गोंडपिपरी की बच्ची से अत्याचार के दोषी को चंद्रपुर कोर्ट ने सुनाई 20 साल की सख्त कैद
चंद्रपुर की अतिरिक्त सत्र अदालत ने पोक्सो मामले में 26 साल के दोषी को 20 साल की सश्रम कैद और जुर्माने की सजा सुनाई।
चंद्रपुर की अतिरिक्त सत्र अदालत ने पोक्सो के एक मामले में दोषी को 20 साल की सश्रम कैद की सजा सुनाई है। मामला गोंडपिपरी तालुका की एक छह साल की बच्ची पर यौन अत्याचार का है। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश पी. एम. गुप्ता ने आरोपी को दोषी ठहराया। फैसला 3 नवंबर 2026 को आया। दोषी की उम्र 26 साल बताई गई है।
पुलिस की दी हुई जानकारी के मुताबिक घटना 16 फरवरी 2022 को शाम करीब सात से साढ़े सात बजे के बीच हुई थी। बच्ची उस वक्त खेल रही थी। आरोप है कि आरोपी ने उसका हाथ पकड़कर उसे जबरन अपने घर में खींच लिया और अंदर से दरवाजा बंद कर लिया। इसके बाद उसने बच्ची पर यौन अत्याचार किया।
बच्ची के रोने और चीखने की आवाज पड़ोसियों तक पहुंची। वे फौरन मौके पर दौड़े आए, घर का दरवाजा खोला और बच्ची को वहां से छुड़ाया।
इसके बाद बच्ची के परिवार की शिकायत पर ढाबा पुलिस स्टेशन में आरोपी के खिलाफ अपराध नंबर 5/2022 दर्ज किया गया। मामला भारतीय दंड संहिता की धारा 376 (ए)(बी), 366, 354 (ड), 323 और 506 के साथ पोक्सो कानून की धारा 4, 6 और 8 के तहत दर्ज हुआ था। इस गंभीर मामले की गहराई से जांच तब के उपविभागीय पुलिस अधिकारी (SDPO) राजा पवार ने की। जांच पूरी होने पर उन्होंने अदालत में विशेष सत्र मुकदमा नंबर 37/2022 के तहत आरोपपत्र दाखिल किया था।
चंद्रपुर की सत्र अदालत में सुनवाई चली और 3 नवंबर 2026 को अंतिम फैसला आया। सरकारी पक्ष की ओर से सहायक सरकारी अभियोक्ता एड. सुधाकर देगावार ने दलीलें रखीं। अदालत ने सरकारी पक्ष के पेश किए पुख्ता सबूत और गवाहों को मानकर आरोपी को दोषी करार दिया।
सजा का ब्योरा यह है। भारतीय दंड संहिता की धारा 376 (ए),(बी) और पोक्सो कानून की धारा 6 के तहत अदालत ने 20 साल की सश्रम कैद और 5 हजार रुपये जुर्माना सुनाया। जुर्माना न भरने पर एक महीने की साधारण कैद भुगतनी होगी। धारा 366 के तहत 3 साल की सश्रम कैद और 1 हजार रुपये जुर्माना लगाया गया है। यह जुर्माना न भरने पर 15 दिन की साधारण कैद होगी।
मुकदमे में जांच अधिकारी की जिम्मेदारी तब के उपविभागीय पुलिस अधिकारी राजा पवार ने निभाई। कोर्ट पैरवी अधिकारी के तौर पर ढाबा पुलिस स्टेशन के सफौ/452 सुधाकर आत्माराम कोहपरे और दत्तक अधिकारी के तौर पर ढाबा पुलिस स्टेशन के सपोनि वीरेंद्र केदारे ने काम देखा। इसमें दोषसिद्धि कक्ष का भी सहयोग मिला। यह कार्रवाई पुलिस अधीक्षक आयुष नोपाणी, अपर पुलिस अधीक्षक ईश्वर कातकडे और राजुरा के उपविभागीय पुलिस अधिकारी के मार्गदर्शन में पूरी हुई।
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