रविवार, 1 नवंबर 2026

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कच्चे तेल के दाम बढ़ने से रुपये पर दबाव, डॉलर के मुकाबले हुआ कमजोर

कारोबार PT24 टीम

वैश्विक बाजार में कच्चा तेल फिर सौ डॉलर के पार, रुपया एक महीने के निचले स्तर पर पहुंचा

दुनिया भर के बाजार में कच्चे तेल का दाम फिर से सौ डॉलर के पार चला गया है, जिससे भारतीय रुपये पर दबाव बढ़ गया है। मध्य पूर्व में बढ़ता तनाव, तेल की सप्लाई को लेकर पैदा हुई चिंता, और अमेरिकी फेडरल रिजर्व के ब्याज दर पर होने वाले फैसले का इंतजार, इन सबकी वजह से करेंसी मार्केट में उथल-पुथल बढ़ी है। मंगलवार को रुपया डॉलर के मुकाबले ९५.९२ तक गिर गया। तेल आयात करने वाले भारत के लिए यह गिरावट महंगाई के लिहाज से अहम मानी जा रही है।

मध्य पूर्व में चल रहे संघर्ष की वजह से कच्चे तेल की सप्लाई पर असर पड़ने का डर पैदा हो गया है। सऊदी अरब के एनर्जी इंफ्रास्ट्रक्चर पर हमले के बाद ब्रेंट क्रूड का दाम करीब १०७.७ डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया। इस महीने तेल की कीमत में करीब २० फीसदी की बढ़ोतरी हो चुकी है। भारत अपनी जरूरत के लिए बड़ी मात्रा में कच्चे तेल के आयात पर निर्भर है, इसलिए इंटरनेशनल मार्केट में बढ़ते दाम का सीधा असर देश के इंपोर्ट बिल पर पड़ता है।

तेल के बढ़ते दाम के साथ-साथ अमेरिकी डॉलर भी मजबूत हो रहा है। अमेरिका के १० साल के ट्रेजरी बॉन्ड का रिटर्न ५ फीसदी से ऊपर चले जाने से निवेशकों का रुझान डॉलर की तरफ बढ़ा है। इसी बीच अमेरिकी फेडरल रिजर्व की तरफ से ब्याज दर बढ़ाए जाने की संभावना भी बाजार में मजबूत हो गई है।

इस वजह से बड़े उभरते बाजारों से पैसा बाहर जाने का दबाव बन सकता है। इसका सीधा असर रुपये की वैल्यू पर पड़ रहा है, और मंगलवार को रुपया एक महीने से ज्यादा वक्त के निचले स्तर पर पहुंच गया।

रुपये की गिरावट रोकने के लिए रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया दखल दे रहा है, ऐसे संकेत बाजार से मिल रहे हैं। सरकारी बैंकों के जरिए डॉलर बेचे जाने से रुपये की गिरावट कुछ हद तक थम गई। लेकिन अगर तेल का दाम लंबे समय तक सौ डॉलर के ऊपर बना रहा, तो भारत के इंपोर्ट बिल और महंगाई पर दबाव और बढ़ सकता है। इसलिए आने वाले वक्त में RBI का रुख, तेल के दाम और अमेरिकी फेड का फैसला, ये तीन बातें रुपये की दिशा तय करने में बहुत अहम साबित होंगी।

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