शुक्रवार, 6 नवंबर 2026

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पटाखों से आंख में चोट खाए 15 साल से छोटे बच्चों का एएसजी आय हॉस्पिटल में मुफ्त इलाज

पटाखों से आंख में चोट खाए 15 साल से छोटे बच्चों का एएसजी आय हॉस्पिटल में मुफ्त इलाज तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं
सेहत PT24 टीम

एएसजी हॉस्पिटल लिमिटेड ने 4 से 14 नवंबर 2026 तक 95 से ज्यादा शहरों के 200 से ज्यादा केंद्रों पर 'सुरक्षित डोळे, सुरक्षित दिवाली' मुहिम चलाई है।

दिवाली के मौके पर बच्चों की आंखों को पटाखों से बचाने के लिए एएसजी हॉस्पिटल लिमिटेड ने एक खास मुहिम शुरू की है। इस मुहिम का नाम 'सुरक्षित डोळे, सुरक्षित दिवाली' रखा गया है। कंपनी के कॉर्पोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी उपक्रम के तहत पटाखों से आंख में चोट खाए 15 साल से छोटे बच्चों का इलाज एएसजी आय हॉस्पिटल में किया जाएगा।

यह उपक्रम 4 नवंबर 2026 से 14 नवंबर 2026 तक चलेगा। एएसजी के मुताबिक यह 95 से ज्यादा शहरों में फैले 200 से ज्यादा एएसजी आय हॉस्पिटल केंद्रों पर चलाया जाएगा।

एएसजी का कहना है कि मुहिम का संदेश सीधा है: त्योहार जिम्मेदारी से मनाइए और हर बच्चे की आंखों की चमक सलामत रखिए। इस उपक्रम में फर्स्ट एड, आंखों की इमरजेंसी देखभाल और दवाइयों से इलाज शामिल होगा। जहां जरूरत पड़ेगी, वहां ऑपरेशन भी किया जाएगा। परिवार सही सलाह लेने और अपने सबसे नजदीकी केंद्र की जानकारी पाने के लिए खास हेल्पलाइन नंबर 1800 1211 804 पर कॉल कर सकते हैं।

एएसजी के मुताबिक हर साल दिवाली में पटाखों से आंख में चोट के मामले बढ़ जाते हैं और इनमें छोटे बच्चों की तादाद काफी ज्यादा होती है। सबसे ज्यादा मामले कॉर्निया और आंख के सामने वाले दूसरे हिस्सों में चोट के होते हैं। एएसजी का कहना है कि आंखों के डॉक्टर से वक्त पर इलाज न मिले तो इनमें से कुछ चोटों से नजर को हमेशा के लिए नुकसान हो सकता है। चोट लगने के बाद के पहले कुछ घंटे तय करते हैं कि आंख कितनी अच्छी तरह ठीक होगी। पिछले साल दिवाली के दौरान एएसजी केंद्रों पर पटाखों से आंख में चोट खाए 500 से ज्यादा बच्चों का इलाज किया गया था।

एएसजी हॉस्पिटल लिमिटेड के एमडी और सीईओ डॉ. अरुण सिंघवी ने कहा, "दिवाली ऐसा त्योहार है जिसका बच्चे साल भर इंतजार करते हैं। पटाखे के पास बिताए कुछ सेकंड किसी बच्चे की आंखों की रोशनी न छीन लें। सीधी-सादी सावधानियों और बड़ों की सख्त निगरानी से इनमें से ज्यादातर चोटें टाली जा सकती हैं। अगर चोट लग ही जाए, तो वक्त बहुत अहम होता है और बच्चे को फौरन आंखों के डॉक्टर के पास ले जाना चाहिए। 'सुरक्षित डोळे, सुरक्षित दिवाली' मुहिम से हम चाहते हैं कि सारे परिवार त्योहार सुरक्षित तरीके से मनाएं और जख्मी बच्चों को बिना किसी देरी के विशेषज्ञ डॉक्टरों का इलाज मिले।"

एएसजी ने दिवाली में परिवारों को पांच सावधानियां बरतने की सलाह दी है। पहली, सुरक्षित दूरी रखें: पटाखा हाथ भर की पूरी दूरी से जलाएं, इसके लिए लंबी अगरबत्ती का इस्तेमाल बेहतर रहेगा, और पटाखा जलाते ही पीछे हट जाएं। दूसरी, चश्मा लगाएं: बच्चों और पटाखे जलाने वाले बड़ों को सुरक्षा चश्मा (आय वेअर) जरूर पहनना चाहिए। तीसरी, बच्चों पर नजर रखें: बच्चे पटाखे सिर्फ बड़ों की निगरानी में ही फोड़ें। चौथी, पटाखे पर कभी न झुकें: जलाते वक्त उस पर आगे न झुकें और जो पटाखा नहीं फूटा, उसके पास दोबारा न जाएं। पांचवीं, जख्मी आंख को कभी न मलें: एएसजी के मुताबिक आंख मलने से पटाखे के बारीक कण अंदर गहरे चले जा सकते हैं और चोट और बढ़ सकती है।

चोट लगने पर एएसजी की सलाह है कि बच्चे को शांत रखा जाए और दोनों आंखें जितना हो सके स्थिर रखने की कोशिश की जाए। आंख को मलें या दबाएं नहीं और उसमें फंसी चीज खुद निकालने की कोशिश न करें। आंख पर पानी की तेज धार मारकर उसे न धोएं, और काजल, मलहम, ड्रॉप्स या कोई भी घरेलू नुस्खा न आजमाएं। आंख पर बिना दबाव डाले उसे साफ कवर से हल्के से ढकें और बच्चे को फौरन नजदीकी एएसजी आय हॉस्पिटल केंद्र या आय इमर्जेंसी सेवा में ले जाएं। एएसजी का कहना है कि विशेषज्ञ डॉक्टरों से वक्त पर मिला इलाज आंख को पूरी तरह ठीक कर सकता है और नजर को हमेशा के लिए जाने से बचा सकता है।

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