उल्हासनगर में बीजेपी-शिवसेना टकराव तेज, स्वीकृत नगरसेवकों के चुनाव पर बीजेपी आक्रामक, गठबंधन से बाहर निकलने
उल्हासनगर महानगरपालिका में स्वीकृत नगरसेवकों के चुनाव के बाद बीजेपी ने गठबंधन से बाहर निकलने का एलान किया है।
उल्हासनगर में बीजेपी और शिवसेना (एकनाथ शिंदे गुट) के बीच टकराव तेज हो गया है। यह खींचतान उल्हासनगर महानगरपालिका के भीतर चल रही है और इसकी वजह है स्वीकृत नगरसेवकों का चुनाव। उल्हासनगर महापालिका में बीजेपी सत्ताधारी पार्टी है, और उसी बीजेपी ने अब महानगरपालिका के चुनाव और गठबंधन से बाहर निकलने का एलान किया है।
महानगरपालिका के लिए 7 स्वीकृत नगरसेवक चुने गए। इनमें शिवसेना (एकनाथ शिंदे गुट) के 5 और बीजेपी के 2 नगरसेवक चुनकर आए। इसके बाद बीजेपी ने आक्रामक रुख अपनाया है।
बीजेपी के विधायक कुमार आयलानी और बीजेपी जिलाध्यक्ष राजेश वधारिया ने प्रेस कॉन्फ्रेंस की। इसमें दोनों ने अपनी और अपनी पार्टी की भूमिका साफ की। इसी प्रेस कॉन्फ्रेंस में बीजेपी की ओर से साफ कहा गया कि वह शिवसेना के सांसद श्रीकांत शिंदे को किसी भी चुनाव में सहयोग नहीं करेगी।
स्वीकृत नगरसेवकों के चुनाव के दौरान बीजेपी के 4 में से 2 उम्मीदवारों के आवेदन तकनीकी कारणों से रद्द हो गए थे। उसके बाद बीजेपी की सीटों पर वैकल्पिक उम्मीदवार चुनने को लेकर भी विवाद खड़ा हुआ था। आखिर में शिवसेना (एकनाथ शिंदे गुट) के 5 और बीजेपी के 2 उम्मीदवार स्वीकृत नगरसेवक चुने गए। बीजेपी ने इस पूरी प्रक्रिया पर आपत्ति जताई है।
पार्टी ने यह मामला कोर्ट ले जाने की भूमिका भी जाहिर की है। यानी बीजेपी अब इस चुनाव को लेकर अदालत जाने की बात कह रही है। इस पूरे मामले से उल्हासनगर महापालिका में बीजेपी और शिवसेना के रिश्तों में बड़ी दरार दिख रही है।
प्रेस कॉन्फ्रेंस में बीजेपी नेताओं ने महापौर अश्विनी निकम के पति कमलेश निकम की भी तीखे शब्दों में आलोचना की। स्वीकृत नगरसेवकों के चुनाव से शुरू हुआ यह विवाद अब सीधे गठबंधन के भविष्य तक पहुंच गया है। बीजेपी और शिवसेना (एकनाथ शिंदे गुट) के गठबंधन में फूट पड़ने की संभावना दिख रही है।
बीजेपी के इस आक्रामक रुख से उल्हासनगर की राजनीति और महानगरपालिका का चुनाव चर्चा में है। आने वाले चुनाव में आगे क्या होता है, इस पर सबकी नजर है।