शनिवार, 10 अक्टूबर 2026

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17:18 IST

रुपये को सहारा देने के लिए RBI के चार कदम, तेल कंपनियों को डॉलर और डेरिवेटिव पर सख्ती

डॉलर के मुकाबले रुपया रिकॉर्ड निचले स्तर के पास है। इसे संभालने के लिए RBI ने तीन सरकारी तेल कंपनियों को डॉलर देने और फॉरेक्स डेरिवेटिव के नियम कड़े करने का फैसला किया है।

रुपये को सहारा देने के लिए RBI के चार कदम, तेल कंपनियों को डॉलर और डेरिवेटिव पर सख्ती तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं

डॉलर के मुकाबले रुपये की कीमत लगातार गिर रही है और इसे संभालने के लिए भारतीय रिजर्व बैंक यानी RBI ने कई कदम उठाने का ऐलान किया है। इन उपायों में तीन सरकारी तेल कंपनियों की रोज की डॉलर की जरूरत पूरी करने का इंतजाम भी शामिल है। इसके अलावा सट्टेबाजी पर लगाम कसने, रिजर्व से जुड़े जोखिम को संभालने और करेंसी हेजिंग को सुरक्षित रखने के लिए भी इंतजाम किए गए हैं।

RBI के बयान के मुताबिक इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन (IOCL), हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन (HPCL) और भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन (BPCL) को डॉलर बेचे जाएंगे। यह व्यवस्था सोमवार, 12 अक्टूबर 2026 से लागू होगी और अगली सूचना तक चलती रहेगी। इसके तहत RBI तय किए गए बैंकों के जरिए इन तीनों कंपनियों को अमेरिकी डॉलर बेचेगा, ताकि उनके रोज के कामकाज के लिए जरूरी विदेशी मुद्रा मिलती रहे। RBI ने यह नहीं बताया कि इस व्यवस्था के तहत कितनी रकम दी जाएगी और अलग-अलग सौदों पर कोई सीमा है या नहीं। यह सुविधा कितने समय तक रहेगी, यह भी साफ नहीं किया गया है।

तेल कंपनियों को कच्चे तेल के आयात और दूसरे विदेशी खर्चों के लिए अमेरिकी डॉलर चाहिए होते हैं। कच्चे तेल का अंतरराष्ट्रीय कारोबार ज्यादातर डॉलर में होता है, इसलिए रुपया-डॉलर के भाव में उतार-चढ़ाव का असर आयात के खर्च और कंपनियों की फंडिंग की जरूरतों पर पड़ सकता है।

यह सब ऐसे वक्त हो रहा है जब RBI के फॉरेक्स बाजार में दखल देने और ब्याज दर बढ़ाने के बावजूद रुपया डॉलर के मुकाबले रिकॉर्ड निचले स्तर के पास ही टिका है। शुक्रवार को रुपया 96.73 प्रति डॉलर पर बंद हुआ। मई में दर्ज 96.96 का सर्वकालीन निचला स्तर इससे बस थोड़ा ही दूर है।

दूसरा कदम फॉरेक्स डेरिवेटिव से जुड़ा है। RBI ने कुछ खास फॉरेक्स डेरिवेटिव सौदों की सीमा 100 मिलियन डॉलर से घटाकर 5 मिलियन डॉलर कर दी है। यह घटी हुई सीमा मान्यताप्राप्त स्टॉक एक्सचेंजों पर रुपये से जुड़े एक्सचेंज-ट्रेडेड करेंसी डेरिवेटिव पर भी लागू होगी। इसका मकसद यह है कि बड़ी डेरिवेटिव पोजिशन आयात के भुगतान या निर्यात जैसे असली कामों के लिए हों, मुख्य रूप से सट्टेबाजी के लिए इस्तेमाल न की जाएं।

तीसरा कदम फॉरेन करेंसी रिस्क रिजर्व (FERR) की नई शर्त है। 20 लाख डॉलर से ज्यादा के काल्पनिक मूल्य वाले, रुपये से जुड़े विदेशी मुद्रा डेरिवेटिव कॉन्ट्रैक्ट पर यह जरूरत लागू की गई है। रजिस्टर्ड डीलरों को RBI के साथ हर पात्र सौदे के रुपया मूल्य का 20% नकद रिजर्व के तौर पर रखना होगा। यह शर्त उन कॉन्ट्रैक्ट पर लागू होती है जिनसे चालू खाते के जोखिम को हेज किया जाता है, यानी जहां ग्राहक रुपये के बदले विदेशी मुद्रा खरीदता है।

चौथा कदम हेजिंग के डॉक्यूमेंटेशन को कड़ा करना है। रजिस्टर्ड डीलरों को फॉरेक्स डेरिवेटिव कॉन्ट्रैक्ट करने वाले ग्राहकों से एक हमीपत्र लेना और रखना होगा, जिसमें यह पुष्टि हो कि वही जोखिम किसी और डीलर के जरिए हेज नहीं किया गया है। इसका मकसद एक ही जोखिम की दोहरी हेजिंग रोकना और बाजार को बेहतर करना है।

तो क्या इन उपायों से रुपये की गिरावट थमेगी? इन कदमों से डॉलर की सट्टा मांग घट सकती है और थोड़े समय की अस्थिरता से राहत मिल सकती है। लेकिन यह कच्चे तेल की कीमतों, विदेशी निवेश के प्रवाह और दुनिया भर में डॉलर की चाल जैसे बड़े कारणों पर निर्भर करेगा। 2 अक्टूबर को खत्म हुए हफ्ते में भारत का विदेशी मुद्रा भंडार 12.95 अरब डॉलर घटकर 734.60 अरब डॉलर रह गया। यह लगातार चौथा साप्ताहिक गिरावट है।

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