साइबर फ्रॉड में फ्रीज बैंक खाता खुलवाने के लिए वर्धा पुलिस ने बताई GRM पोर्टल की प्रक्रिया
महाराष्ट्र साइबर और वर्धा पुलिस ने GRM पोर्टल के जरिए फ्रीज या लीन-मार्क खाता अनफ्रीज कराने के चरण जारी किए हैं।
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साइबर क्राइम की जांच के दौरान फ्रीज होल्ड या लीन-मार्क किए गए बैंक खातों को अनफ्रीज कराने की प्रक्रिया को ज्यादा पारदर्शी और आसान बनाने के लिए महाराष्ट्र साइबर और वर्धा पुलिस प्रशासन ने GRM (Grievance Redressal Module) पोर्टल को लेकर विस्तृत गाइडलाइन जारी की है। इस प्रक्रिया का मुख्य मकसद यह है कि लोगों को सीधे पुलिस स्टेशन के चक्कर न काटने पड़ें, वे घर बैठे या बैंक के जरिए अर्जी देकर अपना खाता अनफ्रीज करा सकें और उनका समय बचे।
पहला कदम बैंक में अर्जी देना है। जिस खातेदार का खाता साइबर क्राइम की जांच से जुड़े संदिग्ध लेनदेन की वजह से फ्रीज या लीन किया गया है, उसे खुद संपर्क करना होगा। मूल खातेदार का अधिकृत प्रतिनिधि भी संपर्क कर सकता है। खातेदार को सबसे पहले अपनी होम ब्रांच, यानी जिस बैंक में उसका खाता है उसकी अपनी शाखा, में जाना होगा और खाता अनफ्रीज करने के लिए लिखित निवेदन या अर्जी देनी होगी।
दूसरे चरण में बैंक अपनी तरफ से जांच करता है। बैंक अधिकारी पहले खातेदार के केवाईसी (KYC - Know Your Customer) दस्तावेज और जिन बैंक ट्रांजैक्शन पर शक किया गया है, उनकी शुरुआती पड़ताल करेंगे। अगर सारी जानकारी और कागजात सही पाए गए, तो संबंधित बैंक अधिकारी खुद खातेदार की ओर से 'GRM पोर्टल' पर शिकायत दर्ज करेंगे।
तीसरा चरण यूनिक शिकायत आईडी का है। बैंक जैसे ही पोर्टल पर शिकायत सबमिट करता है, सिस्टम एक यूनिक शिकायत आईडी (Unique Grievance ID, जैसे GRM123456) बना देता है। शिकायत का फॉलो-अप करने के लिए यह आईडी बहुत अहम है। खातेदार को यह आईडी बैंक से या सिस्टम के मैसेज के जरिए मिलती है।
चौथे चरण में जांच अधिकारी मामले को देखते हैं। दर्ज की गई शिकायत डिजिटल तरीके से फौरन संबंधित केस के जांच अधिकारी (Investigating Officer - IO) के पास पहुंच जाती है। जांच अधिकारी उस खाते के लेनदेन का रास्ता (Transaction Trail) देखते हैं और खातेदार ने जो कानूनी सबूत और दस्तावेज दिए हैं, उनकी बारीकी से जांच करते हैं।
पांचवां और आखिरी चरण खाता अनफ्रीज होने या लीन हटने का है। जांच अधिकारी जब हर तरह से पूरी तरह संतुष्ट हो जाते हैं और जांच कामयाबी से पूरी हो जाती है, तब खाते पर लगी फ्रीजिंग या लीन हटाने की सिफारिश की जाती है। इसके बाद बैंक खाते को पहले की तरह चालू (Unfreeze) कर देता है और खातेदार को अपने पैसे इस्तेमाल करने की इजाजत मिल जाती है।
एक जरूरी बात भी बताई गई है। सिर्फ GRM पोर्टल पर शिकायत दर्ज कर देने से खाता तुरंत या अपने आप अनफ्रीज नहीं हो जाता। आखिरी फैसला जांच एजेंसी, पेश किए गए कागजात और तथ्यों की कानूनी पड़ताल पर ही निर्भर करता है।
साथ ही अपील की गई है: "साइबर फ्रॉड का शिकार न बनें। चौकस रहें और कोई भी ऑनलाइन फ्रॉड हो तो फौरन 1930 राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन नंबर पर या www.cybercrime.gov.in पर शिकायत दर्ज करें।"