डेयरी प्लांटों के लिए फाइंडेबिलिटी साइंसेज ने उतारा नया प्रोडक्ट लैक्टा इनसाइट
अप्लाइड एआई और डेटा लॉजिस्टिक्स की कंपनी फाइंडेबिलिटी साइंसेज ने दूध प्रोसेसिंग प्लांटों के लिए लैक्टा इनसाइट लॉन्च किया है।
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अप्लाइड एआई और डेटा लॉजिस्टिक्स के क्षेत्र में दुनिया की अगली कतार की कंपनी फाइंडेबिलिटी साइंसेज ने डेयरी सेक्टर के लिए खास तौर पर बनाए गए नए प्रोडक्ट 'लैक्टा इनसाइट' को लॉन्च करने का ऐलान किया है। यह प्रोडक्ट कंपनी के फ्लैगशिप प्लेटफॉर्म 'लैक्टाआई' का हिस्सा है और भारत में सभी दूध उत्पादकों और प्रोसेसिंग प्लांटों के लिए उपलब्ध है।
भारत 2024-25 में 247.87 दशलक्ष टन दूध उत्पादन के साथ दुनिया का सबसे आगे रहने वाला देश बना हुआ है। इतने बड़े पैमाने को देखते हुए दूध के संकलन, प्रोसेसिंग की स्थिरता और ऊर्जा के इस्तेमाल में छोटे सुधार भी डेयरी प्रोसेसिंग प्लांटों को बड़ा आर्थिक फायदा दे सकते हैं। दिक्कत यह है कि प्रोसेसिंग के दौरान दूध के कीमती घटकों का जो नुकसान होता है, वह अक्सर लैब के नतीजे आने के बाद ही पता चलता है। तब तक उस नुकसान की भरपाई करना मुमकिन नहीं रहता।
लैक्टा इनसाइट लैब, क्वालिटी, मेंटेनेंस और एंटरप्राइज डेटा को आपस में जोड़ता है। इससे प्लांट नुकसान बढ़ने से पहले ही उसे पहचान सकते हैं और सारे संकेतों का एक साथ विश्लेषण करके संभावित वजहें जल्दी ढूंढ सकते हैं। साथ ही बाष्पीकरण और सुखाने की प्रक्रिया में भाप, पानी और ऊर्जा का जो इस्तेमाल टाला जा सकता है, उसकी पहचान करके बड़ी आर्थिक बचत की जा सकती है।
एक खास बात यह है कि यह सिस्टम अपने आप प्लांट की सेटिंग्स में कोई बदलाव नहीं करता। ऑपरेटिंग टीम का पूरा कंट्रोल बना रहता है, और ऑपरेटर के हर फैसले का रिकॉर्ड आगे के ऑडिट के लिए रखा जाता है।
इस पहल के बारे में फाइंडेबिलिटी साइंसेज के संस्थापक और मुख्य कार्यकारी अधिकारी आनंद माहूरकर ने कहा, "ज्यादातर डेयरी प्रोसेसिंग प्लांटों के पास नुकसान पहचानने के लिए जरूरी जानकारी होती है, लेकिन वह अलग-अलग सिस्टम में बिखरी रहती है। 'लैक्टा इनसाइट' प्रोडक्ट अभी लाइन पर ही होता है, तब प्लांट टीम को यह देखने में मदद करता है कि क्या बदल रहा है, वह क्यों मायने रखता है और कहां दखल देना जरूरी है। फिलहाल भारत के एक बड़े डेयरी प्रोसेसिंग प्लांट में इसका कामयाब मूल्यांकन चल रहा है और हमारा जोर असली दिक्कतों से निपटकर साफ नतीजे देने पर है।"
लैक्टा इनसाइट प्लांट के मौजूदा पीएलसी, एससीएडीए, डीसीएस, ईआरपी, एमईएस और एलआईएमएस सिस्टमों से आसानी से जुड़ जाता है, इसलिए प्लांटों को अपने मौजूदा इन्फ्रास्ट्रक्चर में कोई बदलाव करने की जरूरत नहीं है। फिलहाल यह मक्खन, दूध पाउडर, मिल्क प्रोटीन कन्संट्रेट और व्हे लाइनों के लिए उपलब्ध है। आगे चलकर इसे चीज और दूसरे प्रोडक्ट्स के लिए भी बढ़ाया जा सकता है।
डेयरी प्रोसेसिंग प्लांट 30 मिनट के मुफ्त 'डेयरी एआई रेडीनेस असेसमेंट' की गुजारिश करके यह जांच सकते हैं कि उनके प्लांट का डेटा इस सिस्टम के लिए कितना मेल खाता है।