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08:28 IST

पश्चिम घाट में ऊर्जा प्रोजेक्ट न हों, सुनील गोगटे ने मुख्यमंत्री फडणवीस को लिखा पत्र

भाजपा किसान मोर्चा के प्रदेश सचिव सुनील गोगटे ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को पत्र लिखकर सह्याद्री और पश्चिम घाट समूह में हाइड्रॉलिक ऊर्जा प्रोजेक्ट को परमिशन न देने की मांग की है।

पश्चिम घाट में ऊर्जा प्रोजेक्ट न हों, सुनील गोगटे ने मुख्यमंत्री फडणवीस को लिखा पत्र तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं

कर्जत तालुका के सह्याद्री और पश्चिम घाट समूह में किसी भी तरह के हाइड्रॉलिक ऊर्जा प्रोजेक्ट को केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय परमिशन न दे, यह मांग उठी है। भाजपा किसान मोर्चा के प्रदेश सचिव सुनील गोगटे ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को दिए पत्र में यह मांग रखी है।

गोगटे की मांग है कि पर्यावरण का अध्ययन करके यहां की जैव विविधता और प्राकृतिक संपदा को बचाए रखा जाए। उनका कहना है कि पश्चिम घाट समूह में कोई भी ऊर्जा प्रोजेक्ट नहीं होना चाहिए।

पत्र के मुताबिक पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने 27 जुलाई 2026 को पश्चिम घाट पर्यावरणीय संवेदनशील क्षेत्र को लेकर एक प्रारूप अधिसूचना जारी की थी। उसका अध्ययन किया गया है। पश्चिम घाट देश की पर्यावरणीय सुरक्षा के लिहाज से बेहद अहम, समृद्ध और संवेदनशील इलाका है। यहां घने जंगल, तरह-तरह की वनस्पतियां, दुर्लभ वनौषधियां, बहुत सारे पक्षी, वन्यप्राणी और सरीसृप मिलते हैं। स्थानीय और संकटग्रस्त जैव विविधता भी बड़ी मात्रा में पाई जाती है।

पश्चिम घाट कई नदियों का उद्गम क्षेत्र है। पूरे पर्यावरणीय संतुलन और जल सुरक्षा के लिए इसका संरक्षण बहुत जरूरी बताया गया है। महाराष्ट्र के रायगड जिले और पुणे जिले के पश्चिम घाट इलाके में कई बांध, जलविद्युत और पंप्ड स्टोरेज प्रोजेक्ट प्रस्तावित हैं। कुछ प्रोजेक्ट की प्रक्रिया शुरू भी हो चुकी है। पत्र में कहा गया है कि ऐसे प्रोजेक्ट से जंगल क्षेत्र, प्राकृतिक अधिवास, पहाड़ी श्रृंखलाओं, जलप्रवाह और जैव विविधता पर असर पड़ने की गंभीर आशंका है।

जंगलतोड़ की आशंका के बारे में पत्र में कहा गया है कि टोरंट जैसे प्रोजेक्ट से पश्चिम घाट के बड़े वन क्षेत्र और प्राकृतिक अधिवास का भारी नुकसान हो सकता है। बांध, जलाशय, सुरंग, पहुंच मार्ग, बिजली लाइनें, सबस्टेशन, पंप्ड स्टोरेज प्रोजेक्ट और दूसरी बुनियादी सुविधाओं के लिए बड़े पैमाने पर पेड़ कट सकते हैं। लगातार चलने वाले निर्माण कामों से वन्यजीवों के प्राकृतिक प्रवास मार्ग में रुकावट आ सकती है।

वनौषधियों के नाश का खतरा भी बताया गया है। हाइड्रॉलिक पावर प्रोजेक्ट से दुर्लभ वनस्पतियों और वनौषधियों पर खतरा पैदा हुआ है। पश्चिम घाट के जंगलों में कई स्थानीय, दुर्लभ और औषधीय पौधे मिलते हैं। जिस पेज नदी पर टोरंट प्रोजेक्ट होना है, उसकी पर्यावरणीय सेहत, नदी की जैव विविधता, मछली पकड़ने, खेती और स्थानीय पानी सप्लाई पर असर पड़ सकता है। इसलिए मांग हो रही है कि प्रभावित ग्रामसभा, स्थानीय नागरिक, पर्यावरण विशेषज्ञ, वन्यजीव जानकार और जैव विविधता विशेषज्ञों को सही मायने में शामिल किए बिना किसी बड़े प्रोजेक्ट को आखिरी मंजूरी न दी जाए।

पत्र में कहा गया है कि अगर घने जंगल, जैव विविधता, वन्यजीवों के अधिवास, वनौषधियां और प्राकृतिक जल प्रणाली हमेशा के लिए खतरे में पड़ने वाली हैं, तो ऐसे विकास पर दोबारा सोचना जरूरी है। पश्चिम घाट सिर्फ आज की पीढ़ी का नहीं, आने वाली पीढ़ियों की भी प्राकृतिक विरासत है। इसलिए रायगड और पुणे जिले के पश्चिम घाट इलाके के बांध और जलविद्युत प्रोजेक्ट के संयुक्त पर्यावरणीय असर का गहरा, स्वतंत्र और वैज्ञानिक अध्ययन होने के बाद ही ऐसे प्रोजेक्ट को मान्यता दी जाए। साथ ही रायगड और पुणे जिले के सभी प्रस्तावित बांध, जलविद्युत और पंप्ड स्टोरेज प्रोजेक्ट के कुल संचयी पर्यावरणीय असर का अध्ययन कराया जाए।

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