मंगलवार, 6 अक्टूबर 2026

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19:12 IST

बड़ों में सेरेब्रल पाल्सी: चार आम गलतफहमियां और डॉ. नीरज जैन की बताई सच्चाई

नवी मुंबई के वाशी स्थित न्यूईरा हॉस्पिटल्स के वरिष्ठ न्यूरोलॉजिस्ट डॉ. नीरज जैन ने बड़ों में सेरेब्रल पाल्सी से जुड़ी चार गलतफहमियों पर बात की।

बड़ों में सेरेब्रल पाल्सी: चार आम गलतफहमियां और डॉ. नीरज जैन की बताई सच्चाई
एआई से बनाई गई प्रतीकात्मक तस्वीर; यह घटना का वास्तविक फोटो नहीं है | PT24

सेरेब्रल पाल्सी का नाम आते ही कई लोग मान लेते हैं कि यह बीमारी सिर्फ छोटे बच्चों की है। लेकिन बचपन में शुरू होने वाली इस बीमारी का असर बड़े होने पर भी दिख सकता है। बड़ी उम्र में मांसपेशियों का अकड़ना, दर्द, थकान और हरकत से जुड़ी दिक्कतें सामने आ सकती हैं। इसका मतलब यह नहीं कि इंसान दूसरों पर निर्भर हो जाएगा या इलाज की जरूरत खत्म हो गई।

बड़ों में सेरेब्रल पाल्सी को लेकर चार आम गलतफहमियां और उनकी सच्चाई नवी मुंबई के वाशी में न्यूईरा हॉस्पिटल्स के वरिष्ठ न्यूरोलॉजिस्ट डॉ. नीरज जैन ने बताई हैं।

डॉ. जैन के मुताबिक सेरेब्रल पाल्सी तब होती है जब दिमाग का विकास चल रहा हो और उसी दौरान दिमाग को चोट लगे या उसके विकास में रुकावट आए। इसका असर हरकत, मांसपेशियों के तनाव, शरीर के संतुलन और तालमेल पर पड़ सकता है। समय से पहले जन्म, कुछ खास इन्फेक्शन, दिमाग का दौरा, दिमाग तक खून की सप्लाई कम होना या नसों से जुड़ी दूसरी दिक्कतें इसकी वजह बन सकती हैं। कुछ मरीजों में सटीक वजह पता नहीं चल पाती।

डॉ. जैन बताते हैं कि बड़ों में मांसपेशियों का अकड़ना, उनमें कमजोरी, हरकतों पर काबू रखने में मुश्किल, संतुलन बिगड़ना, दर्द और चलने या दूसरे काम करने में तकलीफ हो सकती है।

पहली गलतफहमी यह है कि दिमाग की चोट बढ़ने से सेरेब्रल पाल्सी की तीव्रता बढ़ती जाती है। डॉ. जैन के मुताबिक सच्चाई यह है कि सेरेब्रल पाल्सी की वजह बनने वाली दिमाग की मूल चोट वक्त के साथ बढ़ती नहीं। हां, उम्र बढ़ने पर मांसपेशियों का अकड़ना, दर्द, कमजोरी, थकान और जोड़ों से जुड़ी दिक्कतें बढ़ या बदल सकती हैं। इसलिए जरूरत के हिसाब से नियमित इलाज और जांच करवाना जरूरी है।

दूसरी गलतफहमी यह है कि सेरेब्रल पाल्सी वाला इंसान अपने पैरों पर खड़ा होकर आजाद जिंदगी नहीं जी सकता। डॉ. जैन का कहना है कि कई बड़े लोग सेरेब्रल पाल्सी के बावजूद अच्छी पढ़ाई करते हैं, नौकरी करते हैं, रिश्ते निभाते हैं और अपने दम पर खुशहाल जिंदगी जीते हैं। हर इंसान की हरकत करने की क्षमता अलग होती है। कुछ लोगों को रोजमर्रा के कामों के लिए सहायक उपकरणों या दूसरी मदद की जरूरत पड़ सकती है।

तीसरी गलतफहमी यह है कि दर्द और लगातार थकान बढ़ती उम्र का आम हिस्सा है। डॉ. जैन के अनुसार दर्द, थकान या मांसपेशियों के बढ़े हुए तनाव को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। मांसपेशियों के तनाव में बदलाव, शरीर की बनावट, हरकत करने का तरीका या शारीरिक गतिविधि कम होने से भी ये दिक्कतें हो सकती हैं। इसलिए ऐसे लक्षणों की जांच न्यूरोलॉजिस्ट से करवाना जरूरी है।

चौथी गलतफहमी यह है कि बड़ों की सेरेब्रल पाल्सी का कोई इलाज नहीं हो सकता। डॉ. जैन के मुताबिक इलाज सिर्फ बचपन तक सीमित नहीं है। फिजियोथेरेपी, ऑक्युपेशनल थेरेपी, मांसपेशियों का तनाव कम करने की दवाएं, दर्द का इलाज और हरकत के लिए सहायक उपकरण बड़ों की कार्यक्षमता और जीवन की गुणवत्ता बनाए रखने में मदद कर सकते हैं।

डॉ. जैन का कहना है कि सेरेब्रल पाल्सी की शुरुआत भले बचपन में होती हो, लेकिन 18 साल का होने के बाद भी उसके लिए मेडिकल इलाज बंद नहीं करना चाहिए। नियमित हेल्थ चेकअप से हरकत में बदलाव, मांसपेशियों का तनाव, दर्द और थकान जैसी दिक्कतें वक्त रहते पकड़ में आ सकती हैं। सही समय पर इलाज और जरूरी मदद मिले तो सेरेब्रल पाल्सी वाले बड़े लोगों को सक्रिय और आत्मनिर्भर जिंदगी जीने में मदद मिल सकती है।

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