डोंबिवली में 11वां नांदी संमेलन, रविंद्र चव्हाण स्वागताध्यक्ष; AI और मराठी पर चर्चा
डोंबिवली में 100वें अखिल भारतीय मराठी साहित्य संमेलन की पृष्ठभूमि पर 11वां नांदी संमेलन हुआ। इसमें AI, तकनीक, रोजगार और मराठी भाषा पर चर्चा हुई।
साहित्यनगरी के नाम से पहचाने जाने वाले डोंबिवली में 11वां नांदी सम्मेलन बड़े उत्साह के साथ हुआ। यह सम्मेलन 100वें अखिल भारतीय मराठी साहित्य सम्मेलन की पृष्ठभूमि में रखा गया था। सम्मेलन में डोंबिवली के साहित्यप्रेमी, युवा और आम नागरिक बड़ी संख्या में पहुंचे और उन्होंने खुलकर अपना रिस्पॉन्स दिया।
भाजपा के महाराष्ट्र प्रदेशाध्यक्ष रविंद्र चव्हाण इस सम्मेलन के स्वागताध्यक्ष के तौर पर मौजूद थे। उन्होंने मराठी भाषा की अहमियत पर बात की। चव्हाण ने कहा, "मां मराठी भाषा यानी हमारी अस्मिता, पहचान और अभिमान है। यह सम्मेलन साहित्य, तकनीक और नई पीढ़ी की सोच को जोड़ने वाला संवाद मंच है।"
इस साल के सम्मेलन में "सूचना प्रौद्योगिकी, AI और साहित्य" विषय पर चर्चा सत्र और संगोष्ठियां रखी गई थीं। AI की वजह से रोजमर्रा की जिंदगी में जो बदलाव आ रहे हैं, करियर के नए मौके और बदलती रोजगार की दुनिया पर मान्यवरों ने अपनी राय रखी। तकनीक का असर बढ़ता जा रहा है, इसलिए आगे मिलने वाले रोजगार के मौकों और चुनौतियों पर भी बात हुई।
संगोष्ठी में इस पर भी मंथन हुआ कि AI और डिजिटल तकनीक के तेजी से बदलते दौर में मराठी भाषा और साहित्य की जगह क्या होगी। नई पीढ़ी को तकनीक के साथ-साथ मराठी भाषा और साहित्य से जोड़ने की जरूरत पर खास जोर दिया गया। इस सम्मेलन को साहित्य, तकनीक और नई पीढ़ी की सोच को जोड़ने वाले संवाद मंच के रूप में देखा गया।
सम्मेलन में समर्थ युवा फाउंडेशन के अध्यक्ष और भाजपा के महाराष्ट्र प्रदेश महासचिव राजेश पांडे, साहित्यिक अरुण शेवते, वरिष्ठ पत्रकार श्रीकांत बोजेवार, माधव जोशी और प्रो. डॉ. विनय भोले समेत कई मान्यवर मौजूद थे।
महाराष्ट्र साहित्य परिषद की डोंबिवली शाखा की अध्यक्षा डॉ. धनश्री साने, डोंबिवलीकर मासिक के कार्यकारी संपादक प्रभू कापसे और कल्याण-डोंबिवली के उपमहापौर राहुल दामले भी आए। साहित्य, सामाजिक और सांस्कृतिक क्षेत्र के कई और मान्यवरों ने भी सम्मेलन में हाजिरी लगाई। डोंबिवली के रसिक श्रोताओं ने बड़ी संख्या में हिस्सा लिया और सम्मेलन को भरपूर रिस्पॉन्स दिया।