डॉक्टर बनने से पहले परखें खुद को: ये बातें न पता हों तो दो बार सोचें
तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं
साइंस स्ट्रीम से 12वीं कर रहे ज्यादातर स्टूडेंट्स मेडिकल लाइन में करियर बनाने का सपना देखते हैं। डॉक्टर के प्रोफेशन को भगवान का दर्जा दिया जाता है और इस करियर को हमेशा इज्जत की नजर से देखा गया है। सवाल यह है कि क्या सिर्फ किताबें रटकर या फिजिक्स, केमिस्ट्री और बायोलॉजी में अच्छे नंबर लाकर अच्छा डॉक्टर बना जा सकता है, या इसके लिए कुछ और खूबियां भी चाहिए।
कई बच्चे पेरेंट्स, रिश्तेदारों, टीचर और दोस्तों के दबाव में आकर नीट यूजी की तैयारी शुरू कर देते हैं। अगर आपके घर में कोई डॉक्टर है या आपका कोई करीबी दोस्त मेडिकल की पढ़ाई कर रहा है, तो जरूरी नहीं कि वही प्रोफेशन आपके लिए भी परफेक्ट हो। इसलिए डॉक्टर बनना है या नहीं, यह अपनी पसंद और हकीकत देखकर तय करना ही समझदारी होगी।
डॉक्टर की जिंदगी फिल्मों जैसी नहीं होती, जहां एक इंजेक्शन लगते ही मरीज तुरंत ठीक हो जाता है। अस्पताल में 24 से 36 घंटे की लंबी शिफ्ट आम बात है। थोड़ी सी थकान पर आपको चिड़चिड़ाहट होती है, या रात की नींद के बिना काम करना आपसे नहीं होता, तो यह लाइन आपके लिए तनाव भरी हो सकती है। पढ़ाई के दौरान बहुत बड़ा सिलेबस होता है और इमरजेंसी केस संभालने के लिए मजबूत दिल चाहिए।
डॉक्टरों के सामने अक्सर ऐसे डरावने या दर्दनाक हालात आते हैं, जिन्हें देखकर आम आदमी घबरा सकता है। अस्पताल के आईसीयू (ICU) या इमरजेंसी वार्ड में खून, दर्द और मौत का माहौल रहता है। अगर आप बहुत ज्यादा सेंसिटिव हैं और छोटी-छोटी बातों पर घबरा जाते हैं या भावुक हो जाते हैं, तो डॉक्टर की कुर्सी पर बैठकर फौरन और सही फैसला नहीं ले पाएंगे। यहां ठंडे दिमाग से हालात संभाल लेना ही सबसे बड़ी कला है।
बहुत लोग सोचते हैं कि एमबीबीएस की डिग्री मिलते ही पढ़ाई हमेशा के लिए खत्म हो जाती है। असल में मेडिकल साइंस ऐसा समंदर है जो रोज बदलता रहता है। हर दिन नई बीमारियां, नए वायरस, मॉडर्न टेक्नोलॉजी और नई दवाएं बाजार में आती हैं। कामयाब डॉक्टर बनने के लिए पूरी जिंदगी एक स्टूडेंट की तरह बितानी पड़ेगी और हमेशा कुछ नया सीखने के लिए तैयार रहना पड़ेगा। अगर किताबें पढ़ना और नई रिसर्च खोजना आपको उबाऊ लगता है, तो यह प्रोफेशन आपका दम घोंट देगा।
अब यह भी जान लें कि किन कमियों वाले लोगों को डॉक्टर नहीं बनना चाहिए। पहली कमी है शॉर्टकट या जल्दी पैसा कमाने की चाहत। अगर आपका इकलौता मकसद रातोंरात अमीर बनना है, तो मेडिकल में आने से पहले दो बार सोचिए। यहां कामयाबी के लिए लंबा वक्त और बरसों की मेहनत लगती है।
दूसरी कमी है कम्युनिकेशन गैप। डॉक्टर और मरीज के बीच बातचीत का पुल मजबूत होना चाहिए। अगर आप लोगों से बात करने से बचते हैं या अपनी बात ठीक से समझा नहीं पाते, तो मरीज का आधा इलाज वहीं रुक जाता है।
तीसरी कमी है अहंकार या घमंड। मरीज और उनके घबराए हुए रिश्तेदारों के साथ हमदर्दी दिखाना सबसे जरूरी है। घमंडी स्वभाव वाले डॉक्टर को समाज कभी स्वीकार नहीं करता।
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