सूखे के बीच फीस बढ़ोतरी रोकने की मांग, मंत्री चंद्रकांत पाटील बोले- विचार हो सकता है
राज्य में सूखे के हालात के बीच इंजीनियरिंग, मेडिकल और दूसरे प्रोफेशनल कोर्सों की फीस बढ़ोतरी एक साल रोकने की मांग उठी है। उच्च व तकनीकी शिक्षा मंत्री चंद्रकांत पाटील ने कहा कि एक बार विशेष मामला मानकर इस पर विचार किया जा सकता है।
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राज्य में सूखे की वजह से कई किसान परिवारों की आर्थिक हालत बिगड़ गई है। ऐसे में उच्च शिक्षा ले रहे स्टूडेंट्स के लिए सिर्फ परीक्षा फीस माफ कर देना काफी नहीं है, ऐसी मांग सामने आई है। मांग यह है कि इंजीनियरिंग, मेडिकल, फार्मेसी, मैनेजमेंट, होटल मैनेजमेंट और दूसरे प्रोफेशनल कोर्सों की फीस बढ़ोतरी पर एक साल की रोक लगे और शैक्षणिक वर्ष 2026-27 की फीस अगले साल भी वैसी ही रखी जाए।
इन कोर्सों की फीस तय करने की जिम्मेदारी फीस रेगुलेटरी अथॉरिटी (एफआरए) की है। कॉलेजों से उनके खर्च और फीस बढ़ाने के प्रस्ताव मंगवाए जाते हैं, फिर तय मानकों के आधार पर फीस तय होती है। मांग करने वालों का कहना है कि हर साल यह प्रक्रिया चलाते वक्त सामाजिक और आर्थिक हालात भी देखे जाने चाहिए। स्टूडेंट्स की आर्थिक ताकत और उन पर पड़ने वाले अतिरिक्त बोझ का भी ख्याल रखा जाना चाहिए।
कहा गया है कि सूखे में जब पालकों की कमाई पर असर पड़ा है, तब फीस बढ़ोतरी का बोझ स्टूडेंट्स पर डालना पढ़ाई के लिहाज से मुश्किल खड़ी कर सकता है। पारंपरिक कोर्सों की फीस कम है, लेकिन राज्यभर में नए शुरू हुए कोर्सों की फीस ज्यादा है। मांग है कि इस फीस में किसी भी तरह की बढ़ोतरी न हो।
इस बीच राज्य सरकार की तरफ से लड़कियों को शिक्षा और परीक्षा फीस में 100 प्रतिशत छूट मिलती है। पिछड़ा वर्ग के बच्चों की आधी फीस भी सरकार भरती है, जबकि आरक्षित वर्ग के बच्चों को फीस भरनी ही नहीं पड़ती। इस वजह से बहुत कम स्टूडेंट्स को पूरी फीस भरनी पड़ती है। फिर भी उच्च व तकनीकी शिक्षा मंत्री चंद्रकांत पाटील ने कहा है कि एक बार विशेष मामला मानकर अगले साल की फीस बढ़ोतरी पर रोक लगाने के बारे में सोचा जा सकता है।
एफआरए ने शैक्षणिक वर्ष 2027-28 के लिए फीस तय करने की प्रक्रिया में कॉलेजों से प्रस्ताव मंगवाए हैं। इन प्रस्तावों को जमा करने की आखिरी तारीख 31 अक्टूबर है। इसलिए मांग है कि राज्य सरकार सूखे के हालात और स्टूडेंट्स की आर्थिक दिक्कतों को ध्यान में रखकर अपना रुख साफ करे।
मांग के मुताबिक सरकार को एफआरए से बात करके अगले शैक्षणिक वर्ष में फीस न बढ़ाने पर सही नीतिगत फैसला लेना चाहिए। अगर मौजूदा फीस 2027-28 में भी वैसी ही रहती है, तो स्टूडेंट्स के पालकों पर फीस बढ़ोतरी का ज्यादा बोझ नहीं पड़ेगा।
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