पूजा में देवता को अत्तर चढ़ाना कब ठीक है और कहाँ सावधानी रखनी चाहिए
हिंदू धर्म में पूजा के दौरान सुगंध चढ़ाने की परंपरा है, पर हर देवता के लिए अत्तर का एक ही नियम नहीं है।
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हिंदू धर्म में पूजा के वक्त देवता को चंदन, फूल, धूप और सुगंधित चीजें चढ़ाने की परंपरा चली आ रही है। सुगंध को पवित्रता, प्रसन्नता और भक्ति का प्रतीक माना जाता है। देवता को सुगंध चढ़ाने का मतलब अपनी श्रद्धा और आदर जताना है। सवाल यह है कि क्या हर देवता को अत्तर चढ़ाने का तरीका एक जैसा होता है? किस देवता को अत्तर चढ़ाना चाहिए और किसके मामले में खास ध्यान रखना चाहिए, यह जानना जरूरी है।
पूजा-पाठ में गंध, फूल, धूप और दीप का खास महत्व है। षोडशोपचार पूजा में देवता को गंध चढ़ाना एक उपचार माना जाता है। चंदन, कुंकू या दूसरी सुगंधित चीजें देवता की पूजा-परंपरा के हिसाब से चढ़ाई जाती हैं। कुछ मंदिरों में और घर की पूजा में भी अत्तर चढ़ाने का रिवाज मिलता है। फिर भी हिंदू धर्म में ऐसा कोई एक सबके लिए लागू नियम नहीं है कि सभी देवताओं को अत्तर चढ़ाया ही जाए। देवता के स्वरूप, स्थानीय परंपरा, संप्रदाय और पूजा-विधि के हिसाब से तरीका बदल सकता है।
श्रीकृष्ण की पूजा में सुगंधित चंदन, तुलसी पत्र और खुशबूदार फूलों का महत्व है। कुछ भक्ति परंपराओं में श्रीकृष्ण को सुगंधित अत्तर भी चढ़ाया जाता है। भगवान विष्णु की पूजा में भी गंध चढ़ाने की परंपरा है।
देवी लक्ष्मी की पूजा सुगंधित फूल, चंदन, धूप और दीप से की जाती है। कुछ परंपराओं में देवी को गुलाब या कमल की खुशबू वाला अत्तर चढ़ाया जाता है। धनतेरस, दिवाली और लक्ष्मीपूजन के वक्त भक्त अपने कुलाचार के हिसाब से सुगंधित चीजें चढ़ा सकते हैं।
देवी दुर्गा और दूसरी शक्ति देवताओं की पूजा में गंध, कुंकू, फूल और धूप का इस्तेमाल होता है। कुछ शक्तिपीठों या स्थानीय परंपराओं में अत्तर चढ़ाने का तरीका हो सकता है। फिर भी देवी की खास पूजा-विधि में बताए गए नियमों का पालन करना ठीक रहता है।
श्रीगणेश की पूजा में दूर्वा, लाल फूल, सिंदूर और चंदन का खास महत्व है। घर की कुछ पूजाओं में गणपति को सुगंधित चीज चढ़ाई जाती है। लेकिन अत्तर मूर्ति के प्रकार और परंपरा के हिसाब से ही इस्तेमाल करना चाहिए।
भगवान शिव की पूजा में बेलपत्र, जलाभिषेक, धतूरा और परंपरा के मुताबिक चंदन का इस्तेमाल होता है। शिवलिंग पर अत्तर छिड़कना सब जगह मानी जाने वाली या जरूरी पूजा-पद्धति नहीं है। शिवलिंग पर कोई भी सुगंधित चीज चढ़ाने से पहले अपने मंदिर या घर की पूजा-पद्धति का ख्याल करना चाहिए। अभिषेक में इस्तेमाल होने वाली चीजों में अत्तर मिलाने से बचना चाहिए। अत्तर सीधे छिड़कने की जगह गंध चढ़ाना बेहतर है।
हनुमानजी की पूजा में कुछ परंपराओं के हिसाब से सिंदूर, चमेली का तेल, फूल और दूसरी पूजा सामग्री इस्तेमाल होती है। कहीं-कहीं चमेली की खुशबू का रिवाज मिलता है। पर चमेली का तेल और अत्तर अलग-अलग चीजें हैं। हनुमानजी को अत्तर चढ़ाना हर जगह जरूरी नहीं माना जाता।
किस देवता को अत्तर नहीं लगाना चाहिए, इसकी कोई सर्वमान्य सूची हिंदू धर्म में नहीं है। इसलिए यह नतीजा निकालना ठीक नहीं कि किसी देवता को अत्तर लगाने से बुरा होता है या दोष लगता है। फिर भी कुछ बातों में सावधानी जरूरी है।
जिन मूर्तियों पर सिंदूर या तेल चढ़ा हो और अत्तर से उनका लेप, रंग या ऊपरी सतह खराब होने का डर हो, उन पर अत्तर सीधे न लगाएँ। धातु, लकड़ी या रंगी हुई मूर्तियों पर अत्तर के तत्वों से दाग पड़ सकते हैं या सतह को नुकसान पहुँच सकता है। मंदिर के देवताओं के लिए मंदिर के नियमों के हिसाब से ही अत्तर या दूसरी सुगंधित चीज चढ़ाएँ। पुजारी की इजाजत के बिना मूर्ति पर कुछ भी न छिड़कें। कुलदेवता या ग्रामदेवता की पूजा उस देवता की परंपरा में बताई गई चीजों के मुताबिक करें।
अत्तर चढ़ाते वक्त सबसे पहले देवता की पूजा-परंपरा देखें। मूर्ति पर सीधे अत्तर लगाना जरूरी नहीं है। इसकी जगह साफ रुई पर या पूजा के लिए इस्तेमाल होने वाले किसी ठीक माध्यम पर अत्तर की एक-दो बूँदें लेकर उसे देवता के पास रखा जा सकता है। मंदिर में या किसी खास पूजा-विधि में अलग तरीका बताया गया हो तो उसका पालन करें। प्राकृतिक अत्तर एक विकल्प है, पर प्राकृतिक या अल्कोहल-मुक्त हर अत्तर मूर्ति पर लगाने के लिए सुरक्षित हो, यह जरूरी नहीं। इसलिए मूर्ति की सामग्री का ध्यान रखना जरूरी है।
अत्तर चढ़ाने के पीछे मुख्य भावना भक्ति, आदर और पवित्रता की है। अत्तर की खुशबू देवता को खुश करने के लिए जरूरी है, ऐसा मानने से ज्यादा अहम है अपनी परंपरा के हिसाब से श्रद्धा से पूजा करना। अत्तर नहीं चढ़ाया इसलिए पूजा अधूरी रह गई, या किसी देवता को अत्तर लगाने से दोष लगता है, ऐसा सीधे-सीधे नहीं कहा जा सकता। देवता को कोई भी सुगंधित चीज चढ़ाने से पहले उसकी पूजा-पद्धति, मंदिर के नियम और मूर्ति का स्वरूप ध्यान में रखना चाहिए।
(धर्म, ज्योतिष, वास्तु, फेंगशुई जैसे विषयों के लेख और खबरें सिर्फ पाठकों की जानकारी के लिए हैं। इनसे जुड़ा कोई भी प्रयोग करने से पहले जानकार की सलाह लेना जरूरी है।)
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