पिंपरी-चिंचवड महापालिका के मुख्य अभियंता प्रमोद ओभासे सस्पेंड, रिश्वत मामले में हुई थी गिरफ्तारी
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आयुक्त डॉ. विजय सूर्यवंशी ने 19 हजार रुपये की रिश्वत के मामले में गिरफ्तार मुख्य अभियंता को गिरफ्तारी के दिन 29 अक्टूबर 2026 से सस्पेंड किया और विभागीय जांच के आदेश दिए।
पिंपरी-चिंचवड महापालिका के मुख्य अभियंता प्रमोद सुधाकर ओभासे को सस्पेंड कर दिया गया है। महापालिका आयुक्त डॉ. विजय सूर्यवंशी ने यह कार्रवाई की है। मामला 19 हजार रुपये की रिश्वत का है। आरोप है कि 38 लाख रुपये के एक टेंडर की फाइल पर दस्तखत करने के लिए ओभासे ने टक्केवारी मांगी थी। आयुक्त ने सस्पेंशन के साथ उनके खिलाफ विभागीय जांच के आदेश भी दिए हैं। इस कार्रवाई से महापालिका के गलियारों में हलचल मच गई है।
मामले की शुरुआत एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) के पुणे दस्ते की पड़ताल से हुई। इस पड़ताल में सामने आया कि ओभासे ने रिश्वत की मांग की थी। इसके बाद संत तुकारामनगर पुलिस स्टेशन में 29 अक्टूबर को भ्रष्टाचार प्रतिबंधक कानून के तहत गुनाह दर्ज किया गया और ओभासे को गिरफ्तार कर लिया गया। कोर्ट ने उन्हें 14 नवंबर तक न्यायिक हिरासत में भेजा है।
इसी पृष्ठभूमि में महापालिका ने सस्पेंशन का आदेश निकाला। यह आदेश गिरफ्तारी वाले दिन से, यानी 29 अक्टूबर 2026 से लागू माना गया है।
महाराष्ट्र नागरी सेवा (अनुशासन और अपील) नियम 1979 के मुताबिक ओभासे के खिलाफ विभागीय जांच शुरू की जाएगी। आयुक्त ने साफ निर्देश दिया है कि 15 दिन के भीतर उन पर आरोप पत्र दाखिल किया जाए। आरोप पत्र दाखिल होने के बाद जांच अधिकारी और प्रस्तुतकर्ता अधिकारी की नियुक्ति फौरन कर दी जाएगी।
सस्पेंशन के दौरान की शर्तें भी आदेश में लिखी गई हैं। नियम के हिसाब से इस अवधि में ओभासे को सिर्फ निर्वाह भत्ता मिलेगा। उन्हें कोई भी प्राइवेट नौकरी या कारोबार करने की सख्त मनाही है। आदेश में यह भी कहा गया है कि सक्षम अधिकारी की पहले से इजाजत लिए बिना वे मुख्यालय नहीं छोड़ सकेंगे।
ओभासे महापालिका में 'वर्ग-1' दर्जे के वरिष्ठ अधिकारी हैं। इतने बड़े अधिकारी पर सीधी कार्रवाई होने से महापालिका में खासी चर्चा है। फिलहाल इस मामले में गुनाह दर्ज हुआ है, जबकि कोर्ट की प्रक्रिया चल रही है और विभागीय जांच का अंतिम नतीजा आना अभी बाकी है।
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