नागपुर में फर्जी पुलिस अफसर बनकर 'डिजिटल अरेस्ट' के नाम पर दो लोगों से 32.80 लाख की ठगी
साइबर ठगों ने एक रिटायर्ड सरकारी अधिकारी और 74 साल की महिला को वीडियो कॉल पर डराकर लाखों रुपये ट्रांसफर करवा लिए। साइबर पुलिस ने अज्ञात आरोपियों के खिलाफ मामले दर्ज किए हैं।
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नागपुर शहर में साइबर ठगों ने खुद को पुलिस अधिकारी बताकर 'डिजिटल अरेस्ट' के नाम पर दो लोगों से कुल 32 लाख 80 हजार रुपये की ठगी की है। एक मामले में सेवानिवृत्त सरकारी अधिकारी से 10 लाख रुपये लिए गए, जबकि दूसरे में 74 साल की बुजुर्ग महिला से 22.80 लाख रुपये ट्रांसफर करवाए गए। आरोप है कि ठगों ने आतंकवादियों से संबंध, मनी लॉन्ड्रिंग और संदिग्ध बैंक लेन-देन जैसे गंभीर मामलों में फंसाने की धमकी देकर पीड़ितों पर दबाव बनाया।
मंगलवार को नागपुर साइबर पुलिस स्टेशन में दोनों मामलों में शिकायतों के आधार पर अज्ञात आरोपियों के खिलाफ प्रकरण दर्ज किए गए। पुलिस अब ठगी में इस्तेमाल हुए मोबाइल नंबरों और बैंक खातों के सहारे आरोपियों तक पहुंचने की कोशिश कर रही है। अभी तक किसी की गिरफ्तारी की जानकारी नहीं है।
पहला मामला वर्धा रोड स्थित वृंदावन सिटी में रहने वाले संजय लोंदेकर (57) का है। वे एक सरकारी विभाग से रिटायर हुए हैं। जानकारी के अनुसार 1 से 10 अक्टूबर 2026 के बीच उनके मोबाइल पर व्हाट्सऐप के जरिए वीडियो कॉल आया। कॉल करने वालों ने खुद को वरिष्ठ पुलिस अधिकारी बताया। एक ने अपना नाम आईपीएस अधिकारी रणवीर सिंह बताया और दूसरे ने खुद को मुंबई पुलिस मुख्यालय का अधिकारी केशव जाधव। दोनों कथित तौर पर पुलिस की वर्दी में दिखे, ताकि संजय को शक न हो।
आरोपियों ने संजय से कहा कि कश्मीर में हुई एक आतंकी घटना की जगह से उनका पहचान पत्र मिला है। साथ ही दावा किया गया कि उनके बैंक खाते से सात करोड़ रुपये का संदिग्ध लेन-देन हुआ है। कथित तौर पर उन्हें देशविरोधी गतिविधियों से जोड़ने की बात कही गई और कानूनी कार्रवाई का डर दिखाया गया। उन्हें कथित तौर पर डिजिटल अरेस्ट की हालत में रखा गया। शिकायत के अनुसार, मामला रफा-दफा करने के नाम पर उनसे 10 लाख रुपये ऑनलाइन ट्रांसफर करवा लिए गए। बाद में उन्होंने साइबर पुलिस से शिकायत की।
दूसरा मामला पार्वती नगर में रहने वाली कामिनी गुलाबराव शेगांवकर (74) का है। साइबर ठगों ने कथित तौर पर खुद को कोलाबा क्राइम ब्रांच का अधिकारी बताया। जानकारी के मुताबिक 26 अगस्त से 12 अक्टूबर 2026 के बीच उनके पास व्हाट्सऐप पर कॉल आया। कॉल करने वाले ने खुद को पुलिस अधिकारी संदीपराव बताया। उसने कहा कि उनके नाम पर केनरा बैंक में खुले एक खाते से बेनामी लेन-देन हुआ है और इस खाते का इस्तेमाल कथित तौर पर आतंकवादियों को पैसे पहुंचाने के लिए किया गया।
शिकायत के अनुसार, पूछताछ के नाम पर आरोपी ने महिला से उनकी संपत्ति, परिवार और दूसरी निजी जानकारी ले ली। इसके बाद कथित तौर पर कानूनी कार्रवाई का डर दिखाया गया और किसी और से इस बारे में बात न करने की सख्त चेतावनी दी गई। महिला डर गईं और मामला निपटाने के नाम पर उनसे 22 लाख 80 हजार रुपये ट्रांसफर करवा लिए गए। रकम गंवाने के बाद उन्होंने साइबर पुलिस को जानकारी दी।
'डिजिटल अरेस्ट' वह तरीका है जिसमें ठग खुद को पुलिस, सीबीआई, ईडी या किसी दूसरी जांच एजेंसी का अधिकारी बताकर पीड़ित को वीडियो कॉल पर लगातार जोड़े रखते हैं। गिरफ्तारी, पूछताछ और जेल की धमकी दी जाती है और कई बार परिवार या जानने वालों से बात करने से भी रोका जाता है।
पुलिस अब यह पता लगा रही है कि पीड़ितों से संपर्क करने वाले कौन थे, रकम किन बैंक खातों में गई और दोनों वारदातों के पीछे एक ही गिरोह है या अलग-अलग ठग। जांच जारी है। पुलिस और जांच एजेंसी के नाम पर पैसे मांगे जाएं तो ट्रांसफर न करें। ठगी होने पर साइबर अपराध हेल्पलाइन 1930 पर संपर्क करें।