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पुस्तक महोत्सव की जानकारी कॉलेजों तक पहुंचाने मुंबई यूनिवर्सिटी में लाइब्रेरियनों की बैठक

मुंबई पुस्तक महोत्सव 24 से 29 नवंबर 2026 तक कलिना कैंपस में होगा। उसके प्रचार के लिए यूनिवर्सिटी से जुड़े कॉलेजों के लाइब्रेरियन बुलाए गए।

पुस्तक महोत्सव की जानकारी कॉलेजों तक पहुंचाने मुंबई यूनिवर्सिटी में लाइब्रेरियनों की बैठक तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं

मुंबई, 24 अक्टूबर: मुंबई पुस्तक महोत्सव की खबर कॉलेजों के स्टूडेंट्स, प्रोफेसरों और रिसर्चरों तक पहुंचे, इसके लिए मुंबई यूनिवर्सिटी से जुड़े कॉलेजों के लाइब्रेरियनों की एक खास बैठक बुलाई गई थी। इस महोत्सव का मकसद पढ़ने की आदत को बढ़ावा देना है। साथ ही स्टूडेंट्स, रिसर्चरों और साहित्य के शौकीनों को अच्छी किताबों से रूबरू कराना भी इसका मकसद है।

महोत्सव 24 से 29 नवंबर 2026 के बीच मुंबई यूनिवर्सिटी के कलिना कैंपस में होगा। यहां 600 से ज्यादा बुक स्टॉल लगेंगे। इसके अलावा साहित्यिक सत्र, बच्चों के लिए कार्यक्रम, सांस्कृतिक कार्यक्रम और अलग-अलग विषयों पर प्रदर्शनी भी होगी। इसका आयोजन शिक्षा मंत्रालय (भारत सरकार), नेशनल बुक ट्रस्ट इंडिया, महाराष्ट्र सरकार, मुंबई यूनिवर्सिटी और बृहन्मुंबई महानगरपालिका मिलकर कर रहे हैं। मुंबई यूनिवर्सिटी इस महोत्सव की नॉलेज पार्टनर है।

बैठक यूनिवर्सिटी के ज्ञान स्रोत केंद्र की तरफ से रखी गई थी। उसमें इस पर बात हुई कि महोत्सव की जानकारी कॉलेजों के स्टूडेंट्स, प्रोफेसरों और रिसर्चरों तक कैसे पहुंचाई जाए। पहले सत्र में कुलगुरु प्रो. रवींद्र कुलकर्णी, नेशनल बुक ट्रस्ट इंडिया के अध्यक्ष प्रो. मिलिंद मराठे और महोत्सव के नोडल अधिकारी प्रो. वाल्मिक सरवदे ने मार्गदर्शन किया।

कुलगुरु प्रो. रवींद्र कुलकर्णी ने कहा कि 600 से ज्यादा स्टॉल होने से लाइब्रेरियनों, प्रोफेसरों, स्टूडेंट्स और पाठकों को अलग-अलग विषयों की अच्छी किताबें चुनने का मौका मिलेगा। किताबें खरीदने के साथ हर उम्र के लोगों के लिए रखे गए साहित्यिक और सांस्कृतिक कार्यक्रमों का मजा भी लिया जा सकेगा। उनके मुताबिक कॉलेज की लाइब्रेरियों के लिए जरूरी किताबें चुनने और स्टूडेंट्स में पढ़ने का शौक जगाने के लिए यह महोत्सव काम आएगा।

नेशनल बुक ट्रस्ट इंडिया के अध्यक्ष प्रो. मिलिंद मराठे ने बताया कि इस मेले में अलग-अलग भारतीय भाषाओं के जाने-माने लेखक और साहित्यकार आएंगे। लेखकों से बातचीत, साहित्यिक चर्चा, परिसंवाद और सांस्कृतिक कार्यक्रम मेले का खास आकर्षण होंगे। उन्होंने कॉलेजों के लाइब्रेरियनों से अपील की कि वे स्टूडेंट्स और प्रोफेसरों को साथ लेकर महोत्सव में आएं। उन्होंने इसे "ज्ञान का उत्सव" भी कहा।

बैठक के दूसरे सत्र में ज्ञान स्रोत केंद्र के संचालक डॉ. नंदकिशोर मोतेवार ने 'शोधचक्र' प्लेटफॉर्म की जानकारी दी। रिसर्च मैनेजमेंट में यह कितना काम का है, इसकी खास बातें क्या हैं और रिसर्चरों के लिए इसकी क्या अहमियत है, इस पर उन्होंने प्रेजेंटेशन दिया।

ज्ञान स्रोत केंद्र अब तक 13,018 पीएच.डी. थीसिस 'शोधगंगा' के डिजिटल संग्रह में जमा कर चुका है। पीएच.डी. थीसिस जमा करने के मामले में इसी वजह से मुंबई यूनिवर्सिटी देश में पांचवें नंबर पर है। इसे रिसर्च के प्रसार, ज्ञान के लेन-देन और ओपन एक्सेस के जरिए पढ़ाई के संसाधन मुहैया कराने की यूनिवर्सिटी की प्रतिबद्धता की निशानी माना जा रहा है।

मुंबई यूनिवर्सिटी भारत सरकार के शिक्षा मंत्रालय के 'इन्फ्लिबनेट' केंद्र के जरिए चल रही 'वन नेशन वन सबस्क्रिप्शन' योजना में भी शामिल है। इसके तहत यूनिवर्सिटी के स्टूडेंट्स, शिक्षकों और रिसर्चरों को अंतरराष्ट्रीय स्तर के नामी प्रकाशकों के 13,000 से ज्यादा रिसर्च जर्नल मिले हैं। इससे रिसर्च की क्वालिटी बढ़ाने और ऊंचे दर्जे की पढ़ाई की सामग्री देने में मदद मिल रही है।

'शोधचक्र' रिसर्च लाइफसाइकिल मैनेजमेंट सिस्टम के लिए एमओयू भी हुआ है। इसके तहत यूनिवर्सिटी अब तक 2,000 से ज्यादा पीएच.डी. गाइडों और 1,368 पीएच.डी. रिसर्चरों के प्रोफाइल बना चुकी है। इस सिस्टम से पीएच.डी. एडमिशन से लेकर रिसर्च पूरी होने तक की अलग-अलग प्रक्रियाएं ऑटोमैटिक होंगी, रिसर्च की जानकारी संभालना आसान होगा और रिसर्च का प्रशासन ज्यादा कारगर बनेगा।

इसके अलावा मुंबई यूनिवर्सिटी 'शोधगंगोत्री' पहल में भी शामिल है। इसमें रिसर्चरों के रिसर्च प्रस्तावों और रिसर्च के संभावित विषयों की जानकारी उपलब्ध कराई जाती है। इससे रिसर्च की नई दिशाएं समझने, एक ही काम दोबारा होने से बचने और रिसर्च को रफ्तार देने में मदद मिलती है।

इन सब पहलों से यूनिवर्सिटी की रिसर्च व्यवस्था को मजबूत करने, भारतीय रिसर्च साहित्य को ओपन एक्सेस देने और दुनिया भर का अकादमिक ज्ञान रिसर्चरों तक पहुंचाने की उसकी कटिबद्धता दिखती है।

इस बैठक में जुड़े कॉलेजों के लाइब्रेरियनों से सीधी बात कर शिक्षा के क्षेत्र में पुस्तक महोत्सव का प्रचार करने पर जोर दिया गया। पढ़ने की संस्कृति बढ़ाने, स्टूडेंट्स को अलग-अलग भाषाओं का साहित्य मुहैया कराने और लाइब्रेरियों को समृद्ध करने के लिए महोत्सव का फायदा उठाने की अपील भी इस मौके पर की गई।

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