नागपुर की ज्वेलरी दुकान में 40 लाख की लूट, यूपी से चार आरोपी गिरफ्तार
नागपुर क्राइम ब्रांच ने एमआईडीसी इलाके की ज्वेलर्स दुकान में हुई लूट के मामले में उत्तर प्रदेश के बरेली, नोएडा और मेरठ से चार आरोपियों को गिरफ्तार किया है।
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नागपुर पुलिस की क्राइम ब्रांच ने एमआईडीसी थाना इलाके की एक ज्वेलर्स दुकान में हुई करीब 40 लाख रुपये की लूट का मामला सुलझाने का दावा किया है। पुलिस के मुताबिक इस वारदात में शामिल अंतरराज्यीय गिरोह के चार आरोपियों को उत्तर प्रदेश के अलग-अलग शहरों से गिरफ्तार किया गया है। गिरोह के बाकी सदस्यों की तलाश अभी जारी है।
नागपुर शहर के पुलिस आयुक्त विश्वास नांगरे पाटिल ने 14 अक्टूबर को प्रेस कॉन्फ्रेंस में इस कार्रवाई की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि उनके मार्गदर्शन में क्राइम ब्रांच की टीमें सात दिन तक आरोपियों के पीछे लगी रहीं और अलग-अलग राज्यों में दबिश देकर चार संदिग्धों को पकड़ा। वारदात में इस्तेमाल हुई फॉर्च्यूनर कार भी जब्त कर ली गई है। पुलिस के अनुसार कार का पंजीकरण क्रमांक MH-49-B-9192 बताया गया है।
पुलिस से मिली जानकारी के हिसाब से वारदात 3 अक्टूबर 2026 को शाम करीब 4.40 से 4.55 बजे के बीच हुई। जगह एमआईडीसी थाना इलाके में हिंगणा रोड पर महाकाली बार के सामने की है। गजानन नगर, एमआईडीसी के रहने वाले राकेश सुभाष ढोमणे (39) की वहां "ढोमणे ज्वेलर्स" नाम से सोने-चांदी के गहनों की खरीद-बिक्री की दुकान है। उस वक्त दुकान में उनका कर्मचारी शुभम खेमराज हाडगे (24) अकेला मौजूद था।
पुलिस के अनुसार चार अज्ञात लोग दिनदहाड़े दुकान में घुसे। उन्होंने शुभम को बंदूक जैसी दिखने वाली चीज दिखाकर डराया और जान से मारने की धमकी दी। इसके बाद दुकान में रखे सोने-चांदी के गहने जबरन छीन लिए गए। आरोप है कि इस दौरान शुभम के साथ मारपीट भी की गई और फिर वे लोग मौके से फरार हो गए। लूटे गए गहनों का वजन करीब 350 ग्राम बताया गया है और उनकी अनुमानित कीमत करीब 40 लाख रुपये थी।
दुकान मालिक की शिकायत पर एमआईडीसी पुलिस स्टेशन में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 309(4) और 3(5) के तहत मामला दर्ज किया गया। मामले की गंभीरता को देखते हुए एमआईडीसी पुलिस और नागपुर क्राइम ब्रांच ने साथ-साथ जांच शुरू की। आरोपी वारदात के बाद भाग चुके थे, इसलिए उनकी पहचान करना पुलिस के लिए बड़ी चुनौती थी।
पुलिस ने घटनास्थल और आसपास के इलाकों के करीब 300 से 400 सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली। तकनीकी जांच और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की मदद ली गई और परिस्थितिजन्य साक्ष्यों को जोड़कर आरोपियों तक पहुंचने की कोशिश हुई। जब पता चला कि आरोपी महाराष्ट्र से बाहर हैं, तो क्राइम ब्रांच की दो विशेष टीमें उत्तर प्रदेश और हरियाणा रवाना की गईं। प्रेस नोट के मुताबिक इन टीमों ने चार दिन तक अपनी पहचान गोपनीय रखकर स्थानीय इलाकों में जांच की और स्थानीय पुलिस की मदद ली। जरूरत पड़ने पर तीसरी टीम भी दूसरे राज्य भेजी गई।
पुलिस ने सबसे पहले आरोपी अभिषेक सिंह ठाकुर को उत्तर प्रदेश के बरेली से हिरासत में लिया। पूछताछ में पुलिस को वारदात में शामिल दूसरे साथियों के बारे में जानकारी मिली, जिसके बाद बाकी आरोपियों की तलाश तेज की गई। गिरोह के तीन और सदस्य हिरासत में लिए गए, जिनमें दो नोएडा से और एक मेरठ से पकड़ा गया।
पुलिस प्रेस नोट के अनुसार गिरफ्तार आरोपी ये हैं: अभिषेक सिंह ठाकुर, बरेली; जयराम उर्फ जोगिंदर अशोक सिंह ठाकुर (19), नोएडा; शुभांकित निलेशकुमार चतुर्वेदी (22), नोएडा; और राजन सामी शर्मा (29), मेरठ। पुलिस के मुताबिक ये सभी कथित तौर पर इस वारदात में शामिल थे और प्रेस नोट में इन्हें आदतन और रिकॉर्ड पर मौजूद अपराधी बताया गया है। मामले में हर एक की सटीक भूमिका, लूटे गए गहनों की बरामदगी और बाकी साथियों की संलिप्तता की जांच चल रही है।
प्रेस नोट में दूसरे राज्यों की पुलिस के सहयोग का भी जिक्र है। इसमें उत्तर प्रदेश के बदायूं की SWAT टीम के हेड कांस्टेबल सचिन झा, सहारनपुर के एसआई नीरज पवार और पुलिसकर्मी हरेंद्र, अमित चिकारा, जोगेंद्र और विवेक राणा के विशेष सहयोग का उल्लेख किया गया है।
यह कार्रवाई पुलिस आयुक्त विश्वास नांगरे पाटिल, सह पुलिस आयुक्त नवीनचंद्र रेड्डी, अपर पुलिस आयुक्त (अपराध) राजेंद्र दाभाडे, पुलिस उपायुक्त (डिटेक्शन) दीपक अग्रवाल और सहायक पुलिस आयुक्त (क्राइम ब्रांच) वैभव जाधव के मार्गदर्शन में हुई। क्राइम ब्रांच की पुलिस निरीक्षक शुभांगी देशमुख और सहायक पुलिस निरीक्षक चेतन बोरखेडे, नितीन चुलपार व राजाराम जाधव समेत कई अधिकारी और कर्मचारी जांच में शामिल रहे।
जांच अभी पूरी नहीं हुई है। पुलिस के सामने अब दो काम हैं: लूटे गए करीब 40 लाख रुपये के गहनों की बरामदगी और इस अंतरराज्यीय गिरोह के बाकी लोगों तक पहुंचना। पुलिस यह भी जांच रही है कि आरोपियों ने नागपुर की इसी दुकान को क्यों चुना और वारदात के बाद वे किन रास्तों से भागे।