पटाखों से आंखों को खतरा: मुंबई की नेत्र रोग विशेषज्ञ ने बताए बचाव के तरीके
तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं
मुंबई के कोकिलाबेन धीरूभाई अंबानी हॉस्पिटल की डॉ. श्रुती वासनिक ने दिवाली में पटाखों से आंखों की चोट और उससे बचाव की जानकारी दी।
दिवाली रोशनी, खुशी और उत्साह का त्योहार है। दिये, रंगोली, पकवान और पटाखों की आतिशबाजी से त्योहार की रौनक दोगुनी हो जाती है। लेकिन इस जश्न में लोग अक्सर अपनी आंखों की सुरक्षा पर ध्यान नहीं देते। मुंबई के कोकिलाबेन धीरूभाई अंबानी हॉस्पिटल में कंसल्टेंट ऑप्थैल्मोलॉजिस्ट (कॉर्निया, मोतियाबिंद और रिफ्रैक्टिव सेवा) डॉ. श्रुती वासनिक ने इस बारे में विस्तार से जानकारी दी है।
डॉ. वासनिक के मुताबिक पटाखों से आंखों को लगने वाली चोट गंभीर हो सकती है और कई बार हमेशा के लिए नजर चली जाने की नौबत भी आ सकती है। उन्होंने बताया कि पटाखों की चिंगारियां, लपटें, धुआं, केमिकल और धमाके से निकलने वाले कण आंखों को नुकसान पहुंचा सकते हैं।
डॉ. वासनिक ने इससे होने वाली कई दिक्कतें गिनाईं। इनमें आंखों में जलन, लालिमा और पानी आना, आंख की पारदर्शी परत यानी कॉर्निया को चोट, पलकों और आंख के आसपास की त्वचा का जलना, आंख के अंदरूनी हिस्से में चोट लगकर खून बहना और रेटिना को नुकसान शामिल हैं। गंभीर चोट में नजर हमेशा के लिए कम हो सकती है या अंधापन भी आ सकता है। उनका कहना है कि पटाखा फोड़ने वाले जितना ही खतरा आसपास खड़े लोगों को भी होता है, और छोटे बच्चे इन चोटों का ज्यादा शिकार बनते हैं।
बचाव के बारे में डॉ. वासनिक ने कहा कि जहां तक हो सके खुद पटाखे फोड़ने की जगह विशेषज्ञों की निगरानी में होने वाली सुरक्षित सार्वजनिक आतिशबाजी का मजा लिया जाए। पटाखे फोड़ते समय सुरक्षित दूरी रखी जाए और उनके बिल्कुल पास न खड़े हों। बच्चों को कभी अकेले पटाखे न फोड़ने दिए जाएं और बड़े उन पर लगातार नजर रखें। फुलझड़ी, अनार, रॉकेट या दूसरे पटाखे जलाते वक्त चेहरा और आंखें सुरक्षित दूरी पर रखनी चाहिए।
उन्होंने यह भी बताया कि पटाखे फोड़ते समय सही क्वालिटी का प्रोटेक्टिव चश्मा पहनना चाहिए, क्योंकि आम सनग्लासेस पटाखों से बचाव के लिए काफी नहीं होते। जो पटाखा जलाने के बाद नहीं फटा, उसके पास नहीं जाना चाहिए और उसे दोबारा जलाने की कोशिश भी नहीं करनी चाहिए। पटाखे फोड़ने के बाद हाथ अच्छी तरह धोने चाहिए और बिना हाथ धोए आंखों को नहीं छूना चाहिए। डॉ. वासनिक के मुताबिक धुएं और प्रदूषण से आंखों में एलर्जी, खुजली और जलन हो सकती है, और ऐसे में आंखें नहीं मलनी चाहिए।
अगर पटाखे से आंख को चोट लग जाए तो डॉ. वासनिक के अनुसार बिना देर किए नेत्र रोग विशेषज्ञ से सलाह लेना बेहद जरूरी है। आंख को मलना या दबाना नहीं चाहिए, और आंख में घुसा कण या चीज खुद निकालने की कोशिश नहीं करनी चाहिए। आंखों में कोई घरेलू नुस्खा, तेल या दवा का मलहम भी नहीं लगाना चाहिए। आंख में कुछ घुसने या गंभीर चोट का शक हो तो आंख पर दबाव डाले बिना फौरन अस्पताल जाना चाहिए।
डॉ. वासनिक ने कहा कि अगर सिर्फ हल्का धुआं या धूल जाने से जलन हो रही है, तो साफ पानी से आंखें धोई जा सकती हैं। लेकिन चोट का शक हो तो तुरंत मेडिकल जांच करानी चाहिए। उन्होंने याद दिलाया कि आंख की चोट शुरू में मामूली लगे तब भी उसके गंभीर नतीजे हो सकते हैं, इसलिए कोई भी चोट लगे तो जांच में देर नहीं करनी चाहिए।
कमेंट
अभी कोई कमेंट नहीं। पहले आप लिखिए।