गुरूवार, 15 अक्टूबर 2026

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00:21 IST

नितेश राणे: आंध्र प्रदेश के मत्स्य मॉडल के प्रयोग महाराष्ट्र में लागू होंगे, मछुआरों की आमदनी बढ़ाने पर जोर

मत्स्यव्यवसाय मंत्री नितेश राणे ने आंध्र प्रदेश के दो दिन के अध्ययन दौरे के बाद कहा कि वहां के उपयोगी प्रयोग महाराष्ट्र में लागू किए जाएंगे।

नितेश राणे: आंध्र प्रदेश के मत्स्य मॉडल के प्रयोग महाराष्ट्र में लागू होंगे, मछुआरों की आमदनी बढ़ाने पर जोर तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं

मत्स्यव्यवसाय मंत्री नितेश राणे ने कहा है कि आंध्र प्रदेश के उपयोगी प्रयोगों को महाराष्ट्र में असरदार तरीके से लागू किया जाएगा। मछली उत्पादन से लेकर प्रोसेसिंग, बाजार और निर्यात तक हर चरण में आधुनिक तकनीक जोड़ने का मकसद है। इससे मछुआरों और मत्स्य किसानों की आमदनी बढ़ेगी और राज्य में सक्षम, टिकाऊ और वैश्विक स्तर पर मुकाबला करने वाला मत्स्य तंत्र खड़ा किया जाएगा, ऐसा राणे ने बताया।

आंध्र प्रदेश के दो दिन के अध्ययन दौरे में मंत्री राणे ने वहां के मत्स्य आयुक्तालय के मुख्यालय का दौरा किया। उन्होंने मत्स्यव्यवसाय और एक्वाकल्चर क्षेत्र के विकास मॉडल को बारीकी से देखा। इस दौरान आधुनिक तकनीक, उत्पादकता में बढ़ोतरी, मछुआरों के कल्याण और एकीकृत मत्स्य मूल्य श्रृंखला की समीक्षा की गई।

मत्स्य आयुक्तालय की बैठक में राणे ने समुद्री और अंतर्देशीय मत्स्यव्यवसाय के साथ एक्वाकल्चर की उत्पादकता बढ़ाने के लिए चल रहे उपायों की जानकारी ली। इनमें एआई आधारित 'Aquaculture 4.0', मछलियों की सेहत और बीमारी की निगरानी, पानी की गुणवत्ता की रियल-टाइम जांच, स्मार्ट फीडिंग और मछलियों के व्यवहार का विश्लेषण शामिल हैं। साथ ही आरएएस और बायोफ्लॉक, आईओटी आधारित एक्वाकल्चर, डिजिटल ट्रेसेबिलिटी, तालाब पंजीकरण, प्रजातियों में विविधता, नावों की ट्रैकिंग और मछली पकड़ की निगरानी भी देखी गई।

दौरे में राणे ने कोव्वाडा, आंध्र प्रदेश की आनंदा एडवांस एक्वा लैब की क्षेत्रीय शोध और विश्लेषण प्रयोगशाला का भी दौरा किया। वहां उन्होंने मत्स्यपालन में रोगनिदान, पानी और मिट्टी की गुणवत्ता की जांच, झींगे की सेहत की निगरानी और वैज्ञानिक ढंग से मत्स्यपालन के प्रबंधन की जानकारी ली। प्रयोगशाला के विशेषज्ञों से उनकी विस्तार से चर्चा हुई।

चर्चा में रोगों के निदान, सूक्ष्मजीव विज्ञान आधारित विश्लेषण, पानी की गुणवत्ता के अलग-अलग मानकों, जैवसुरक्षा और संभावित खतरों की वक्त पर पहचान जैसे अहम मुद्दों पर बात हुई। यह भी समझाया गया कि समय पर प्रयोगशाला जांच और वैज्ञानिक जानकारी पर टिके मार्गदर्शन से मत्स्यपालकों को झींगे और मछलियों के जीवित रहने का प्रमाण बढ़ाने, उत्पादन का नुकसान टालने और उत्पादकता सुधारने में कैसे मदद मिल सकती है।

राणे ने समुद्री शैवाल की खेती, कृत्रिम प्रवाल भित्तियां, खुले समुद्र में केज कल्चर, जलवायु परिवर्तन को झेल सकने वाले तटीय मछुआरा गांव और अंतर्देशीय जल स्रोतों के वैज्ञानिक इस्तेमाल को भी देखा। हैचरी, मछली का चारा, प्रयोगशाला, मत्स्यपालन, प्रोसेसिंग उद्योग, कोल्ड स्टोरेज, देश के भीतर का बाजार और निर्यात को आपस में जोड़ने वाली एकीकृत मूल्य श्रृंखला के मॉडल की जानकारी भी इस दौरे में ली गई। आंध्र प्रदेश ने तकनीक और डेटा आधारित प्रबंधन के जरिए मत्स्य उत्पादन, प्रोसेसिंग, मार्केटिंग और निर्यात, सभी चरणों में उत्पादकता और आमदनी बढ़ाने पर जोर दिया है।

इस अध्ययन से मिले अनुभव महाराष्ट्र के मत्स्यपालन के लिए तकनीकी मार्गदर्शन सेवा को और सक्षम बनाने, रोगनिदान और जांच की सुविधाओं का विस्तार करने और वैज्ञानिक नजरिए से मत्स्यव्यवसाय का प्रबंधन ज्यादा असरदार बनाने में काम आएंगे। महाराष्ट्र के तटीय इलाकों और अंतर्देशीय जल स्रोतों का ज्यादा वैज्ञानिक और उत्पादक इस्तेमाल करके मछुआरों, मत्स्य किसानों और तटीय समुदायों के लिए ज्यादा मूल्य पैदा करने के लिए इस अध्ययन की उपयोगी बातों को लागू करने की आगे की कार्रवाई की जाएगी।

इस दौरान आनंदा समूह के अध्यक्ष यू. के. विश्वनाथ राजू, महाराष्ट्र सरकार के पशुसंवर्धन, दुग्धविकास और मत्स्यव्यवसाय विभाग के सचिव एन. रामास्वामी, महाराष्ट्र के मत्स्यव्यवसाय आयुक्त भानुदास पालवे, महाराष्ट्र मत्स्योद्योग विकास महामंडल के प्रबंध निदेशक प्रकाश खापले, मत्स्यव्यवसाय विशेषज्ञ मनोज शर्मा, अतिरिक्त आयुक्त महेश देवरे और नागनाथ भादुले मौजूद थे। आंध्र प्रदेश के मत्स्य आयुक्त रामा नाईक और अतिरिक्त निदेशक डॉ. शंकर राव समेत आंध्र प्रदेश और महाराष्ट्र के कई वरिष्ठ अधिकारी भी हाजिर थे।

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