बुधवार, 14 अक्टूबर 2026

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19:12 IST

नागपुर: ढोमणे ज्वेलर्स की 40 लाख की लूट में यूपी से चार गिरफ्तार, कार जब्त

नागपुर पुलिस ने एमआईडीसी इलाके की ज्वेलरी दुकान में सोने-चांदी की लूट का मामला सुलझाने का दावा किया है। बरेली, नोएडा और मेरठ से चार आरोपी पकड़े गए हैं।

नागपुर के एमआईडीसी इलाके में एक सराफा दुकान से करीब 40 लाख रुपये के गहने लूटने का मामला पुलिस ने खोल लिया है। क्राइम ब्रांच ने इस वारदात में शामिल बताए जा रहे अंतरराज्यीय गिरोह के चार लोगों को उत्तर प्रदेश के बरेली, नोएडा और मेरठ से पकड़ा है। गिरोह के बाकी लोग अभी हाथ नहीं आए हैं और उनकी तलाश चल रही है।

पुलिस आयुक्त विश्वास नांगरे पाटील ने 14 अक्टूबर को प्रेस कॉन्फ्रेंस बुलाकर पूरे मामले की जानकारी दी। उनके मुताबिक वारदात में इस्तेमाल हुई फॉर्च्यूनर गाड़ी भी पुलिस के कब्जे में है, जिसका नंबर MH-49-B-9192 बताया गया है।

लूट 3 अक्टूबर 2026 को शाम करीब 4.40 से 4.55 बजे के बीच हुई थी। जगह हिंगणा रोड पर महाकाली बार के ठीक सामने है, जो एमआईडीसी थाने के दायरे में आती है। यहां गजानन नगर, एमआईडीसी में रहने वाले 39 साल के राकेश सुभाष ढोमणे की सोने-चांदी के गहनों की खरीद-बिक्री वाली दुकान है, जिसका नाम "ढोमणे ज्वेलर्स" है। घटना के वक्त दुकान में सिर्फ उनका 24 साल का कर्मचारी शुभम खेमराज हाडगे बैठा था।

पुलिस के बयान के अनुसार दिन-दहाड़े चार अनजान लोग दुकान के अंदर घुस आए। उन्होंने शुभम को बंदूक या पिस्तौल जैसी दिखने वाली कोई चीज़ दिखाई और जान से मारने की धमकी दी। आरोप है कि इसके बाद उन्होंने शुभम के साथ मारपीट की, दुकान में रखे सोने और चांदी के गहने समेटे और भाग निकले। लूटे गए माल का वज़न करीब 350 ग्राम है और उसकी कीमत लगभग 40 लाख रुपये आंकी गई है।

दुकान मालिक की शिकायत पर एमआईडीसी पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 309(4) और 3(5) में केस दर्ज किया। मामला गंभीर था, इसलिए एमआईडीसी पुलिस और नागपुर क्राइम ब्रांच दोनों इसकी जांच में जुट गईं। आरोपी घटना के बाद गायब हो चुके थे, इसलिए उनकी पहचान करना ही सबसे बड़ी मुश्किल थी।

इसके लिए पुलिस ने वारदात की जगह और आसपास के इलाकों से 300 से 400 सीसीटीवी कैमरों की रिकॉर्डिंग निकालकर देखी। आरोपी किस तरफ आए-गए, किन रास्तों से निकले और उनकी दूसरी कड़ियां क्या हैं, इसकी बारीकी से पड़ताल हुई। तकनीकी जांच के साथ-साथ आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की मदद ली गई और हालात से जुड़े सबूत जोड़कर आरोपियों के संभावित ठिकानों तक पहुंचने की कोशिश की गई।

जब साफ हुआ कि आरोपी महाराष्ट्र छोड़ चुके हैं, तो क्राइम ब्रांच की दो खास टीमें उत्तर प्रदेश और हरियाणा के लिए रवाना कर दी गईं। पुलिस के मुताबिक ये टीमें करीब सात दिन तक आरोपियों के पीछे लगी रहीं और अलग-अलग राज्यों में दबिश देती रहीं। प्रेस नोट में यह भी बताया गया है कि टीमों ने चार दिन अपनी पहचान छिपाकर स्थानीय इलाकों में गुपचुप जानकारी जुटाई, आरोपियों की लोकेशन और संपर्कों का पता लगाया और वहां की पुलिस से मदद ली। ज़रूरत पड़ी तो एक तीसरी टीम भी दूसरे राज्य भेजी गई।

सबसे पहले अभिषेक सिंह ठाकुर पुलिस के हत्थे चढ़ा, जिसे उत्तर प्रदेश के बरेली से हिरासत में लिया गया। उससे लंबी पूछताछ हुई और उसी से बाकी साथियों का सुराग मिला। इसके बाद जांच टीम ने तलाश तेज़ की और तीन और लोग पकड़े गए: दो नोएडा से और एक मेरठ से।

पुलिस के प्रेस नोट में गिरफ्तार किए गए चारों के नाम इस तरह दर्ज हैं:

अभिषेक सिंह ठाकुर, निवासी बरेली। जयराम उर्फ जोगिंदर अशोक सिंह ठाकुर, उम्र 19 साल, नोएडा का रहने वाला। शुभांकित नीलेशकुमार चतुर्वेदी, उम्र 22 साल, वह भी नोएडा से। राजन सामी शर्मा, उम्र 29 साल, मेरठ का निवासी।

पुलिस का कहना है कि चारों कथित तौर पर इसी लूट में शामिल थे। प्रेस नोट में इन्हें आदतन अपराधी बताया गया है, जिनके नाम पुलिस रिकॉर्ड में पहले से हैं। हर आरोपी की इस वारदात में ठीक-ठीक क्या भूमिका थी, यह अभी जांच का विषय है। पुलिस यह भी देख रही है कि ये लोग और किन अपराधों से जुड़े रहे हैं।

इस कार्रवाई में दूसरे राज्यों की पुलिस ने भी हाथ बंटाया। प्रेस नोट में उत्तर प्रदेश के बदायूं की स्वाट टीम के हेड कांस्टेबल सचिन झा और सहारनपुर के सब-इंस्पेक्टर नीरज पवार का खास तौर पर ज़िक्र है। इनके साथ पुलिसकर्मी हरेंद्र, अमित चिकारा, जोगेंद्र और विवेक राणा को भी सहयोग के लिए याद किया गया है।

नागपुर पुलिस की तरफ से यह पूरा अभियान पुलिस आयुक्त नांगरे पाटील की देखरेख में चला। उनके साथ सह पुलिस आयुक्त नवीनचंद्र रेड्डी, अपराध शाखा के अपर आयुक्त राजेंद्र दाभाडे, डिटेक्शन विभाग के उपायुक्त दीपक अग्रवाल और क्राइम ब्रांच के सहायक आयुक्त वैभव जाधव ने निर्देश दिए। मैदान में क्राइम ब्रांच की पुलिस निरीक्षक शुभांगी देशमुख थीं, जिनके साथ सहायक पुलिस निरीक्षक चेतन बोरखेडे, नितीन चुलपार और राजाराम जाधव समेत कई अफसर और कर्मचारी जांच में लगे रहे।

चार आरोपियों का पकड़ा जाना पुलिस के लिए बड़ी कामयाबी माना जा रहा है, मगर जांच अभी अधूरी है। लूटे गए करीब 40 लाख रुपये के गहने अब तक बरामद नहीं हुए हैं और गिरोह के बाकी सदस्यों तक पहुंचना भी बाकी है। पुलिस यह भी खंगाल रही है कि आरोपियों ने नागपुर की इसी दुकान को निशाना क्यों बनाया और लूट के बाद वे किन रास्तों से निकले। जब्त की गई फॉर्च्यूनर से जुड़े तथ्यों की भी जांच हो रही है।

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