फाइलेरिया के राज्य भर के 77% मरीज नागपुर संभाग के छह जिलों में, चंद्रपुर सबसे आगे
2025 के आंकड़ों के मुताबिक महाराष्ट्र में फाइलेरिया (हाथीपांव) के 28,114 मरीज दर्ज हुए, जिनमें से 21,664 नागपुर संभाग में हैं।
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महाराष्ट्र में हाथीपांव यानी फाइलेरिया का सबसे ज्यादा बोझ नागपुर संभाग पर है। वर्ष 2025 के आंकड़ों के अनुसार राज्य में फाइलेरिया के कुल 28,114 मरीज दर्ज किए गए। इनमें से 21,664 मरीज नागपुर संभाग के छह जिलों में हैं।
इसका मतलब यह है कि राज्य के कुल मरीजों में लगभग 77 प्रतिशत हिस्सेदारी अकेले नागपुर संभाग की है। संभाग के भीतर चंद्रपुर सबसे ज्यादा प्रभावित जिला है, जहां 9,180 मरीज दर्ज किए गए हैं। इन आंकड़ों के बाद बीमारी पर काबू पाने और नए संक्रमण को रोकने के लिए चल रहे अभियान की अहमियत और बढ़ गई है।
संभाग के छह जिलों में मरीजों का फैलाव एक जैसा नहीं है। संभाग के कुल 21,664 मरीजों में से 13,317 मरीज अकेले चंद्रपुर और नागपुर जिले में हैं। यह संभाग के कुल मरीजों का लगभग 61.5 प्रतिशत बैठता है।
सार्वजनिक स्वास्थ्य संभाग फाइलेरिया का संक्रमण रोकने के लिए मास ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन यानी MDA अभियान चला रहा है। संभाग में दर्ज ज्यादातर मामले पुराने और क्रोनिक मरीजों के हैं। ऐसे मरीजों को बीमारी के लंबे असर को संभालने की जरूरत होती है, जबकि नया संक्रमण रोकने के लिए पात्र आबादी तक दवाएं पहुंचाना अहम है।
फाइलेरिया उन्मूलन के लिए केंद्र सरकार ने 10 फरवरी को 12 राज्यों के 124 जिलों में एमडीए अभियान शुरू किया था। बीमारी को वर्ष 2027 तक खत्म करने का लक्ष्य रखा गया है।
नागपुर संभाग में इस अभियान के तहत चंद्रपुर, भंडारा और गडचिरोली जिलों के 11 चिह्नित ब्लॉकों में 15,27,813 पात्र लोगों को दवा दी गई। यानी इन 11 ब्लॉकों में करीब 15.27 लाख लोगों तक दवा पहुंचाई गई।
स्वास्थ्य कर्मियों और आशा कार्यकर्ताओं ने दवा वितरण केंद्रों के साथ घर-घर जाकर भी लोगों से दवा का सेवन सुनिश्चित कराने की कोशिश की। अभियान में डीईसी, एल्वेंडाजोल और आइवरमेक्टिन की ट्रिपल ड्रग थेरेपी (IDA) का इस्तेमाल किया गया।