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19:12 IST

AI से बनी जानी-पहचानी आवाज़ से सावधान, फोन पर पैसे मांगे जाएं तो पहले पक्का करें

AI वॉइस क्लोनिंग से किसी की आवाज़ की हूबहू नक़ल बन सकती है, इसलिए फोन पर जानी-पहचानी आवाज़ सुनकर भी पैसे भेजने से पहले जांच ज़रूरी है।

AI से बनी जानी-पहचानी आवाज़ से सावधान, फोन पर पैसे मांगे जाएं तो पहले पक्का करें तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं

तकनीक के बढ़ते इस्तेमाल से ऑनलाइन लेन-देन आसान हो गया है। लेकिन इसी तकनीक का गलत इस्तेमाल करके लोगों को ठगने के मामले भी सामने आ रहे हैं। अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI की मदद से किसी इंसान की आवाज़ की हूबहू नक़ल बनाना मुमकिन हो गया है। इस तकनीक को 'AI वॉइस क्लोनिंग' कहा जाता है। इसलिए फोन पर जान-पहचान वाले की आवाज़ सुनाई दे, तब भी पैसों का कोई भी लेन-देन करने से पहले सतर्क रहना ज़रूरी है।

AI वॉइस क्लोनिंग का मतलब है AI की मदद से किसी व्यक्ति की आवाज़ जैसी बनावटी आवाज़ तैयार करना। उस व्यक्ति की आवाज़ के नमूने इस्तेमाल करके AI उसके बोलने का अंदाज़, उच्चारण और आवाज़ की खूबियों की नक़ल कर सकता है।

सोशल मीडिया के वीडियो, सार्वजनिक भाषण या दूसरी रिकॉर्डिंग से मिली आवाज़ का कुछ मामलों में गलत इस्तेमाल हो सकता है। हालांकि आवाज़ की नक़ल बनाने के लिए कितने नमूने चाहिए, यह इस्तेमाल होने वाली तकनीक पर निर्भर करता है।

ठगी कैसे हो सकती है, इसे ऐसे समझिए। किसी व्यक्ति के पास फोन आता है और दूसरी तरफ से उसके बेटे या किसी करीबी रिश्तेदार की आवाज़ सुनाई देती है। फोन करने वाला कहता है कि एक्सीडेंट हो गया है या फौरन पैसों की ज़रूरत है। जल्दबाज़ी और भावनात्मक दबाव में वह व्यक्ति बिना पक्का किए पैसे भेज सकता है।

ऐसी ठगी में AI से बनाई गई आवाज़ का इस्तेमाल हो सकता है। फिर भी हर शक वाले फोन के पीछे AI वॉइस क्लोनिंग ही हो, ऐसा नहीं है। इसलिए किसी भी अनजानी पैसों की मांग की अलग से पड़ताल करना ज़रूरी है।

बचाव के लिए पहली बात यह है कि फोन पर पैसे मांगे जाएं तो कॉल काट दें और उस व्यक्ति के हमेशा वाले नंबर पर खुद फोन करके बात करें।

दूसरी बात, परिवार के लिए एक सांकेतिक शब्द तय कर लें। आपात स्थिति में पहचान पक्की करने के लिए घर के सदस्यों के बीच कोई खास शब्द या सवाल तय करें, और यह शब्द किसी और से साझा न करें।

तीसरी बात, जल्दबाज़ी में पैसे न भेजें। एक्सीडेंट, गिरफ्तारी या मेडिकल इमरजेंसी का हवाला देकर फौरन पैसे मांगे जाएं, तो पहले पक्का कर लें।

चौथी बात, निजी जानकारी सोच-समझकर साझा करें। सोशल मीडिया पर सबके लिए उपलब्ध आवाज़ के नमूनों का गलत इस्तेमाल हो सकता है, इसलिए प्राइवेसी का ध्यान रखें।

अगर साइबर ठगी हो जाए तो फौरन बैंक से संपर्क करें और राष्ट्रीय साइबर क्राइम हेल्पलाइन नंबर 1930 पर शिकायत दर्ज कराएं। इसके अलावा आधिकारिक पोर्टल cybercrime.gov.in पर भी शिकायत की जा सकती है।

कुल मिलाकर, AI वॉइस क्लोनिंग की वजह से आवाज़ से किसी की पहचान करने में ज़्यादा सावधानी की ज़रूरत पैदा हो गई है। फोन पर आवाज़ जानी-पहचानी लगे, फिर भी पैसे मांगे जाएं या संवेदनशील जानकारी पूछी जाए तो अलग से पड़ताल करें। तकनीक का सही इस्तेमाल और जागरूकता ही ऐसी ठगी से बचाव के अहम औज़ार हैं।

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