रेपो रेट बढ़ने के बाद HDFC बैंक ने MCLR में बदलाव किया, कुछ कर्जदारों को राहत
HDFC बैंक ने अपना MCLR सुधारा है, पर इसका फायदा हर कर्जदार को फौरन नहीं मिलेगा।
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RBI ने करीब 4 साल बाद रेपो रेट बढ़ाने का फैसला लिया है। इसका असर कर्ज लेने वालों पर पड़ेगा और महीने की EMI का बोझ बढ़ सकता है। EMI की किस्तें वैसे भी हर महीने एक बड़ा खर्च होती हैं, इसलिए ब्याज दरों में छोटा-सा बदलाव भी लाखों कर्जदारों के लिए बड़ा फर्क बन सकता है। इसी बीच HDFC बैंक ने भी एक अहम फैसला लिया है।
HDFC बैंक ने अपने मार्जिनल कॉस्ट ऑफ फंड्स बेस्ड लेंडिंग रेट, यानी MCLR में बड़ा बदलाव किया है। इससे कुछ ग्राहकों को राहत मिलने की उम्मीद है, लेकिन हर कर्जदार को इसका फायदा तुरंत नहीं मिलेगा। MCLR एक बेंचमार्क दर है, जिसके आधार पर उससे जुड़े कर्जों का ब्याज तय होता है। इसलिए जिन ग्राहकों के कर्ज MCLR से जुड़े हैं, उनके ब्याज और EMI पर इस दर कटौती का असर पड़ सकता है।
EMI में असल कटौती कितनी होगी, यह इस बात पर निर्भर करेगा कि ग्राहक का कर्ज MCLR की किस अवधि से जुड़ा है और उसका अगला रीसेट कब होना है। यानी दर घटने के बावजूद EMI में बदलाव शायद फौरन नजर न आए।
RBI ने 7 अक्टूबर को अपने पतधोरण के फैसले में रेपो रेट 25 बेसिस पॉइंट बढ़ा दिया। इससे रेपो रेट 5.25 फीसदी से बढ़कर 5.50 फीसदी हो गया है। रेपो रेट बढ़ने का असर खासकर उन ग्राहकों पर होने की संभावना है, जिनके फ्लोटिंग रेट कर्ज बाहरी बेंचमार्क से जुड़े हैं। ऐसे कर्जों के ब्याज और EMI पर असर अपेक्षाकृत जल्दी दिख सकता है।
जिन ग्राहकों के फ्लोटिंग रेट कर्ज अभी MCLR से जुड़े हैं, उन्हें बैंक की इस दर कटौती का फायदा हो सकता है। लेकिन नए होम लोन का एक बड़ा हिस्सा बाहरी बेंचमार्क या रेपो रेट से जुड़ा होता है। इसलिए सिर्फ MCLR में कटौती से हर होम लोन लेने वाले की EMI कम नहीं होगी।
अगर आपका कर्ज MCLR से जुड़ा है, तो बैंक का नया दर लागू होने के बाद आपका ब्याज दर बदल सकता है। मगर EMI में कटौती की रकम कर्ज की बकाया राशि, बची हुई मियाद, मौजूदा ब्याज दर और रीसेट की तारीख पर निर्भर करेगी। इसलिए सिर्फ MCLR के बदलाव को देखकर EMI में बड़ी कटौती की उम्मीद करना ठीक नहीं है। कर्जदारों को चाहिए कि वे अपना लोन एग्रीमेंट और अगली रीसेट तारीख जरूर चेक करें।