पुणे में सिर्फ 20 फीसदी अस्पताल लगा रहे रेट कार्ड, न लगाने पर होगी कार्रवाई
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राज्य के स्वास्थ्य विभाग ने निजी अस्पतालों, नर्सिंग होम और क्लिनिकों के लिए इलाज के रेट मराठी और अंग्रेज़ी में लगाना जरूरी कर दिया है।
निजी अस्पतालों में इलाज का खर्च बढ़ रहा है और बिलिंग में पारदर्शिता की कमी है। इसी वजह से मरीजों और उनके रिश्तेदारों पर बेवजह आर्थिक बोझ न पड़े, इसके लिए चिकित्सा सेवाओं और सुविधाओं का रेट कार्ड साफ दिखने वाली जगह पर लगाना जरूरी कर दिया गया है। अस्पताल, नर्सिंग होम और दवाखानों को यह रेट कार्ड मराठी और अंग्रेज़ी, दोनों भाषाओं में लगाना होगा।
राज्य के स्वास्थ्य विभाग ने निर्देश दिए हैं कि रेट कार्ड न लगाने, घोषित दर से ज्यादा शुल्क लेने या छुपे शुल्क जोड़ने जैसी बातों पर सख्त कार्रवाई की जाए। विभाग ने केंद्र सरकार के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय की सूचनाओं के हिसाब से इस बारे में परिपत्र जारी किया है।
महाराष्ट्र नर्सिंग होम पंजीकरण नियमावली 2021 के प्रावधानों के मुताबिक चिकित्सा सेवाओं और सुविधाओं की दरें दिखाना जरूरी है। राज्य में यह नियम 2022 से लागू है। इसके बावजूद पुणे आईएमए के मुताबिक जिले के सिर्फ करीब 20 फीसदी क्लिनिक और अस्पताल इसका पालन कर रहे हैं।
पुणे आईएमए के अध्यक्ष डॉ. संजय पाटील ने कहा, "महाराष्ट्र नर्सिंग होम पंजीकरण नियमावली 2021 के मुताबिक चिकित्सा सेवाओं और सुविधाओं की दरें प्रदर्शित करना जरूरी है। राज्य में 2022 से इस पर अमल शुरू है। लेकिन जिले के करीब 20 फीसदी क्लिनिक और अस्पताल ही इसका पालन करते हैं।"
इलाज शुरू होने से पहले अगर मरीज और उनके रिश्तेदारों को संबंधित सेवा की दर पता चल जाए, तो वे खर्च की योजना बना सकेंगे। संभावित खर्च की जानकारी मिलने से अस्पताल चुनते समय अलग-अलग विकल्पों की तुलना भी हो सकेगी। साथ ही रेट कार्ड के शुल्क और असली बिल का मिलान करने से ज्यादा वसूली या बिलिंग में फर्क को लेकर होने वाले विवाद कम होने में मदद मिलेगी।
रेट कार्ड में लिखे शुल्क से ज्यादा रकम लेने, छुपे शुल्क लगाने या रेट कार्ड ही न लगाने जैसे मामलों में कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं। नियम तोड़ने वाली संस्थाओं पर जुर्माने के साथ-साथ लाइसेंस रद्द करने की कार्रवाई भी हो सकती है। हालांकि इस फैसले पर अमल कितना असरदार होगा, यह इस पर निर्भर रहेगा कि शिकायतों की जांच, बिलों का मिलान और असल कार्रवाई कितनी प्रभावी ढंग से होती है।
पुणे शहर और जिले में 6 हजार 735 पंजीकृत अस्पताल, पैथोलॉजी लैब और स्वास्थ्य सेवा संस्थाओं में इन नियमों का पालन होना अपेक्षित है। प्रशासन को यह जांचना होगा कि इन संस्थाओं ने रेट कार्ड सामने की जगह पर लगाया है या नहीं, उसमें दी गई दरें अद्यतन हैं या नहीं और असली बिल में उन्हीं दरों के हिसाब से शुल्क लिया जा रहा है या नहीं।
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