पेट्रोल के एक्सपोर्ट पर टैक्स खत्म, डीजल और ATF के एक्सपोर्ट पर शुल्क बढ़ा
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केंद्र सरकार ने पेट्रोल के निर्यात पर लगा विशेष अतिरिक्त उत्पाद शुल्क रद्द कर दिया है, जबकि डीजल और ATF के निर्यात शुल्क में बढ़ोतरी की गई है।
पेट्रोल और डीजल को लेकर एक अहम खबर आई है। अर्थ मंत्रालय ने शनिवार को एक अधिसूचना जारी की। उसके मुताबिक सरकार ने पेट्रोल के निर्यात पर लगने वाला विशेष अतिरिक्त उत्पाद शुल्क रद्द करने का ऐलान किया है। दुनिया भर के संघर्ष का असर तेल की कीमतों पर पड़ रहा है, और इसी बीच यह फैसला आया है।
पेट्रोल पर राहत मिली है, लेकिन डीजल और एविएशन टर्बाइन फ्यूल यानी ATF के निर्यात पर शुल्क बढ़ा दिया गया है। डीजल के निर्यात शुल्क में प्रति लिटर 3 रुपये की बढ़ोतरी हुई है। ATF के निर्यात शुल्क में प्रति लिटर 50 पैसे की बढ़ोतरी की गई है। सवाल यह है कि इस बढ़ोतरी का आम लोगों की जेब पर क्या असर पड़ेगा।
नए रेट के हिसाब से पेट्रोल के निर्यात पर अब कोई शुल्क नहीं लगेगा। पहले यह शुल्क प्रति लिटर 2.50 रुपये था। डीजल के निर्यात पर शुल्क प्रति लिटर 8.50 रुपये से बढ़ाकर प्रति लिटर 11.50 रुपये कर दिया गया है। ATF के निर्यात पर शुल्क प्रति लिटर 10.50 रुपये से बढ़ाकर प्रति लिटर 11 रुपये किया गया है।
यह निर्यात शुल्क इसी साल मार्च के आखिर में लगाया गया था। उस वक्त मध्य-पूर्व में चल रहे संघर्ष की वजह से दुनिया की ऊर्जा सप्लाई गड़बड़ा गई थी और अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल के दाम आसमान छू रहे थे। ग्लोबल कीमतों की वजह से एक्सपोर्ट में ज्यादा मुनाफा मिल रहा था। सरकार का मकसद यह था कि तेल रिफाइनरी कंपनियां देश के खरीदारों के बजाय विदेशी बाजारों को तरजीह न दें।
संघर्ष शुरू होने से पहले भारत के कच्चे तेल के इंपोर्ट का करीब 45% हिस्सा होर्मुज की जलडमरूमध्य से आता था। यह एक बड़ा समुद्री रास्ता है, जो पर्शियन खाड़ी को दुनिया के बाजार से जोड़ता है। इस रास्ते पर व्यापारी जहाजों की आवाजाही में रुकावट आई, तो भारत को कच्चे तेल की सप्लाई के लिए दूसरे रास्ते खोजने पड़े।
शुल्क में यह ताजा बदलाव ऐसे वक्त आया है, जब भारत पश्चिम एशिया में चल रही जंग के असर से जूझ रहा है। इस जंग से कच्चे तेल की सप्लाई अस्थिर हो गई है, समुद्री रास्ते पर खतरे बढ़ गए हैं और दुनिया में तेल के दाम ऊंचे स्तर पर बने हुए हैं।
केंद्र सरकार ने पेट्रोल और डीजल की खुदरा कीमतें स्थिर रखकर देश के ग्राहकों को इस झटके के पूरे असर से बचाने की कोशिश की है। इसके अलावा रिफाइनर विदेश में कितना ईंधन भेजें, इसे काबू में रखने के लिए सरकार ने निर्यात शुल्क का इस्तेमाल किया है।
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