नागपुर फैमिली कोर्ट में 7,300 से ज्यादा केस अटके, 2024 से 2,242 जोड़ों को म्यूचुअल तलाक
आरटीआई से मिले आंकड़ों के मुताबिक नागपुर फैमिली कोर्ट में 15 अक्टूबर 2026 तक 7,321 केस पेंडिंग हैं, जबकि 1 जनवरी 2024 से अब तक 2,242 जोड़ों को आपसी सहमति से तलाक मिला है।
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नागपुर के फैमिली कोर्ट में मुकदमों के निपटारे को लेकर आरटीआई के तहत अहम जानकारी सामने आई है। यह आंकड़े 1 जनवरी 2024 से 15 अक्टूबर 2026 तक के हैं। आरटीआई कार्यकर्ता अभय कोलारकर ने इसके लिए अर्जी लगाई थी और कोर्ट के जन सूचना अधिकारी (PIO) ने उन्हें यह ब्योरा दिया।
अर्जी में साल-दर-साल का पूरा डेटा मांगा गया था। इसमें कुल दाखिल हुए मामले, आपसी सहमति से निपटे मामले और नियमित सुनवाई के बाद फैसले वाले मामले शामिल थे। साथ ही यह भी पूछा गया था कि इस दौरान कितनी अर्जियां मंजूर हुईं, कितनी खारिज हुईं और कितनी विचाराधीन रहीं। मकसद यह देखना था कि वैवाहिक विवादों की सुनवाई करने वाली इस खास अदालत में निपटारे की रफ्तार और कामकाज का बोझ कैसा है।
आंकड़ों के मुताबिक कोर्ट में 7,300 से ज्यादा केस पेंडिंग हैं। इसके बावजूद वैवाहिक विवाद, गुजारा भत्ता और बच्चों की कस्टडी से जुड़े नए केस लगातार दाखिल हो रहे हैं।
केस दाखिल होने और निपटने का हाल यह रहा। 2024 में 5,532 केस दाखिल हुए और 3,838 निपटाए गए। 2025 में 3,433 नए केस दर्ज हुए और 3,554 का निपटारा हुआ। 2026 में 1 जनवरी से 15 अक्टूबर तक 3,512 नए केस आए और 4,068 निपटाए गए।
आपसी सहमति से तलाक की बात करें तो इस दौरान 2,242 जोड़ों को डिक्री मिली। 2024 में 877 अर्जियां मंजूर हुईं और 95 खारिज हुईं। 2025 में 849 याचिकाएं मंजूर हुईं और 87 नामंजूर रहीं। 2026 में 1 जनवरी से 15 अक्टूबर तक 516 याचिकाओं को मंजूरी मिली और 65 खारिज हुईं।
गुजारा भत्ते के मामलों में 2024 में दाखिल 644 याचिकाओं में से 590 मंजूर हुईं। 2025 में 548 नए केस के मुकाबले 826 दावे मंजूर किए गए। 15 अक्टूबर 2026 तक 513 नई याचिकाओं के मुकाबले 747 दावों का फैसला अर्जी देने वालों के हक में हुआ।
बच्चों की कस्टडी में 2024 की 56 अर्जियों में से 52 मंजूर हुईं। 2025 में दाखिल सभी 61 अर्जियां मंजूर हुईं। 2026 में जनवरी से अक्टूबर के बीच 53 नए केस के मुकाबले 60 कस्टडी याचिकाएं मंजूर की गईं।
15 अक्टूबर 2026 तक नागपुर फैमिली कोर्ट में 7,321 केस पेंडिंग हैं। इनमें 3,303 केस एक से तीन साल से अटके हैं, जबकि 408 केस पांच साल या उससे भी ज्यादा पुराने हैं।
इसी के साथ क्लास-II से क्लास-IV तक स्टाफ की कमी भी है। 1 अक्टूबर 2026 तक के आधिकारिक आंकड़ों में कई पद खाली हैं। स्टेनोग्राफर (ग्रेड-I) के 7 मंजूर पदों में से 4 खाली हैं। स्टेनोग्राफर (ग्रेड-III) के 5 में से 2 पद खाली हैं। जूनियर क्लर्क के 17 में से 5 पद खाली हैं। सुपरिंटेंडेंट, डिपोजिशन राइटर और शिरस्तेदार जैसे पद भी खाली पड़े हैं, जिससे कोर्ट के प्रशासनिक कामकाज पर काफी दबाव है।
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