फ्रांस का कारीगर उल्कापिंड से बनाता है चाकू, एक की कीमत 6.9 लाख रुपये तक
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फ्रांस के युरे प्रांत के कारीगर जोरीस डोमारेस्ट उल्कापिंड के धातु से हाथ के बने चाकू तैयार करते हैं और इन दिनों अपनी इस अनोखी कला के लिए चर्चा में हैं।
फ्रांस के एक कारीगर की अनोखी कला इन दिनों चर्चा में है। जोरीस डोमारेस्ट नाम के ये कलाकार आसमान से धरती पर गिरने वाले उल्कापिंड का इस्तेमाल करके चाकू बनाते हैं। किसी के दिमाग में कब क्या ख्याल आ जाए, इसका अंदाजा लगाना मुश्किल है, लेकिन डोमारेस्ट ने उल्कापिंड से चाकू बनाने के विचार को सच करके दिखाया है।
डोमारेस्ट फ्रांस के युरे (Eure) प्रांत के रहने वाले कारीगर हैं। वे उल्कापिंड से मिलने वाले धातुओं को आकार देकर आकर्षक और खास किस्म के चाकू तैयार करते हैं। उल्कापिंड में मुख्य रूप से लोहा और निकेल जैसे धातु पाए जाते हैं। इन धातुओं को सही तरीके से ढालकर चाकू की शक्ल दी जाती है। हर उल्कापिंड की बनावट अलग होती है, इसलिए उससे बनने वाली चीजों का रूप भी अलग होता है।
इन चाकुओं की कीमत आम आदमी की पहुंच से बाहर है। डोमारेस्ट के हाथ से बने एक चाकू की कीमत 5 हजार से 6 हजार यूरो है। भारतीय करेंसी में यह अंदाजन 5.3 लाख से 6.9 लाख रुपये बैठती है। इतनी ऊंची कीमत के बावजूद ऐसी चीजों की मांग रहती है। खास संग्राहक और दुर्लभ चीजों का शौक रखने वाले ग्राहक इन्हें खरीदते हैं। इन चाकुओं की खासियत सिर्फ उनका इस्तेमाल नहीं है, बल्कि उनके पीछे अंतरिक्ष का इतिहास और कारीगर का हुनर भी है।
शौकीन लोग इन्हें कलाकार की कला की कद्र के तौर पर खरीदते हैं। साथ ही, लोगों की बदलती सोच के चलते ऐसी महंगी और दुर्लभ चीज का मालिक होना अमीरी की सामाजिक निशानी के तौर पर भी खरीदा जाता है।
उल्कापिंड से कोई चीज बनाना आम लोहारी के काम से ज्यादा चुनौती भरा माना जाता है। इसके लिए धातु की बनावट, उसके तापमान और गढ़ने की प्रक्रिया का खास अध्ययन करना पड़ता है। सही तकनीक अपनाकर ही उसे मनचाहा आकार दिया जा सकता है। खास बात यह भी है कि उल्कापिंड के प्राकृतिक धातुओं की बनावट की वजह से तैयार चीजों पर अलग नक्शा और सतह दिखाई दे सकती है। इससे हर चाकू को अपनी अलग पहचान मिलती है।
विज्ञान, इतिहास और पारंपरिक कारीगरी का मेल यह कला फ्रांस में लोगों का ध्यान खींच रही है। डोमारेस्ट के चाकुओं की कारीगरी का आकर्षण वहां के लोगों पर असर डाल रहा है।
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