निजी अस्पतालों की मनमानी वसूली पर होगी सख्ती, सुप्रीम कोर्ट में सरकार का भरोसा
केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा देकर कहा है कि इलाज के नाम पर मरीजों से ज्यादा पैसे वसूलने वाले निजी अस्पतालों पर कार्रवाई की जाएगी।
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नई दिल्ली : बीमारी हो और अस्पताल जाना पड़े, तो अच्छे-अच्छों के रोंगटे खड़े हो जाते हैं। वजह यह है कि दवाइयों, मेडिकल जांच और उपकरणों के नाम पर मरीजों से मोटी रकम वसूली जाती है। अब ऐसे निजी अस्पतालों पर जल्द सख्त कार्रवाई होने वाली है। केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दाखिल करके साफ किया है कि मरीजों की इस आर्थिक लूट को रोकने के लिए सही कदम उठाए जा रहे हैं।
रसायन और उर्वरक मंत्रालय ने कोर्ट को बताया कि दवाओं और मेडिकल सामान पर छपी कीमत से कहीं ज्यादा मुनाफा कमाने की बुरी आदत की सरकार को पूरी जानकारी है। मंत्रालय के मुताबिक इस समस्या की गहरी जांच चल रही है और सभी संबंधित पक्षों से बात करके नीतिगत फैसले लिए जा रहे हैं।
सरकार ने यह रुख डॉ. संजय कुलश्रेष्ठ की याचिका पर सुनवाई के दौरान रखा। इस याचिका में नीति आयोग और पूर्व स्वास्थ्य मंत्री की रिपोर्ट का हवाला दिया गया था। उसके मुताबिक इलाज के भारी खर्च की वजह से देश के करीब 6 करोड़ परिवार हर साल गरीबी रेखा के नीचे चले जाते हैं।
सरकार ने बताया कि अब तक 935 जरूरी दवाओं की अधिकतम कीमतें और 3881 नई दवाओं के खुदरा दाम तय किए जा चुके हैं। भारत के दवा क्षेत्र में मुकाबला जरूर है, लेकिन स्वास्थ्य क्षेत्र की इस खाई को भरने के लिए सरकार ने जल्द नए नियम लागू करने का आश्वासन दिया है।
मरीजों की लाचारी का फायदा : सभी दवाओं और मेडिकल सामान की कीमतों पर सीमा लगाने से जुड़े इस हलफनामे में सरकार ने माना कि इलाज के वक्त मरीज और उनके रिश्तेदार बहुत लाचार हालत में होते हैं। इसलिए वे अस्पताल से मोलभाव करने या दाम तय करवाने की स्थिति में नहीं रहते। इसी लाचारी का फायदा उठाकर कई अस्पताल मरीजों को लूटते हैं। भारत में सस्ती दवाएं बनती हैं, फिर भी असल में मरीजों को बनने की लागत से कई गुना ज्यादा पैसे देने पड़ते हैं।
कैंसर की दवाओं पर 700 प्रतिशत तक मार्जिन : अस्पतालों की इस मनमानी के भयानक आंकड़े सरकार ने कोर्ट के सामने रखे हैं। कैंसर की दवाओं पर अस्पताल 170 प्रतिशत से 700 प्रतिशत या उससे भी ज्यादा मुनाफा कमाते हैं। इलाज में लगने वाले दूसरे मेडिकल सामान पर 100 प्रतिशत से 1000 प्रतिशत तक मार्जिन लिया जाता है। अस्पताल उन्हीं कंपनियों से दवाएं खरीदते हैं जो सबसे ज्यादा मार्जिन देती हैं, और मरीजों को पूरी छपी कीमत पर बेचते हैं।
सुनवाई 29 सितंबर और 22 अक्टूबर 2026 को हुई। खंडपीठ में जस्टिस विक्रम नाथ और संदीप मेहता थे। सरकारी योजनाओं जैसे PMJAY और महात्मा फुले जन आरोग्य योजना में भी लूट की बात सामने आई है। मरीज को मुफ्त इलाज मिलना चाहिए, लेकिन कई बार यह इलाज नकार दिया जाता है।
मरीज क्या कर सकते हैं : डॉक्टर से कहें कि जेनेरिक दवा लिखें, ब्रांड नहीं। बिल में हर दवा का PTR और MRP जांचें। ज्यादा लगे तो National Pharmaceutical Pricing Authority (NPPA) के नंबर 1800-111-700 पर शिकायत करें।
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