मंगलवार, 6 अक्टूबर 2026

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17:38 IST

सेरेब्रल पाल्सी वाले बच्चों के लिए तीन थेरपी क्यों जरूरी, डॉ. श्रुती घाटलिया ने बताया

वर्ल्ड सेरेब्रल पाल्सी डे पर बालरोगतज्ज्ञ डॉ. श्रुती घाटलिया ने फिजिओथेरपी, ऑक्युपेशनल थेरपी और स्पीच थेरपी की अहमियत समझाई।

सेरेब्रल पाल्सी वाले बच्चों के लिए तीन थेरपी क्यों जरूरी, डॉ. श्रुती घाटलिया ने बताया
एआई से बनाई गई प्रतीकात्मक तस्वीर; यह घटना का वास्तविक फोटो नहीं है | PT24

वर्ल्ड सेरेब्रल पाल्सी डे के मौके पर मुंबई के घाटकोपर स्थित झायनोव्हा शाल्बी हॉस्पिटल की बालरोगतज्ज्ञ डॉ. श्रुती घाटलिया ने बताया कि सेरेब्रल पाल्सी वाले बच्चों के लिए फिजिओथेरपी, ऑक्युपेशनल थेरपी और स्पीच थेरपी क्यों अहम हैं।

सेरेब्रल पाल्सी (CP) दिमाग से जुड़ी समस्या है। इसका असर बच्चों की हरकतों, मांसपेशियों की ताकद और उन पर कंट्रोल, शरीर के बैलेंस और शरीर के अलग-अलग हिस्सों के तालमेल पर पड़ सकता है। बच्चे के जन्म से पहले, जन्म के वक्त या छोटी उम्र में दिमाग के विकास में कोई दिक्कत आए या दिमाग को चोट लगे, तो सेरेब्रल पाल्सी हो सकती है।

इसके लक्षण हर बच्चे में एक जैसे नहीं होते। किसी बच्चे की मांसपेशियां बहुत अकड़ी हुई या बहुत कमजोर हो सकती हैं। कुछ बच्चों को चलने या बैलेंस संभालने में दिक्कत आ सकती है, और कुछ की हरकतें आम तौर से अलग हो सकती हैं। हाथों की हरकत में, चीजें पकड़ने या लिखने जैसे कामों में भी परेशानी हो सकती है।

कुछ बच्चे साफ बोल नहीं पाते या दूसरों से बात करने में उन्हें दिक्कत होती है। कुछ को खाना या पानी निगलने में तकलीफ हो सकती है। इसलिए बच्चे में ऐसे लक्षण दिखें तो पालक उन्हें नजरअंदाज न करें। डॉ. श्रुती घाटलिया के पास जाकर इलाज लिया जा सकता है।

डॉ. घाटलिया के मुताबिक पालकों को यह समझना जरूरी है कि सेरेब्रल पाल्सी वाले बच्चों के विकास में थेरपी का बड़ा हिस्सा होता है। सही थेरपी से बच्चे अपने काम बेहतर तरीके से कर सकते हैं और रोजमर्रा की जिंदगी में दूसरों पर उनकी निर्भरता कम होने में मदद मिल सकती है।

फिजिओथेरपी के बारे में उन्होंने बताया कि यह बच्चे के शरीर की हरकतें सुधारने में मदद करती है। इसमें मांसपेशियों की ताकद बढ़ाने, बैलेंस सुधारने, हरकत को आसान बनाने, शरीर को लचीला रखने और चलने की क्षमता सुधारने पर ध्यान दिया जाता है। विशेषज्ञों की देखरेख में नियमित कसरत करने से बच्चों की शारीरिक क्षमता में सुधार हो सकता है। इससे चलना, उठना, बैठना या दूसरी रोज की हरकतें अपेक्षाकृत आसान हो सकती हैं।

ऑक्युपेशनल थेरपी के बारे में डॉ. घाटलिया ने कहा कि यह बच्चों को रोज के काम खुद करने के लिए जरूरी हुनर सिखाने में मदद करती है। मिसाल के तौर पर खुद खाना, कपड़े पहनना, लिखना, खेलना, चीजें पकड़ना और हाथों का सही इस्तेमाल करना इसमें शामिल है। इस थेरपी से बच्चों को धीरे-धीरे अपने काम खुद करने का आत्मविश्वास मिल सकता है और वे ज्यादा आत्मनिर्भर हो सकते हैं।

स्पीच थेरपी उन बच्चों के लिए काम की हो सकती है जिन्हें बोलने में दिक्कत होती है या जो साफ नहीं बोल पाते। कुछ बच्चों को अपनी जरूरतें या भावनाएं दूसरों को बताने में मुश्किल आती है। ऐसे बच्चों में बातचीत का हुनर विकसित करने में स्पीच थेरपी मदद कर सकती है। जिन बच्चों को खाना या पानी निगलने में तकलीफ होती है, उन्हें विशेषज्ञ सुरक्षित तरीके से खाने और निगलने का सही तरीका सिखाने में मदद कर सकते हैं।

डॉ. घाटलिया ने यह भी कहा कि सेरेब्रल पाल्सी वाले हर बच्चे की समस्या और जरूरत अलग होती है। इसलिए हर बच्चे के लिए एक ही थेरपी या एक ही इलाज का तरीका ठीक हो, यह जरूरी नहीं। बच्चे के लक्षण, उसका विकास, उसकी दिक्कतें और उसके लक्ष्य देखकर थेरपी की योजना बननी चाहिए। डॉक्टर और थेरपिस्ट बच्चे की जरूरत समझकर सही थेरपी और कसरत सुझा सकते हैं। पालकों के लिए थेरपी नियमित जारी रखना और विशेषज्ञों की सूचनाओं का पालन करना अहम है।

उनके मुताबिक बच्चे की प्रगति में सिर्फ डॉक्टर या थेरपिस्ट ही नहीं, पालक, परिवार के सदस्य, टीचर और बच्चे की देखभाल करने वालों की भी बड़ी भूमिका होती है। सब मिलकर मदद करें तो बच्चे के लिए स्कूल जाना, दूसरे बच्चों के साथ खेलना और घर की रोज की चीजों में शामिल होना ज्यादा आसान हो सकता है। पालक अपने बच्चे की तुलना दूसरे बच्चों से न करें, क्योंकि हर बच्चे की प्रगति अलग रफ्तार से हो सकती है। इसलिए सब्र रखना और बच्चे का नियमित हौसला बढ़ाना जरूरी है।

डॉ. घाटलिया ने बताया कि सेरेब्रल पाल्सी ऐसी स्थिति है जिसमें बच्चे को लंबे वक्त तक मदद और थेरपी की जरूरत पड़ सकती है। लेकिन सही वक्त पर विशेषज्ञ की सलाह लेकर सही थेरपी शुरू की जाए, तो बच्चे की हरकतों, रोज के काम करने की क्षमता, बातचीत की क्षमता और आत्मविश्वास में सुधार आने में मदद मिल सकती है।

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