समृद्धि महामार्ग पर नौ महीने में 143 मौतें, हादसे और बढ़े
जनवरी से सितंबर 2026 के बीच समृद्धि महामार्ग पर 168 हादसे हुए और 143 लोगों की जान गई।
तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं
नागपुर और मुंबई के बीच का सफर छोटा करने के लिए बनाया गया समृद्धि महामार्ग सड़क सुरक्षा के मामले में फिर सवालों में है। सुरक्षा के आधुनिक इंतज़ाम और बचाव के उपाय होने के बावजूद हादसे और उनमें मरने वालों की गिनती लगातार बढ़ रही है।
जनवरी से सितंबर 2026 के बीच इस एक्सप्रेसवे पर 168 हादसे दर्ज हुए और इनमें 143 लोगों की मौत हुई। पिछले साल यानी 2025 की इसी अवधि में 151 हादसे हुए थे और 126 लोगों की जान गई थी। यानी हादसे करीब 11 फीसदी बढ़े हैं और मौतें लगभग 13.5 फीसदी।
जानलेवा हादसों की गिनती भी ऊपर गई है। जनवरी से सितंबर 2025 में ऐसे 105 हादसे हुए थे, जबकि इस साल इसी दौरान 111 हुए। मौतें 126 से बढ़कर 143 हो गईं। मतलब सुरक्षा के इंतज़ाम रहते हुए भी सड़क पर जान जाने का आंकड़ा ऊपर ही गया है।
यहां हादसों की संख्या और उनकी गंभीरता को अलग-अलग देखना ज़रूरी है। कुल हादसे बढ़े हैं, लेकिन मौतें उससे ज़्यादा अनुपात में बढ़ी हैं। इसलिए जानलेवा टक्करों के हालात को और बारीकी से परखने की ज़रूरत है।
तेज़ रफ़्तार, ड्राइवर की थकान, सही दूरी न रखना और गाड़ी पर काबू खो देना तेज़ गति वाले एक्सप्रेसवे के आम खतरे माने जाते हैं। लेकिन सिर्फ इन आंकड़ों से समृद्धि महामार्ग के अलग-अलग हादसों की वजह साबित नहीं होती। इसके लिए हादसे की जगहों, गाड़ियों के प्रकार, ड्राइविंग के हालात और दूसरे कारणों की पूरी जांच करनी होगी।
दिसंबर 2022 में शुरू होने के बाद से सितंबर 2026 तक कुल 662 हादसे दर्ज हुए हैं। इनमें से 430 जानलेवा थे और उनमें 594 लोगों की मौत हुई। गंभीर चोट वाले 123 हादसों में 430 लोग बुरी तरह घायल हुए, जबकि मामूली चोट वाले 56 हादसों में 239 लोगों को चोटें आईं।
ये आंकड़े बताते हैं कि तेज़ और आसान सफर के लिए बनी सड़क पर इंसानों को कितनी बड़ी कीमत चुकानी पड़ी है। सिर्फ सुरक्षा के साज़ोसामान लगा देना काफ़ी नहीं, लगातार निगरानी और ठोस कदम भी चाहिए।
आधुनिक उपकरण ड्राइवरों को खतरे की चेतावनी देने, ट्रैफिक पर नज़र रखने और मदद पहुंचाने में काम आ सकते हैं। पर इनका असर तभी होता है जब नियम सख्ती से लागू हों, रखरखाव ठीक हो और खतरनाक ड्राइविंग या हालात दिखने पर वक्त पर कार्रवाई हो।
अधिकारियों को देखना होगा कि रफ़्तार की सीमा सच में लागू हो रही है या नहीं, खतरनाक हिस्सों के बारे में ड्राइवरों को पूरी चेतावनी मिल रही है या नहीं, और इमरजेंसी सेवाएं हादसे की जगह बिना देरी पहुंच पाती हैं या नहीं।
हादसों वाली जगहों की पहचान भी उतनी ही अहम है। बार-बार होने वाले हादसों की समीक्षा से पता चल सकता है कि किसी हिस्से में और साइन बोर्ड, बेहतर रोड मार्किंग, रोशनी या ट्रैफिक प्रबंधन में बदलाव की ज़रूरत है या नहीं।
ड्राइवरों की जागरूकता भी ज़रूरी है। तेज़ रफ़्तार वाले रास्ते पर थकान से बचें, लंबे सफर में ठीक से ब्रेक लें, सुरक्षित दूरी रखें और तय रफ़्तार सीमा का पालन करें।
2026 के सिर्फ नौ महीनों में 143 लोगों की जान गई और सितंबर तक कुल मौतें 594 हो चुकी हैं। अब चुनौती सिर्फ तेज़ कनेक्टिविटी देने की नहीं, बल्कि यह पक्का करने की है कि लोग बिना टाले जा सकने वाले जोखिम के इस रास्ते पर चल सकें। सख्त अमल, ज़िम्मेदार ड्राइविंग, तेज़ मदद और आंकड़ों पर टिकी सुधार की कार्रवाई, सबको साथ मिलकर काम करना होगा।
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