नौजवानों में क्यों बढ़ रहे हैं बाल झड़ने के मामले, डॉ. प्रियदर्शिनी दास ने गिनाए कारण
युजेनिक्स हेअर सायन्सेस की सीनियर हेअर ट्रान्सप्लांट सर्जन डॉ. प्रियदर्शिनी दास के मुताबिक कम उम्र में बाल झड़ने के पीछे सिर्फ लाइफस्टाइल नहीं, कई कारण होते हैं।
बाल झड़ना पहले उम्र बढ़ने के साथ जुड़ी परेशानी मानी जाती थी, लेकिन अब तस्वीर बदल गई है। बीस और तीस की उम्र के नौजवान भी बाल झड़ने, माथे के ऊपर बालों की लाइन पीछे खिसकने और सिर के ऊपरी हिस्से में बाल पतले होने से परेशान हैं। करियर का तनाव, बदलती लाइफस्टाइल, नींद की आदतें और दिखने को लेकर बढ़ी जागरूकता की वजह से कम उम्र में बाल झड़ना कई लोगों के लिए चिंता की बात बन गया है। इस बारे में युजेनिक्स हेअर सायन्सेस की सीनियर हेअर ट्रान्सप्लांट सर्जन डॉ. प्रियदर्शिनी दास ने विस्तार से जानकारी दी है।
डॉ. प्रियदर्शिनी के मुताबिक अकाल बाल झड़ना सिर्फ गलत लाइफस्टाइल का नतीजा नहीं होता। इसके पीछे की वजह अक्सर इससे कहीं ज्यादा उलझी हुई होती है। खासकर एंड्रोजेनेटिक यानी पैटर्न हेअर लॉस में अनुवांशिक झुकाव को अहम कारण माना जाता है। जिन लोगों में यह झुकाव पहले से हो सकता है, उनमें तनाव, नींद की कमी, खानपान में बदलाव और आज की लाइफस्टाइल के दूसरे कारण समस्या को बढ़ा सकते हैं या उसे जल्दी सामने ला सकते हैं।
डॉ. प्रियदर्शिनी बताती हैं कि बाल झड़ने की वजह सिर्फ तनाव नहीं हो सकती। अनुवांशिक प्रवृत्ति अक्सर बड़ा कारण होती है, मगर आपकी मौजूदा लाइफस्टाइल उसे हवा दे सकती है। तनाव, गलत खानपान, प्रदूषण और दूसरे माहौल से जुड़े कारण बाल झड़ने की वजह बन सकते हैं या उसे बढ़ा सकते हैं। अगर बालों की जड़ें, यानी हेअर फॉलिकल्स, पहले से अनुवांशिक तौर पर कमजोर हों, तो यह प्रक्रिया और तेज हो सकती है।
उनका कहना है कि लगातार बाल झड़ रहे हों तो इसे "तनाव की वजह से हो रहा होगा" या "यह कुछ वक्त का दौर है" कहकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। बाल झड़ने का असली कारण वक्त रहते समझना और सही सलाह लेना जरूरी है।
नौजवानों में यह समस्या बढ़ती दिख रही है और डॉ. प्रियदर्शिनी के अनुसार इसमें लाइफस्टाइल की भी अहम भूमिका है। काम के लंबे घंटे, कम नींद और लगातार तनाव से बालों के बढ़ने के कुदरती चक्र पर असर पड़ सकता है। नतीजे में कुछ लोगों में बाल ज्यादा झड़ सकते हैं। खानपान की अनदेखी भी बड़ा कारण हो सकती है। वजन घटाने के लिए जरूरत से ज्यादा परहेज करने या खाने से प्रोटीन, आयरन और दूसरे जरूरी पोषक तत्व कम मिलने से बालों की सेहतमंद बढ़त पर असर पड़ सकता है। शरीर में इन तत्वों की कमी हो तो असर और ज्यादा दिख सकता है।
इसके बाद प्रदूषण का मुद्दा आता है, जिसे डॉ. प्रियदर्शिनी ने शहरी भारत के सामने एक गंभीर और बढ़ती चुनौती बताया। हवा के प्रदूषकों के लगातार संपर्क में रहने से खोपड़ी की सेहत पर असर पड़ सकता है। इससे ऑक्सीडेटिव तनाव और जलन बढ़ने की आशंका रहती है, जिससे पहले से संवेदनशील खोपड़ी की हालत और बिगड़ सकती है। हालांकि अनुवांशिक बाल झड़ने का सीधा या मुख्य कारण प्रदूषण को नहीं माना जाता। लेकिन खोपड़ी पहले से नाजुक हो तो प्रदूषण का अतिरिक्त बोझ बालों की सेहत के लिए हालात और मुश्किल बना सकता है।
डॉ. प्रियदर्शिनी के मुताबिक असली दिक्कत सिर्फ बाल झड़ने में नहीं है, बल्कि इसमें है कि हम शुरुआती लक्षण पहचानते ही नहीं। अक्सर बाल पतले होते साफ दिखने लगें तब तक हम अनदेखी करते रहते हैं और तब तक इसे छिपाना भी मुश्किल हो जाता है। जितनी जल्दी कारण समझ आएगा, उतना ही सही कदम उठाना आसान हो सकता है, क्योंकि कुछ वक्त के लिए बाल झड़ने और धीरे-धीरे बढ़ने वाली समस्या के कारण अलग हो सकते हैं और उनके लिए तरीका भी अलग होता है।
डॉ. प्रियदर्शिनी का कहना है कि नौजवान भारतीयों में इस समस्या की वजह रोज की जिंदगी की किसी एक गलत आदत में ढूंढना ठीक नहीं है। जीन इसकी पृष्ठभूमि तैयार कर सकते हैं, लेकिन तनाव, खानपान, लाइफस्टाइल और माहौल के कारण भी बीमारी की शुरुआत, उसके स्वरूप और तीव्रता पर असर डाल सकते हैं। इसलिए शरीर से मिल रहे शुरुआती संकेतों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। सही वक्त पर लक्षणों पर ध्यान देकर विशेषज्ञ से जांच करवाई जाए, तो मूल कारण समझने और सही इलाज या आगे के उपाय तय करने में मदद मिल सकती है।