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18:32 IST

नागपुर में कथित एआई वॉइस क्लोनिंग से 50 लाख की ठगी, साइबर पुलिस ने दर्ज किया केस

आरोप है कि व्हाट्सऐप पर कन्हैयालाल पटवारी की तस्वीर और उनसे मिलती-जुलती आवाज इस्तेमाल कर एक परिवार से दिल्ली के चांदनी चौक में 50 लाख रुपये नकद लिए गए।

नागपुर में कथित एआई वॉइस क्लोनिंग से 50 लाख की ठगी, साइबर पुलिस ने दर्ज किया केस तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं

नागपुर में साइबर ठगी का एक और मामला सामने आया है। आरोप है कि एआई की मदद से जैन समाज के एक जाने-माने शख्स की आवाज की नकल तैयार की गई और उसी के भरोसे एक परिवार से 50 लाख रुपये नकद ठग लिए गए। मामला नागपुर साइबर पुलिस के पास पहुंचा है, पुलिस ने केस दर्ज करके जांच शुरू कर दी है। अब तक किसी की गिरफ्तारी की खबर नहीं है।

शिकायत हिवरी ले-आउट में रहने वाले 42 साल के नितीन नखत ने दी है। उनके पिता निर्मल कुमार नखत 26 सितंबर 2026 को घर पर ही थे, तभी एक अनजान व्हाट्सऐप नंबर से उन्हें मैसेज आया और फिर कॉल भी आई। उस नंबर की प्रोफाइल फोटो में कन्हैयालाल पटवारी की तस्वीर लगी थी, जो जैन समाज में एक प्रतिष्ठित नाम माने जाते हैं।

आरोप है कि फोन पर जो आवाज सुनाई दी, वह हूबहू पटवारी जैसी थी। कथित तौर पर ठगों ने एआई वॉइस क्लोनिंग तकनीक से यह आवाज बनाई थी। तस्वीर भी जानी-पहचानी और आवाज भी जानी-पहचानी, इसलिए निर्मल कुमार को जरा भी शक नहीं हुआ और उन्हें लगा कि वे सचमुच पटवारी से ही बात कर रहे हैं। इसी भरोसे का फायदा उठाकर पूरी साजिश आगे बढ़ाई गई।

शिकायत के मुताबिक बात करने वाले ने कहा कि दिल्ली में अचानक इमरजेंसी आ गई है और उसे फौरन बड़ी रकम चाहिए। उसने यह भी भरोसा दिया कि नागपुर लौटते ही पैसे वापस कर देगा। मामला असली दिखे, इसके लिए उसने व्हाट्सऐप पर दिल्ली की एक जगह की लोकेशन भी भेजी, जिसे कुछ देर बाद डिलीट कर दिया गया। अचानक आई मुसीबत और परिचित आवाज के चलते परिवार ने उसकी बात मान ली। रकम की जरूरत तुरंत बताई जा रही थी, इसलिए निर्मल कुमार ने दिल्ली में अपने एक जानने वाले के जरिए पैसे पहुंचाने का इंतजाम कर दिया।

पुलिस को दी गई शिकायत के अनुसार उसी दिन, यानी 26 सितंबर को शाम करीब 5 बजकर 5 मिनट पर नई दिल्ली के चांदनी चौक इलाके में निर्मल कुमार की तरफ से भेजे गए आदमी से 50 लाख रुपये नकद ले लिए गए। रकम लेने वाले ने खुद को अंकित बताया था। उसकी भूमिका की भी जांच हो रही है। पैसे सौंपे जाने के बाद परिवार को पूरे घटनाक्रम पर शक हुआ, ठगी का एहसास हुआ और तब नितीन ने पुलिस का दरवाजा खटखटाया।

शिकायत के आधार पर पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 318(4), 319, 61(2) और 3(5) के साथ सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 66C और 66D में मामला दर्ज किया है। इन धाराओं के तहत धोखाधड़ी, किसी की पहचान के गलत इस्तेमाल और उससे जुड़े आरोपों की पड़ताल होगी। केस व्हाट्सऐप पर संपर्क करने वाले, अंकित नाम बताकर नकदी लेने वाले और उनके अज्ञात साथियों के खिलाफ है। मामले की जांच सब-इंस्पेक्टर कृष्णा कांबले कर रहे हैं।

पुलिस अभी व्हाट्सऐप पर इस्तेमाल हुए नंबरों, उनसे जुड़ी प्रोफाइल, फोन कॉल, भेजी गई लोकेशन और नकद रकम लेने वाले शख्स की जानकारी खंगाल रही है। यह भी देखा जा रहा है कि आवाज का नमूना ठगों को कहां से मिला और एआई तकनीक का इस्तेमाल किस तरह किया गया। इसके अलावा वारदात में और कौन-कौन शामिल था और पैसा आखिर किसके हाथों में पहुंचा, इसकी भी छानबीन चल रही है। फिलहाल जांच का फोकस आरोपियों की पहचान, उनकी तकनीकी गतिविधियों और रकम की बरामदगी पर है।

इस मामले में तमाम बातें अभी आरोप के दायरे में हैं। पुलिस की पड़ताल से ही साफ होगा कि आवाज की नकल कैसे की गई और रकम किन लोगों तक पहुंची।

इस घटना के बाद पुलिस ने लोगों से अपील की है कि किसी परिचित, रिश्तेदार या सम्मानित शख्स की सिर्फ आवाज सुनकर पैसे न भेजें और किसी अनजान आदमी के हाथ में नकद रकम न थमाएं। कोई इमरजेंसी बताकर फौरन बड़ी रकम मांगे, तो पहले उसके पुराने और जाने-पहचाने मोबाइल नंबर पर फोन करके पक्का कर लें। जरूरत हो तो वीडियो कॉल से भी पहचान परखें, लेकिन वीडियो कॉल में दिख रहे चेहरे को भी आखिरी सबूत न मानें और किसी दूसरे तरीके से भी पुष्टि करें।

पुलिस का कहना है कि बड़ी रकम का लेन-देन करने से पहले घर के दूसरे सदस्यों से बात करना और भुगतान की अलग से तस्दीक करना जरूरी है। जल्दबाजी में पैसों का फैसला न लें और ठगी का शक होते ही बिना देर किए पुलिस को खबर दें।

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