पेप्सिको इंडिया के 70 फीसदी से ज्यादा पेय जीरो शुगर या मध्यम कैलरी वाले, स्नैक्स में नए बदलाव
पेप्सिको इंडिया अपने पेय और स्नैक्स में बदलाव कर रही है। कंपनी का कहना है कि स्वाद कायम रखते हुए सेहतमंद विकल्प बढ़ाए जा रहे हैं।
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पेप्सिको इंडिया अपने खाने-पीने के कारोबार का विस्तार कर रही है और इसी के साथ भारतीय ग्राहकों की बदलती और ज्यादा जागरूक होती जरूरतों के हिसाब से अपने प्रोडक्ट्स में भी बदलाव कर रही है। कंपनी का कहना है कि ग्राहकों को पसंद आने वाला स्वाद कायम रखते हुए सेहत और निरोगी जीवनशैली को लेकर बढ़ती जागरूकता को ध्यान में रखकर ज्यादा सेहतमंद विकल्पों का दायरा बढ़ाया जा रहा है। इसके लिए प्रोडक्ट्स के घटकों में बदलाव, नए प्रोडक्ट्स और वैरायटी लाने और अलग-अलग घटकों के इस्तेमाल पर जोर दिया जा रहा है।
कंपनी के पेय कारोबार ने कम और मध्यम कैलरी वाले पेयों के विकल्प बढ़ाने की दिशा में अहम प्रगति की है। फिलहाल कंपनी के कुल पेय प्रोडक्ट्स में से 70 फीसदी से ज्यादा जीरो शुगर या मध्यम कैलरी वाले हैं। आने वाले समय में इस हिस्से को चरणबद्ध तरीके से 90 से 100 फीसदी तक ले जाना कंपनी का लक्ष्य है। इसके लिए घटकों में जरूरी बदलाव के साथ-साथ कम और जीरो शुगर वाले पेयों के विकल्प बढ़ाने पर जोर है। इनमें पेप्सी ब्लैक, 7अप जीरो शुगर, गेटोरेड जीरो और निंबूज शामिल हैं।
खाने-पीने की चीजों के मामले में पेप्सिको इंडिया पोषण मूल्यों, अलग-अलग घटकों और तैयारी के नए तरीकों के जरिए ग्राहकों को ज्यादा विकल्प दे रही है। 2026 में क्वेकर ब्रांड में नए बदलाव किए गए हैं और उसमें प्रोटीन, फाइबर और साबुत अनाज की खूबियों को ग्राहकों के सामने ज्यादा साफ तौर पर रखा गया है। सेहतमंद विकल्पों की श्रेणी में रेड रॉक डेली के बेक्ड प्रकार शामिल हैं, जिनमें 40 फीसदी कम फैट है।
भारत की खेती की परंपरा का सम्मान करने वाला मोटे अनाज पर आधारित कुरकुरे ज्वार पफ्स भी नया विकल्प बनकर आया है। कंपनी के मुताबिक ये नए प्रयोग ग्राहकों के अलग-अलग स्वाद, पसंद और जीवनशैली के हिसाब से ज्यादा विकल्प देने की उसकी व्यापक कोशिश का हिस्सा हैं। लेज, कुरकुरे, डोरिटोस, चीटोज, अंकल चिप्स, क्वेकर और रेड रॉक डेली समेत कंपनी के सभी ब्रांड्स के रेडी-टू-ईट खाद्य पदार्थों में कृत्रिम स्वाद या रंगों का इस्तेमाल नहीं किया जाता।
इस बदलाव में पारदर्शिता को भी अहम जगह दी गई है। पेप्सिको इंडिया अपने प्रोडक्ट्स के पैकेट पर पोषण मूल्यों की जानकारी देती है। इसमें ऊर्जा, एक बार में लेने की मात्रा और अहम पोषक घटकों का सुझाई गई रोजाना की जरूरत के मुकाबले योगदान शामिल है। कंपनी के मुताबिक इससे ग्राहकों को अपनी पसंद और खाने के मौके के हिसाब से सही प्रोडक्ट चुनने के लिए जरूरी जानकारी मिलती है।
पेप्सिको इंडिया और दक्षिण एशिया की चीफ कॉर्पोरेट अफेयर्स ऑफिसर और सस्टेनेबिलिटी हेड यशिका सिंह ने कहा, "पेप्सिको इंडिया में हमारा मानना है कि ग्राहकों की बदलती पसंद को समझना और उनकी अलग-अलग जरूरतों को पहचानना अहम है। ग्राहकों के लिए सेहतमंद विकल्प चुनना आसान बनाना सिर्फ हमारी जिम्मेदारी नहीं, बल्कि नवाचार और कारोबार की बढ़ोतरी का अभिन्न हिस्सा है। हमारे ब्रांड्स के जरिए लोगों को सोच-समझकर चुनाव करने के लिए सक्षम बनाना और उनकी जिंदगी में खुशी लाना हमारा उद्देश्य है।"
यशिका सिंह ने आगे कहा, "कम और जीरो शुगर वाले पेयों से लेकर साबुत अनाज और मोटे अनाज जैसे अलग-अलग घटकों से बने स्नैक्स तक, हम ग्राहकों के लिए ज्यादा विकल्प उपलब्ध करा रहे हैं। अपने चुनाव को लेकर ज्यादा जागरूक हो रहे ग्राहकों के लिए ये विकल्प उपयोगी होंगे। साथ ही, प्रोडक्ट्स के स्वाद और उससे मिलने वाले आनंद को हम प्राथमिकता दे रहे हैं। कुल मिलाकर, ग्राहकों की बदलती जरूरतों का जवाब देने वाले और भारत की अलग-अलग खान-पान की संस्कृति और पेय की आदतों को दर्शाने वाले ज्यादा से ज्यादा विकल्प उपलब्ध कराना ही हमारी कोशिश है।"
इन सभी कदमों से पेप्सिको इंडिया का वह नजरिया सामने आता है जिसमें ग्राहकों की जरूरतों को केंद्र में रखकर प्रोडक्ट्स में बदलाव किया जाता है। भारतीय ग्राहकों के बदलते स्वाद, जीवनशैली और अलग-अलग मौकों के हिसाब से कंपनी अपने मौजूदा प्रोडक्ट्स में सुधार कर रही है और उनके लिए नए विकल्प भी ला रही है।