सोम‌वार, 2 नवंबर 2026

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नागपुर साइबर पुलिस ने ऑनलाइन ठगी के चार मामलों में 8 आरोपी गिरफ्तार किए

नागपुर साइबर पुलिस ने ऑनलाइन ठगी के चार मामलों में 8 आरोपी गिरफ्तार किए तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं
जुर्म PT24 टीम

पुलिस के मुताबिक महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश में छापेमारी हुई। शेयर ट्रेडिंग, डिजिटल अरेस्ट और AI वॉइस क्लोनिंग से जुड़े मामलों में कार्रवाई की गई।

नागपुर साइबर पुलिस ने ऑनलाइन ठगी करने वाले अंतरराज्यीय गिरोहों पर बड़ी कार्रवाई की है। पुलिस का दावा है कि इन गिरोहों ने अलग-अलग तरीके अपनाकर लोगों से करोड़ों रुपये की ठगी की। चार अलग-अलग मामलों की जांच के दौरान महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश में छापे मारे गए और कुल 8 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया।

सबसे बड़ा मामला 2.87 करोड़ रुपये की शेयर ट्रेडिंग ठगी का है। इसमें मुंबई के बोरीवली से 2 आरोपी पकड़े गए। पुलिस के मुताबिक एक व्यक्ति को इंस्टाग्राम पर विज्ञापन और टेलीग्राम ग्रुप के जरिए फर्जी 'एफटीएमओ' शेयर ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म पर भारी मुनाफे का लालच दिया गया। इसके बाद 33 अलग-अलग लेन-देन में उससे 2.87 करोड़ रुपये निवेश करवाए गए। जांच में सामने आया कि इस गिरोह के तार हांगकांग और दुबई के साइबर ठगी नेटवर्क से जुड़े हैं।

इस मामले में पुलिस ने सबसे पहले बीड जिले के पाटोदा के रहने वाले काकासाहेब मोहन दरुंडे को 15 अक्टूबर को गिरफ्तार किया। पुलिस के अनुसार वह खुद बैंक खाताधारक नहीं था। वह अलग-अलग प्राइवेट लिमिटेड कंपनियों के करंट कॉर्पोरेट बैंक खाते चलाता था और उन्हें साइबर ठगी के बड़े हैंडलर्स तक पहुंचाता था।

उससे मिले सुराग पर पुलिस की टीम ने मुंबई के बोरीवली इलाके में 6 दिन तक डेरा डाला। आरबीएल बैंक के इंटरनेट बैंकिंग आईपी लॉग, आईपीडीआर, कॉल डिटेल रिकॉर्ड और लोकेशन का तकनीकी विश्लेषण करके आरोपियों का पता लगाया गया। फिर फूड डिलीवरी का पार्सल आने का बहाना बनाकर एक आरोपी को घर से बाहर बुलाया गया। बोरीवली पुलिस की मदद से ब्यावर अजमेर, राजस्थान के रहने वाले भूपेंद्र महावीर जैन (32) और योगेश पारसमल जैन (37) को गिरफ्तार किया गया। कोर्ट ने दोनों को 3 दिन की कस्टडी रिमांड दी है।

जांच में यह भी पता चला कि ठगी की रकम आरबीएल के एक कॉर्पोरेट खाते से सिर्फ 24 सेकंड में 39 ट्रांजेक्शन के जरिए 38 बैंक खातों में भेजी गई। जिस मोबाइल नंबर से इंटरनेट बैंकिंग चल रही थी, उसका सिम कार्ड और मोबाइल हैंडसेट आरोपियों के पास मिला। पुलिस ने उनसे 26 बैंक खातों की किट और चेकबुक, 11 मोबाइल, 11 डेबिट कार्ड, 3 डिजिटल सिग्नेचर सर्टिफिकेट टोकन, 2 लैपटॉप, 6 आधार, पैन और वोटर आईडी कार्ड और 11 कंपनियों के रबर स्टैम्प जब्त किए। जब्त सामान की कीमत करीब 10 लाख रुपये बताई गई है। दूसरे फरार आरोपियों और अंतरराष्ट्रीय हैंडलर्स की तलाश जारी है।

दूसरा मामला डिजिटल अरेस्ट का है। आरोप है कि एनआईए अधिकारी बनकर एक व्यक्ति को डिजिटल अरेस्ट का डर दिखाया गया और उससे 1.04 करोड़ रुपये की ठगी की गई। इस मामले में पुलिस ने सांताक्रूज वेस्ट, मुंबई के रहने वाले दिनेश अंबाभाई रावरीया (32) और ताड़देव रोड के रहने वाले अरविंद कानजी गाला (45) को गिरफ्तार किया। शनिवार को पुलिस ने दोनों को मुंबई शहर से पकड़ा और 2 मोबाइल फोन जब्त किए। कोर्ट ने दोनों आरोपियों को 3 दिन की पुलिस कस्टडी रिमांड पर भेजा है। इस मामले में पीड़ित को 8.50 लाख रुपये वापस भी दिलाए गए हैं।

तीसरा मामला AI वॉइस क्लोनिंग से 50 लाख रुपये की धोखाधड़ी का है। हिवरी लेआउट के रहने वाले निखिल निर्मलकुमार नखत के पिता निर्मलकुमार को वॉट्सएप पर समाज के एक प्रतिष्ठित व्यक्ति की तस्वीर लगाकर संदेश भेजा गया। इसके बाद उसी व्यक्ति की आवाज की हूबहू नकल करके उन्हें फोन किया गया। फोन पर खुद को मुसीबत में बताकर तुरंत पैसों की जरूरत जताई गई। मोबाइल लोकेशन के आधार पर पुलिस ने इंदौर के निमावर रोड के रहने वाले नेतराम श्रीराम चडार (29) को 28 अक्टूबर को गिरफ्तार किया।

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