एमबीबीएस इंटर्न का स्टायपेंड 18 हजार से 30 हजार करने की मांग, दिवाली बाद फैसले का आश्वासन
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अभाविप के मुताबिक पालिका प्रशासन ने बैठक में कहा कि प्रस्ताव संबंधित विभाग को भेजा जाएगा और दिवाली के बाद इस पर फैसला होगा।
एमबीबीएस इंटर्न डॉक्टरों के स्टाइपेंड को लेकर अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (अभाविप) और पालिका प्रशासन के बीच मुंबई में संयुक्त बैठक हुई। अभाविप पिछले कुछ महीनों से महाराष्ट्र के एमबीबीएस इंटर्न डॉक्टरों के स्टाइपेंड समेत कई मुद्दों पर पीछा कर रही है। यह बैठक उसी सिलसिले में बुलाई गई थी।
अभाविप ने मुख्यमंत्री और चिकित्सा शिक्षा मंत्री को निवेदन देकर मांग की है कि सरकारी और अनुदानित मेडिकल कॉलेजों के इंटर्न डॉक्टरों का स्टाइपेंड हर महीने 18,000 रुपये से बढ़ाकर 30,000 रुपये किया जाए। इसके साथ ही परिषद चाहती है कि प्राइवेट मेडिकल कॉलेजों में स्टाइपेंड को लेकर जो गड़बड़ी चल रही है, उस पर लगाम लगे और सभी इंटर्न डॉक्टरों को नियम के हिसाब से स्टाइपेंड मिले।
इन मांगों के सिलसिले में पालिका की सार्वजनिक स्वास्थ्य समिति के अध्यक्ष हरीश भांदिर्गे की मौजूदगी में बैठक रखी गई। बैठक में मुंबई के मेडिकल कॉलेजों के अधिष्ठाता (डीन), संबंधित कॉलेजों के स्टूडेंट रिप्रेजेंटेटिव और अभाविप के पदाधिकारी शामिल हुए।
अभाविप ने बताया कि बैठक में इंटर्न डॉक्टरों के स्टाइपेंड बढ़ाने के साथ प्राइवेट मेडिकल कॉलेजों की अनियमितता पर भी विस्तार से चर्चा हुई। परिषद के मुताबिक महानगरपालिका प्रशासन ने आश्वासन दिया कि स्टाइपेंड बढ़ाने की मांग से जुड़े आर्थिक और कानूनी पहलुओं की जांच के लिए प्रस्ताव संबंधित विभाग को भेजा जाएगा और दिवाली के बाद उस पर फैसला लिया जाएगा।
अभाविप का कहना है कि मेडिकल पढ़ाई के आखिरी चरण में एमबीबीएस इंटर्न डॉक्टरों को सीधे मरीजों की देखभाल, इमरजेंसी सेवा और अलग-अलग मेडिकल प्रक्रियाओं में अहम जिम्मेदारी निभानी पड़ती है। परिषद के मुताबिक अस्पतालों में उनके काम और जिम्मेदारी को देखते हुए अभी मिल रहा 18 हजार रुपये का स्टाइपेंड कम है।
परिषद ने यह भी कहा कि प्राइवेट मेडिकल कॉलेजों में इंटर्न डॉक्टरों को स्टाइपेंड वक्त पर न मिलने और उसमें गड़बड़ी होने जैसी शिकायतें सामने आ रही हैं। इसलिए स्टाइपेंड बढ़ाने के साथ-साथ इस गड़बड़ी को रोकने के लिए सरकार ठोस कदम उठाए, यह मांग भी बैठक में अभाविप की तरफ से रखी गई।
अभाविप के मुंबई महानगर मंत्री अभिषेक पवार ने कहा, "एमबीबीएस इंटर्न डॉक्टर हेल्थ सिस्टम का अहम हिस्सा हैं और अस्पतालों में सीधे मरीजों की देखभाल की बड़ी जिम्मेदारी निभाते हैं। फिर भी उनके काम के मुकाबले उन्हें मिलने वाला स्टाइपेंड कम है। अठारह हजार से तीस हजार रुपये की बढ़ोतरी सिर्फ आर्थिक मांग नहीं है, यह इंटर्न डॉक्टरों के काम और जिम्मेदारी के साथ सही इंसाफ करने की मांग है।"
पवार ने आगे कहा, "इस मुद्दे पर प्रशासन के साथ सीधी बैठक हो और विद्यार्थियों की बात संबंधित विभागों तक पहुंचे, इसके लिए अभाविप ने लगातार पीछा किया। यह बैठक उस कोशिश का अहम पड़ाव है। लेकिन सिर्फ आश्वासन से यह मसला नहीं सुलझेगा। दिवाली के बाद स्टाइपेंड बढ़ाने पर ठोस फैसला लेकर उसे लागू किया जाए। मांगें पूरी होने तक अभाविप का पीछा जारी रहेगा।"
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