फर्जी पासपोर्ट रैकेट: भोपाल STF ने दो को गिरफ्तार किया, कथित सरगना पलाश चौधरी फरार
भोपाल STF ने कथित फर्जी पासपोर्ट मामले में दो लोगों को गिरफ्तार किया है। पूछताछ में नागपुर के पलाश बिपिन चौधरी का नाम कथित मास्टरमाइंड के तौर पर आया है।
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कथित फर्जी पासपोर्ट रैकेट की जांच फिर से शुरू हो गई है। भोपाल स्पेशल टास्क फोर्स (STF) ने हाल ही में इस मामले में दो लोगों को गिरफ्तार किया है। पूछताछ में नागपुर के पलाश बिपिन चौधरी का नाम कथित मास्टरमाइंड के तौर पर सामने आया है। भोपाल STF अब नागपुर की एंटी-टेररिज्म स्क्वाड (ATS) यूनिट के साथ मिलकर फरार आरोपी की तलाश कर रही है।
जिन दो लोगों को पकड़ा गया है, उन पर आरोप है कि वे नकली भारतीय पासपोर्ट बनवाने की कोशिश कर रहे थे। पूछताछ के दौरान उन्होंने कथित तौर पर पलाश बिपिन चौधरी को मास्टरमाइंड बताया। उनके मुताबिक पलाश ने ही उन्हें त्रिपुरा में भारत-बांग्लादेश की खुली सीमा से भारत में घुसने में मदद की थी और फिर भोपाल लाया था।
पलाश पर आरोप है कि उसने 250 से ज़्यादा बांग्लादेशी नागरिकों को भारत में घुसने, नकली भारतीय दस्तावेज़ हासिल करने और अलग-अलग शहरों में बसने में मदद की। सूत्रों के मुताबिक वह सितंबर में नागपुर से भाग गया था। उस वक्त भोपाल STF उसे और तस्करी के एक अन्य संदिग्ध जॉइसन चौधरी को खोजने नागपुर आई थी। पलाश की लोकेशन पहले पश्चिम बंगाल और फिर त्रिपुरा में मिली थी। जांचकर्ताओं का मानना है कि वह खुली सीमा पार करके बांग्लादेश चला गया होगा।
नागपुर पुलिस को शक है कि पलाश ने नागपुर को अपना बेस बनाया था और साथ ही मध्य प्रदेश (भोपाल), पश्चिम बंगाल, तेलंगाना (हैदराबाद) और बेंगलुरु (कर्नाटक) में भी अपने संपर्क बनाए रखे थे। सूत्रों ने बताया कि 2023 में नागपुर ATS ने उसे गिरफ्तार किया था, जब एक जांच में अवैध रूप से लोगों को लाने और नकली पासपोर्ट बनवाने के रैकेट का पता चला था।
आरोप है कि पलाश ने कुछ बांग्लादेशी नागरिकों को शक से बचाने के लिए बौद्ध भिक्षु का भेष धारण करने में मदद की। उस पर पूर्वोत्तर के रास्ते उन्हें लाने और कुछ लोगों को बिहार ले जाने का शक है। कथित तौर पर वहां उन्हें भिक्षु जैसा दिखने की ट्रेनिंग दी गई और फिर नागपुर और दूसरे शहरों में भेजा गया। सूत्रों का दावा है कि इस व्यवस्था के तहत करीब 50 बांग्लादेशी नागरिकों को नागपुर लाया गया था।
जांचकर्ता इन आरोपों की भी जांच कर रहे हैं कि पलाश ने अवैध रूप से भारत में घुसने, रहने की जगह और भारतीय ID कार्ड दिलाने के लिए प्रति व्यक्ति 2 लाख रुपये तक लिए थे। दस्तावेजों में हेरफेर की प्रक्रिया में किराए पर घर लेना, किराए के एग्रीमेंट और यूटिलिटी बिल को पते के सबूत के तौर पर इस्तेमाल करना और उसके बाद आधार कार्ड, बैंक खाते, पैन कार्ड और पासपोर्ट हासिल करना शामिल था।
जांचकर्ताओं को शक है कि इन दस्तावेज़ों का इस्तेमाल नकली भारतीय पहचान बनाने के लिए किया गया। सूत्रों का यह भी कहना है कि इस नेटवर्क ने कम से कम 250 फर्जी भारतीय पासपोर्ट बनवाने में मदद की होगी। इसके बाद जिन लोगों को फायदा पहुंचाया गया, उन्हें भारत के अलग-अलग हिस्सों में भेज दिया गया। कुछ ने अपनी नई पहचान से विदेश की यात्रा भी की। हैदराबाद एयरपोर्ट पर दो अवैध प्रवासी भी पकड़े गए।
अपने बयान में पलाश ने कथित तौर पर माना कि वह 2012 में बांग्लादेश से अवैध रूप से भारत आया था और उसने अपने कुछ परिचितों को भारतीय दस्तावेज हासिल करने में मदद की थी। एक अधिकारी ने कहा कि पलाश ने यह भी बताया कि पासपोर्ट के लिए आवेदन करने में मदद के लिए उसने स्थानीय संपर्कों और पतों का इस्तेमाल किया था। जांचकर्ता अब कई राज्यों में इस नेटवर्क के कनेक्शन, पासपोर्ट धोखाधड़ी के दायरे और इसमें शामिल दूसरे संदिग्धों की भूमिका की जांच कर रहे हैं।