शुक्रवार, 16 अक्टूबर 2026

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04:03 IST

नवी मुंबई के नवरात्रि पंडालों में जुए के अड्डों का आरोप, पुलिस कार्रवाई पर लोगों के सवाल

नवी मुंबई में नवरात्रि मंडलों के पंडालों में जुआ चलने का आरोप लग रहा है और नागरिक पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठा रहे हैं।

नवी मुंबई के नवरात्रि पंडालों में जुए के अड्डों का आरोप, पुलिस कार्रवाई पर लोगों के सवाल तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं

नवी मुंबई में इन दिनों नवरात्रि का जोश हर तरफ दिख रहा है। देवी की भक्ति और आराधना के माहौल के बीच शहर के अलग-अलग इलाकों से एक गंभीर और चिंता वाली बात सामने आई है। नागरिकों में चर्चा है कि गणेशोत्सव की तरह अब नवरात्रि के मंडलों और गली-मोहल्लों में भी बड़े पैमाने पर जुए के अड्डे लगाए गए हैं।

मिली जानकारी के मुताबिक कई जगहों पर रात के वक्त मंडलों के पंडाल में या उसकी आड़ में जुए की टेबल लगाई जा रही हैं। आरोप है कि ये खेल चलाने वाले पेशेवर लोग हैं और नवरात्रि का फायदा उठाकर सुरक्षित समझे जाने वाले मंडलों की आड़ में यह धंधा चलाते हैं। कुछ ईमानदार मंडलों और पदाधिकारियों ने जुए को साफ मना कर दिया है। लेकिन कई जगह पैसे और चंदे के नाम पर यह खेल चलने देने की इजाज़त दिए जाने की बात कही जा रही है।

इस पूरे मामले को लेकर नागरिकों में तीखी नाराजगी है। लोगों का कहना है कि जब भी जुए की शिकायत कंट्रोल रूम में दी जाती है, तो बीट मार्शल पुलिस सिर्फ औपचारिकता के लिए मौके पर चक्कर मार आती है। नागरिकों में यह चर्चा है कि मंडल के पास पहुंचते ही वे "बस देवी लक्ष्मी के दर्शन करके लौट जाते हैं।"

स्थानीय लोगों के मुताबिक जुआ चलाने वाले मुख्य सूत्रधार खुलेआम कहते हैं कि "ऊपर से नीचे तक साहब का आशीर्वाद है, इसलिए कोई टेंशन मत लो।" इसलिए सवाल उठ रहा है कि नवी मुंबई के पुलिस आयुक्त मिलिंद भारंबे और क्राइम ब्रांच इस मामले का गंभीरता से संज्ञान लेंगे या नहीं। पूरे नवी मुंबई की नज़र इस पर है कि पुलिस इन अवैध धंधों पर सख्त कार्रवाई करेगी या नहीं, और क्या पुलिस आयुक्त भारंबे इस मामले की गुप्त जांच कराकर संबंधित लोगों पर कार्रवाई करेंगे।

सुजान नागरिकों का कहना है कि जुए की यह लत कैंसर की तरह नौजवानों को बर्बाद कर रही है। रात में जुए के अड्डों पर होने वाले लेन-देन और नशे में धुत युवकों की मौजूदगी से झगड़े, मारपीट और धमकियों जैसी गंभीर घटनाएं होती हैं। इससे भक्ति के लिए चल रहे सार्वजनिक उत्सवों का नाम बदनाम हो रहा है। लोग पूछ रहे हैं कि चंदे के लिए जुए का पैसा लेना कितना सही है।

नागरिकों का यह भी कहना है कि हाल ही में खत्म हुए गणेशोत्सव में कई मंडलों के कार्यकर्ताओं पर "पटाखे फोड़ने" के कारण केस दर्ज किए गए। वरिष्ठ अधिकारियों के साफ आदेश का हवाला देकर पुलिस ने यह कार्रवाई की, जो सही भी है और पुलिस की अच्छी कारगुजारी भी। लेकिन आज नवरात्रि में जहां खुलेआम और बड़े पैमाने पर जुए के अड्डे लगाए जा रहे हैं, वहां वही पुलिस तमाशबीन बनी हुई है।

नवी मुंबई के नागरिक गुस्से में पूछ रहे हैं कि क्या वहां "लक्ष्मी दर्शन" हो जाने की वजह से कार्रवाई टाली जा रही है? या वरिष्ठ अधिकारियों के आदेश सिर्फ आम लोगों और छोटी बातों पर ही चलते हैं? पटाखों पर सख्त कार्रवाई करने वाली पुलिस जुए के अड्डों पर चुप क्यों बैठी है, इसका जवाब जनता को चाहिए।

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