एडवांस्ड ऑप्शंस ट्रेडर्स के लिए ग्रो, जेरोधा, एंजेल वन समेत सात प्लेटफॉर्म की तुलना
भारत में ऑप्शंस ट्रेडिंग के लिए ग्रो, जेरोधा, एंजेल वन, अपस्टॉक्स, धन, 5paisa और ICICI Direct की खूबियां और ब्रोकरेज।
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ऑप्शंस ट्रेडिंग के लिए आम ट्रेडिंग अकाउंट काफी नहीं पड़ता। इसके लिए ऐसा सॉफ्टवेयर चाहिए जो डेरिवेटिव्स की बारीकियों को समझे, यानी सिर्फ ऑर्डर डालने से आगे बढ़कर ग्रीक्स, वोलैटिलिटी की जानकारी, मल्टी-लेग एक्जीक्यूशन और सख्त रिस्क कंट्रोल दे। अनुभवी ट्रेडर के लिए गलती की गुंजाइश वैसे ही कम होती है। पोजीशन में कई चीजें साथ चलती हैं, एक्सपायरी साइकल में ध्यान रखना पड़ता है, और प्लेटफॉर्म हैंग हो या फीचर कम पड़ें तो नुकसान ट्रेड के नतीजों में तुरंत दिखता है।
पिछले कुछ सालों में भारत का ऑप्शंस बाजार तेजी से बढ़ा है और इक्विटी व कमोडिटी, दोनों सेगमेंट में रिटेल निवेशकों की हिस्सेदारी चढ़ी है। बाजार परिपक्व हुआ तो गंभीर ट्रेडरों की मांगें भी बढ़ीं। यहां एडवांस्ड ट्रेडरों के लिए उपलब्ध कुछ प्रमुख प्लेटफॉर्म पर नजर डालते हैं।
ग्रो एक पूरा डेरिवेटिव्स प्लेटफॉर्म है, जिसमें ऑप्शंस एनालिटिक्स, टेक्निकल एनालिसिस, ऑर्डर एक्जीक्यूशन और पोजीशन मैनेजमेंट एक ही इंटरफेस में मिलते हैं। स्टॉक और इंडेक्स ऑप्शंस के साथ MCX और NSE पर सोना, चांदी, क्रूड ऑयल, नैचुरल गैस, कॉपर, जिंक, एल्युमिनियम, निकल और बिजली के कमोडिटी ऑप्शंस भी हैं। इसमें डेल्टा, गामा, थीटा और वेगा जैसे ऑप्शन ग्रीक्स बिल्ट-इन हैं, और ग्रीक्स सेटिंग के टॉगल से इम्प्लाइड वोलैटिलिटी (IV) भी देखी जा सकती है। चार्टिंग में कई टाइमफ्रेम, 100+ टेक्निकल इंडिकेटर, ड्रॉइंग टूल और कस्टमाइज होने वाले लेआउट हैं। स्कैल्पर नाम का इंटरफेस चार्ट, स्ट्राइक, पोजीशन और ऑर्डर एक ही स्क्रीन पर लाता है, और बास्केट ऑर्डर से कॉम्बिनेशन स्ट्रैटेजी में एक साथ कई ऑप्शन चेन के ऑर्डर लगाए जा सकते हैं। एक्जीक्यूशन स्पीड 20 मिलीसेकंड (0.02 सेकंड) बताई गई है। स्टॉप-लॉस, ट्रेलिंग स्टॉप-लॉस, ब्रैकेट ऑर्डर, कवर ऑर्डर, लाइव P&L, मार्जिन यूटिलाइजेशन और एक्सपायरी कैलेंडर भी हैं। हर एक्जीक्यूट हुए कमोडिटी F&O ऑर्डर पर Rs 20 फ्लैट ब्रोकरेज है।
जेरोधा का काइट देश के ज्यादा जमे हुए ऑप्शंस प्लेटफॉर्म में गिना जाता है और NSE, BSE व MCX पर इक्विटी और कमोडिटी ऑप्शंस सपोर्ट करता है। बास्केट ऑर्डर से स्प्रेड के कई लेग एक साथ भेजे जा सकते हैं, और कवर ऑर्डर में ऑटोमैटिक स्टॉप-लॉस जुड़ा रहता है। यूजर अक्सर भारी वॉल्यूम वाले एक्सपायरी सेशन में इसकी स्थिरता का जिक्र करते हैं। गहरे ग्रीक्स और स्ट्रैटेजी एनालिसिस के लिए थर्ड-पार्टी सर्विस Sensibull जुड़ती है, और Varsity में ऑप्शंस की अवधारणाएं विस्तार से समझाई गई हैं। ब्रोकरेज Rs 20 प्रति एक्जीक्यूटेड ऑर्डर या 0.03%, जो भी कम हो।
एंजेल वन फुल-सर्विस ब्रोकर है और NSE, BSE व MCX पर इक्विटी-कमोडिटी ऑप्शंस ट्रेडिंग देता है। इसकी इन-हाउस रिसर्च, ट्रेड आइडिया और एडवाइजरी स्ट्रैटेजी बनाने में संदर्भ देती हैं। अपस्टॉक्स टेक्नोलॉजी-फर्स्ट प्लेटफॉर्म है, जिसका हल्का ऐप तेज नेविगेशन और ऑर्डर एंट्री के लिए ट्यून किया गया है। धन सक्रिय डेरिवेटिव्स ट्रेडरों को ध्यान में रखकर बना है, जिसमें ऑप्शंस के खास टूल, तेज ऑर्डर प्लेसमेंट और ऑर्डर स्लाइसिंग मिलती है। इन तीनों पर F&O ट्रेड में ब्रोकरेज Rs 20 प्रति एक्जीक्यूटेड ऑर्डर है।
5paisa कीमत पर मुकाबला करता है, और सब्सक्रिप्शन आधारित प्लान से हाई-फ्रीक्वेंसी ट्रेडरों की प्रति ऑर्डर लागत घटती है। ICICI Direct ICICI के बैंकिंग इकोसिस्टम के भीतर काम करता है, जहां डिटेल्ड रिसर्च रिपोर्ट और ICICI Bank इंटीग्रेशन से फंड ट्रांसफर व मार्जिन मैनेजमेंट आसान रहता है। इसकी ब्रोकरेज चुने गए प्लान पर निर्भर है और आम तौर पर डिस्काउंट ब्रोकरों से ज्यादा होती है।
प्लेटफॉर्म चुनने से पहले ऑप्शन ग्रीक्स, मल्टी-लेग एक्जीक्यूशन, एक्जीक्यूशन स्पीड, एक्सपायरी मैनेजमेंट, रिस्क टूल, एनालिटिकल गहराई और अनुमान लगाने लायक ब्रोकरेज जैसी बातें परखनी चाहिए। फर्क सबसे साफ वोलैटाइल सेशन और एक्सपायरी वीक में दिखता है।
तुलना में कहा गया है कि जेरोधा स्थिरता और Sensibull के जरिए एनालिटिक्स देता है, एंजेल वन और ICICI Direct रिसर्च की गहराई पर जोर देते हैं, अपस्टॉक्स और धन स्पीड और हल्के इंटरफेस पर, जबकि 5paisa हाई-फ्रीक्वेंसी ट्रेडरों के लिए लागत पर। ग्रो को एडवांस्ड ट्रेडरों के ज्यादातर पैमानों पर खरा बताया गया है, और उसे भारत में मार्केट शेयर के हिसाब से सबसे बड़ा कमोडिटी डेरिवेटिव्स प्लेयर कहा गया है।
चेतावनी: ऑप्शंस ट्रेडिंग में बाजार का जोखिम रहता है। प्लेटफॉर्म के फीचर, कीमतें और ऑफर बदल सकते हैं, इसलिए ट्रेडिंग से पहले संबंधित प्लेटफॉर्म पर मौजूदा जानकारी जांच लें।