नागपुर में डेंटल सुपरस्पेशालिटी अस्पताल की इमारत तैयार, फिर भी शुरू नहीं; तीन महीने की नई मोहलत
नागपुर के मेडिकल कॉलेज परिसर में बना डेंटल सुपरस्पेशालिटी हॉस्पिटल एंड रिसर्च सेंटर इमारत पूरी होने के बाद भी शुरू नहीं हो पाया है। अस्पताल शुरू करने के लिए अब तीन महीने की नई मुदत दी गई है।
नागपुर में सरकारी दंत महाविद्यालय और अस्पताल के तहत मेडिकल कॉलेज परिसर में डेंटल सुपरस्पेशालिटी हॉस्पिटल एंड रिसर्च सेंटर की इमारत बनकर तैयार है, लेकिन अस्पताल अब तक शुरू नहीं हुआ है। पांच मंजिला इमारत के लिए जरूरी करीब 80 टक्के उपकरण आ चुके हैं। फिर भी उपकरण लगाने का काम और बिजली के जरूरी काम अटके हुए हैं, इसलिए अस्पताल शुरू करने में देरी हो रही है।
प्रोजेक्ट को डेढ़ साल की देरी हो चुकी थी। इसके बाद मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने मामले का संज्ञान लिया और अधिकारियों को फटकार लगाई। अब अस्पताल शुरू करने के लिए तीन महीने की और मुदत दी गई है।
यह अस्पताल मेडिकल के अधिष्ठाता कार्यालय के सामने 4,770.12 चौरस मीटर जगह पर बनाया गया है। इमारत का भूमिपूजन 4 जनवरी 2019 को मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी के हाथों हुआ था।
अस्पताल के लिए कुल 91 पद मंजूर हुए हैं, जिनमें से 60 पद भरे जा चुके हैं। आधुनिक इलाज की सुविधा देने के लिए जिला नियोजन समिति (डीपीसी) के जरिए करीब 3 करोड़ 89 लाख रुपये की उपकरण खरीद को प्रशासकीय मंजूरी मिली है। इसके अलावा राज्य योजना से करीब 3 करोड़ 43 लाख रुपये का फंड मंजूर हुआ है। इस फंड से ज्यादातर उपकरण मिल गए हैं और बाकी करीब 20 टक्के उपकरण भी जल्द आने वाले हैं।
बिजली के काम भी अटके हैं। जानकारी के मुताबिक उपकरण लगाने का काम पूरा नहीं हुआ है, इसलिए संबंधित कक्षों में बिजली की फिटिंग भी बाकी है। जरूरी बिजली कनेक्शन के बिना ये आधुनिक उपकरण चालू नहीं किए जा सकते।
जानकारी है कि वैद्यकीय संचालक जल्द ही अस्पताल आकर प्रोजेक्ट का मौका मुआयना करेंगे। इससे पहले भी वैद्यकीय संचालक मेडिकल आए थे, मगर चर्चा है कि तब डेंटल सुपरस्पेशालिटी प्रोजेक्ट पर जितना ध्यान देना था, उतना नहीं दिया गया। इसी वजह से देरी को लेकर अधिष्ठाता कार्यालय से लेकर ऊपरी प्रशासकीय स्तर तक सवाल उठ रहे हैं।
आम तौर पर प्रोजेक्ट पैसों की कमी से अटकते हैं। यहां पैसा मौजूद है, फिर भी प्रशासकीय स्तर पर रफ्तार नहीं दिखी, इसलिए देरी हुई है। बताया जाता है कि तत्कालीन अधिष्ठाता डॉ. अभय दातारकर ने प्रोजेक्ट के काम में सक्रिय भूमिका निभाई थी। उनके तबादले के बाद प्रभारी अधिष्ठाता जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। जानकारी के मुताबिक लंबे समय तक प्रोजेक्ट के लिए कोई बैठक नहीं हुई, इससे भी काम रुका रहा। मुख्यमंत्री कार्यालय से पूछताछ होने के बाद सार्वजनिक बांधकाम विभाग के साथ बैठक की गई, ऐसा भी बताया जा रहा है।
देरी का असर आगे भी दिख सकता है। उपकरणों की कीमतें बढ़ने की संभावना है और सुपरस्पेशालिटी इलाज का इंतजार कर रहे मरीजों को और रुकना पड़ेगा। अस्पताल शुरू होने पर अलग-अलग विभागों में पोस्ट ग्रेजुएट कोर्स की तीन-तीन सीटें बढ़ने की उम्मीद थी, लेकिन प्रोजेक्ट अटकने से यह प्रक्रिया भी लटक गई है। नया अस्पताल शुरू होने के बाद पीजी की सीटें मौजूदा संख्या से करीब दुगुनी होकर 44 तक पहुंचने की उम्मीद है। फिलहाल पहले साल में 21 विद्यार्थी हैं।
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