नोबेल शांति पुरस्कार से चूके ट्रम्प नाराज, नॉर्वे की समिति पर देश की छवि बिगाड़ने का आरोप
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने शांति के नोबेल पुरस्कार पर फिर नाराजगी जताई है। उनका कहना है कि नॉर्वे की नोबेल समिति ने देश पर कभी न मिटने वाला दाग लगा दिया।
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अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने शांति के नोबेल पुरस्कार को लेकर एक बार फिर नाराजगी जताई है। उनका कहना है कि इस पुरस्कार के लिए उन्हें दोबारा किनारे कर दिया गया और नॉर्वे की नोबेल समिति ने देश पर 'कभी न मिटने वाला दाग' लगा दिया है।
ट्रम्प के इस बयान के बाद अंतरराष्ट्रीय राजनीति में और नोबेल पुरस्कार की चयन प्रक्रिया को लेकर फिर बहस छिड़ गई है। ट्रम्प दुनिया के कई संघर्षों में बीच-बचाव की अपनी कोशिशों का बार-बार जिक्र करते रहे हैं और खुद को इस पुरस्कार के लायक मानते हैं। लेकिन शांति का नोबेल किसे दिया जाए, यह फैसला एक स्वतंत्र नोबेल समिति करती है। इसी वजह से यह मामला कूटनीतिक और राजनीतिक अहमियत वाला बन गया है।
यह बात ट्रम्प ने 9 अक्टूबर को न्यूयॉर्क के सिरैक्यूज में हुई एक सभा में कही। वहां उन्होंने नोबेल शांति पुरस्कार न मिलने पर नाराजगी जाहिर की। उनके मुताबिक उन्होंने कई अंतरराष्ट्रीय संघर्ष खत्म कराने के लिए कोशिश की है और इसके लिए उन्हें यह पुरस्कार मिलना चाहिए था। उन्होंने दावा किया कि आठ युद्ध खत्म कराने में उनकी भूमिका रही। साथ ही उन्होंने बताया कि वे ईरान और रूस-यूक्रेन के बीच चल रहे संघर्ष को खत्म करने की कोशिश भी कर रहे हैं। हालांकि उन्होंने जिन-जिन संघर्षों का नाम लिया, उनमें उनकी भूमिका और उनके दावों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है।
इस साल का यानी 2026 का नोबेल शांति पुरस्कार दक्षिण अफ्रीका की वरिष्ठ कानूनविद और मानवाधिकार कार्यकर्ता नवनीतम 'नवी' पिल्ले को घोषित किया गया है। अंतरराष्ट्रीय कानून, मानवाधिकार और न्याय के लिए उनके काम को देखते हुए उन्हें चुना गया। उन्होंने संयुक्त राष्ट्र के मानवाधिकार से जुड़े काम में और अंतरराष्ट्रीय न्याय व्यवस्था में अहम भूमिका निभाई है।
पिल्ले के नाम का ऐलान होने के बाद ट्रम्प ने उनके बारे में भी आलोचना की। उन्होंने पिल्ले को पुरस्कार के लिए चुने जाने पर नाराजगी जताई और नोबेल समिति के फैसले पर सवाल खड़े किए।
ट्रम्प के बयान से नोबेल शांति पुरस्कार की चयन प्रक्रिया पर फिर चर्चा शुरू हो गई है। यह फैसला नॉर्वेजियन नोबेल समिति लेती है, जो नॉर्वे सरकार से अलग रहकर काम करती है। इसलिए पुरस्कार न मिलने पर नॉर्वे देश को जिम्मेदार ठहराना और समिति के फैसले की आलोचना करना, ये दो अलग बातें हैं।
ट्रम्प ने समिति के फैसले को पक्षपातपूर्ण बताते हुए नॉर्वे की आलोचना की और कहा कि यह फैसला भुलाया नहीं जाएगा। उनके बयान से अमेरिकी नेतृत्व और नोबेल पुरस्कार की चयन प्रक्रिया के बीच के मतभेद एक बार फिर चर्चा में आ गए हैं।