नागपुर स्नातक MLC सीट: बीजेपी में कोहले और सोले के नाम पर फंसा पेच
नागपुर शहर विधान परिषद की स्नातक सीट के लिए बीजेपी में उम्मीदवार तय नहीं हो पाया है। फडणवीस और गडकरी के समर्थक अलग-अलग नामों पर डटे हैं।
नागपुर शहर विधान परिषद के स्नातक निर्वाचन क्षेत्र के चुनाव में नामांकन की तारीख नजदीक आ रही है, और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के भीतर उम्मीदवार के नाम पर खींचतान तेज हो गई है। पार्टी के दो बड़े नेताओं, मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी, के समर्थकों के बीच उम्मीदवारी को लेकर जबरदस्त रस्साकशी चल रही है।
मुख्यमंत्री फडणवीस अपने करीबी सुधाकर कोहले के नाम पर अड़े हुए हैं। दूसरी तरफ केंद्रीय मंत्री गडकरी की पहली पसंद अनिल सोले बने हुए हैं। दोनों गुटों में से कोई पीछे नहीं हट रहा, इसलिए अब चर्चा है कि भाजपा किसी नए चेहरे को सामने लाकर सरप्राइज दे सकती है।
रविवार को मुख्यमंत्री फडणवीस और केंद्रीय मंत्री गडकरी के बीच एक उच्च स्तरीय बैठक हुई, जिसमें पालक मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले भी मौजूद थे। बैठक से पदाधिकारियों और विधायकों को दूर रखा गया। माना जा रहा है कि उसमें उम्मीदवारी पर गंभीर चर्चा हुई, लेकिन पार्टी के वरिष्ठ सूत्रों के अनुसार नाम पर अब तक अंतिम मुहर नहीं लगी है। स्थानीय कोर समिति के सदस्यों ने भी सुधाकर कोहले को लेकर अपना पक्ष रखा। उम्मीदवारी फाइनल न होने पर अब कयास लग रहे हैं कि टकराव टालने के लिए किसी और को मौका दिया जा सकता है।
कोहले के समर्थकों का दावा है कि उनका टिकट लगभग तय है। उनके मुताबिक जब सुधाकर कोहले को मतदाता पंजीकरण प्रमुख बनाया गया था, तब चंद्रशेखर बावनकुले ने कथित तौर पर उनकी उम्मीदवारी की घोषणा की थी।
इस कदम से भाजपा का एक बड़ा वर्ग नाराज हुआ और उसने पूर्व महापौर अनिल सोले को मैदान में उतरने के लिए तैयार किया। सोले के 67वें जन्मदिन पर नागरिक सम्मान समारोह हुआ, जिसे बड़े शक्ति प्रदर्शन के तौर पर देखा गया। सोले का कहना है कि वे भी मतदाता पंजीकरण प्रमुख थे, पर उन्हें उम्मीदवारी नहीं दी गई थी। ऐसे में प्रमुख नियुक्त होने से दावेदारी नहीं बनती।
फडणवीस उस वक्त नागपुर में मौजूद थे, फिर भी वे इस कार्यक्रम में शामिल नहीं हुए। भाजपा के कई पदाधिकारियों और पार्षदों ने भी कार्यक्रम से दूरी बनाए रखी। इसके बाद उम्मीदवारी को लेकर अनिश्चितता का माहौल और गहरा गया।
बताया गया है कि भाजपा नेताओं की बैठक के बाद राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के चुनिंदा वरिष्ठ पदाधिकारियों के साथ भी एक अहम बैठक हुई। उसमें दोनों दावेदारों के नामों और पार्टी के भीतर बढ़ रहे असंतोष पर चर्चा की गई, ताकि संगठन में एकजुटता बनी रहे।
भाजपा अक्सर ऐन मौके पर नए और अप्रत्याशित उम्मीदवारों को टिकट देकर चौंकाने के लिए जानी जाती है। गडकरी गुट अनिल सोले के नाम पर कायम है और मुख्यमंत्री फडणवीस सुधाकर कोहले पर अड़े हैं। ऐसे में किसी तीसरे या नए चेहरे को मौका मिलने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। अभी किसी नए नाम का खुलकर जिक्र नहीं हुआ है, लेकिन पार्टी के भीतर कई और दावेदार कतार में बताए जा रहे हैं।
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