूनी दबाव डाला जा रहा है। राऊत ने कहा कि वे खुद भी इस बारे में जल्द ही पत्र लिखेंगे।
राऊत ने पूछा कि मुख्यमंत्री मुंबई में कौन से राक्षस पाल रहे हैं। उनका कहना था कि महानगरपालिका आयुक्त को चिट्ठी लिखनी पड़ी है, इसका मतलब है कि वे भी इस उत्पीड़न से तंग आ चुकी हैं।
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