स्टीफन मिलर बनेंगे व्हाइट हाउस के नए चीफ ऑफ स्टाफ, 9 नवंबर से संभालेंगे जिम्मेदारी
मिडटर्म चुनाव के बाद राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने प्रशासन में बड़ा फेरबदल किया है। सुज़ी वाइल्स की जगह स्टीफन मिलर को चीफ ऑफ स्टाफ बनाया गया है।
अमेरिका की राजनीति में इस वक्त बड़ी हलचल है। देश के मिडटर्म चुनाव में रिपब्लिकन पार्टी उम्मीद के मुताबिक प्रदर्शन नहीं कर पाई। इसके बाद राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने अपने प्रशासन में बड़ा फेरबदल किया है। उन्होंने स्टीफन मिलर को व्हाइट हाउस का नया चीफ ऑफ स्टाफ नियुक्त किया है। मिलर को ट्रम्प का सबसे भरोसेमंद, पुराना और आक्रामक सलाहकार माना जाता रहा है।
मिलर आने वाली 9 नवंबर से यह अहम जिम्मेदारी संभालेंगे। वे सुज़ी वाइल्स की जगह लेंगे, जिन्होंने हाल ही में अपने पद से इस्तीफा दिया है।
स्टीफन मिलर सिर्फ 41 साल के हैं। वे 2016 के पहले राष्ट्रपति चुनाव अभियान से ही ट्रम्प के बेहद भरोसेमंद रणनीतिकार और भाषण लेखक रहे हैं। ट्रम्प के पिछले प्रशासन में भी वे नीतिगत मामलों पर डिप्टी चीफ ऑफ स्टाफ और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार के तौर पर काम कर चुके हैं। अमेरिका की राजनीति में इमिग्रेशन यानी आप्रवासन से जुड़ी बेहद सख्त नीतियां बनाने में मिलर का सबसे बड़ा हाथ रहा है। ट्रम्प के मुताबिक मिलर शुरू से उनके हर एजेंडे के प्रति वफादार रहे हैं और उन्हें राजनीति की बहुत बारीक समझ है।
जिन सुज़ी वाइल्स की जगह मिलर आ रहे हैं, उन्होंने ट्रम्प के दूसरे कार्यकाल की शुरुआत को कामयाबी से संभालने और प्रशासन में अनुशासन लाने में अहम भूमिका निभाई थी। वे व्हाइट हाउस के इस सबसे बड़े पद पर पहुंचने वाली पहली महिला थीं। पिछले कुछ महीनों से वे अपनी सेहत की दिक्कत से जूझ रही थीं। मार्च 2026 में सामने आया था कि उन्हें ब्रेस्ट कैंसर है। इलाज के बाद उन्होंने खुद को कैंसर से मुक्त घोषित किया था। अब ट्रम्प ने उन्हें प्रशासन की जिम्मेदारी से हटाकर पार्टी के राजनीतिक संगठन की जिम्मेदारी सौंपी है और उनकी जगह स्टीफन मिलर को लाया गया है।
मिडटर्म चुनाव में वोटरों की नाराजगी और पार्टी की हार को देखते हुए विपक्ष को उम्मीद थी कि ट्रम्प अपनी नीतियां नरम करेंगे। लेकिन मिलर जैसे बेहद सख्त और दक्षिणपंथी सोच वाले नेता को चीफ ऑफ स्टाफ बनाकर ट्रम्प ने साफ संदेश दिया है कि वे अपनी "अमेरिका फर्स्ट" नीति से पीछे नहीं हटेंगे।
इस नियुक्ति की डेमोक्रेटिक पार्टी के नेताओं ने तीखी आलोचना की है। कांग्रेसमैन रॉबर्ट गार्सिया और भारतीय-अमेरिकी कांग्रेसमैन रो खन्ना के साथ कैलिफोर्निया के गवर्नर गेविन न्यूसम ने भी इस पदोन्नति का विरोध किया है। उनका कहना है कि चुनाव नतीजों से जनता का फैसला समझने के बजाय ट्रम्प प्रशासन ने प्रवासी समुदायों के खिलाफ ज्यादा आक्रामक और ध्रुवीकरण करने वाला कदम उठाया है। आने वाले वक्त में व्हाइट हाउस के इन फैसलों से अमेरिकी राजनीति में और बड़ी उथल-पुथल की संभावना जताई जा रही है।
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