निगडी के शिव मंदिर में नाबालिग लड़की से अतिप्रसंग की कोशिश, मेट्रो का ठेका मजदूर हिरासत में
पिंपरी-चिंचवड के निगडी इलाके के शिव मंदिर में दर्शन के लिए गई नाबालिग लड़की के साथ अतिप्रसंग की कोशिश का मामला सामने आया है। पूरी घटना मंदिर के सीसीटीवी कैमरे में कैद हुई और पुलिस ने आरोपी को हिरासत में ले लिया है।
पुणे के पिंपरी-चिंचवड शहर के निगडी इलाके में एक ऐसा मामला सामने आया है जिसने लोगों को झकझोर दिया है। एक शिव मंदिर में दर्शन के लिए गई नाबालिग लड़की के साथ अतिप्रसंग करने की कोशिश की गई। मंदिर में लगे सीसीटीवी कैमरे में यह पूरा वाकया कैद हो गया है। घटना के बाद निगडी ही नहीं, पूरे पिंपरी-चिंचवड शहर में लोगों में भारी गुस्सा है।
बताया गया है कि निगडी के इस स्थानीय शिव मंदिर में लड़की रोज की तरह दर्शन के लिए पहुंची थी। गर्भगृह में महादेव के सामने उसने सिर झुकाकर प्रणाम किया। जब वह पैर छूकर उठ रही थी, तभी आरोप है कि उसका पीछा करते हुए मंदिर में घुसे आरोपी ने अचानक उस पर झपट्टा मारा और उसका हाथ पकड़कर उसे एक कोने की तरफ खींचने की कोशिश की।
लड़की ने हिम्मत और समझदारी दिखाई और किसी तरह वहां से खुद को छुड़ा लिया। मंदिर के सीसीटीवी कैमरे में यह सब साफ दिखाई दे रहा है। इसी फुटेज से आरोपी की हरकत सामने आई।
घटना की जानकारी मिलते ही निगडी पुलिस हरकत में आई और आरोपी को तुरंत हिरासत में ले लिया। एफआईआर के मुताबिक आरोपी का नाम विशाल सिंह है। वह दूसरे राज्य का रहने वाला युवक है और मंदिर के पास ही चल रहे मेट्रो के निर्माण कार्य में ठेका मजदूर के तौर पर काम करता है।
इस मामले में निगडी पुलिस स्टेशन में आरोपी के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता के तहत विनयभंग और बच्चों को यौन अपराधों से संरक्षण देने वाले कानून, यानी पॉक्सो एक्ट के तहत मामला दर्ज किया गया है।
निगडी पुलिस स्टेशन के वरिष्ठ पुलिस निरीक्षक महेश बनसोडे ने बताया कि घटना की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने आरोपी को तुरंत बेड़ियां पहना दीं। उन्होंने कहा कि उस पर विनयभंग और पॉक्सो कानून के तहत मामला दर्ज है और पुलिस इस केस में आगे की कानूनी जांच तेजी से कर रही है।
पुलिस ने सभी माता-पिता से अपील की है कि वे अपने बच्चों से बात करें और उन्हें ऐसे हालात में फौरन मदद के लिए 112 (इमरजेंसी हेल्पलाइन) और 1098 (चाइल्डलाइन) नंबरों की जानकारी दें।
इस घटना के बाद सार्वजनिक और बुनियादी ढांचे के बड़े प्रोजेक्टों पर काम करने वाले मजदूरों की पृष्ठभूमि की जांच का मुद्दा एक बार फिर गंभीरता से उठ गया है। नागरिक सवाल कर रहे हैं कि क्या ऐसे ठेका मजदूरों का पुलिस वेरिफिकेशन हुआ था, और क्या ठेकेदार और प्रशासन ने इस सुरक्षा पहलू को नजरअंदाज किया।