नागपुर की डॉ. श्रुती सवालाखे बनीं 'मिसेस युनायटेड नेशन्स 2026' की विजेता
नई दिल्ली के क्राउन प्लाज़ा में हुई स्पर्धा में नागपुर की डॉ. श्रुती नीरज सवालाखे ने विजेता का खिताब जीता। उन्होंने 'मिसेस युनायटेड नेशन्स अर्थ' का खिताब भी अपने नाम किया।
तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं
नागपुर की डॉ. श्रुती नीरज सवालाखे ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बड़ी कामयाबी हासिल की है। नई दिल्ली के क्राउन प्लाज़ा में हुई 'मिसेस युनायटेड नेशन्स 2026' स्पर्धा में उन्होंने विजेता का खिताब जीता। इसके साथ ही 'मिसेस युनायटेड नेशन्स अर्थ' का खिताब भी उनके नाम रहा। मेडिकल क्षेत्र की जिम्मेदारियां, परिवार का साथ और अपने सपने, इन सबको साथ लेकर चलते हुए उन्होंने यह मुकाम पाया, और इससे नागपुर का नाम ऊंचा हुआ है।
डॉ. श्रुती डॉ. रवी चरडे की बेटी हैं। वे डेंटल सर्जन और कॉस्मेटोलॉजिस्ट के तौर पर काम करती हैं। कॉस्मेटोलॉजी में उन्होंने दो फेलोशिप पूरी की हैं और हॉस्पिटल मैनेजमेंट में एमबीए की डिग्री भी ली है। फिलहाल वे नागपुर के जय इंस्टिट्यूट और भानुकृपा हॉस्पिटल में डायरेक्टर की जिम्मेदारी संभाल रही हैं। इससे पहले 'मिसेस इंडिया' स्पर्धा में भी उन्हें कामयाबी मिल चुकी है, और अब अंतरराष्ट्रीय मंच पर भी उन्होंने अपनी छाप छोड़ी है।
बताया गया कि स्पर्धा के दौरान जब एक विदेशी प्रतिभागी की तबीयत बिगड़ती दिखी, तो डॉ. श्रुती ने डॉक्टर के नाते उसकी मदद की। इस बात से उनकी पहचान सिर्फ खूबसूरती और शख्सियत तक सीमित नहीं रही। उनके हिसाब से कामयाबी का मतलब सिर्फ इनाम या ताज जीतना नहीं है, बल्कि अपने ज्ञान और तजुर्बे को दूसरों की मदद में लगाना है। ताज शख्सियत की शान बढ़ाता है, लेकिन लोगों के दिल में इज्जत इंसानियत से बनती है।
अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत की नुमाइंदगी करना डॉ. श्रुती के लिए फख्र की बात रही। उनकी प्रस्तुति में 'ऑपरेशन सिंदूर' और भारतीय तिरंगे से प्रेरित देशभक्ति की थीम को खास जगह दी गई थी। इसके जरिए उन्होंने हिम्मत, देशप्रेम और भारतीय अस्मिता का संदेश देने की कोशिश की।
डॉ. श्रुती के पति डॉ. नीरज सवालाखे जाने माने गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट हैं। उनका बेटा राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर शतरंज खेलता है। डॉ. श्रुती का मानना है कि परिवार के सहयोग, अनुशासन और सही प्लानिंग के दम पर महिलाएं पेशे की जिम्मेदारियां निभाते हुए अपने सपने भी पूरे कर सकती हैं।
वे महिलाओं को यह संदेश देती हैं कि परिवार और करियर के साथ अपनी ख्वाहिशों को भी अहमियत दें। उम्र, हालात या घर की जिम्मेदारियों को अपनी क्षमता की हद न मानें। आत्मविश्वास और जिद हो, तो हर महिला अपनी अलग पहचान बना सकती है। उनके मुताबिक हर औरत को अपने सपनों के लिए मजबूती से खड़े रहना चाहिए और हालात के आगे हार नहीं माननी चाहिए।
इस जीत के बाद डॉ. श्रुती चाहती हैं कि अपनी मेडिकल महारत, लीडरशिप और निजी तजुर्बे के जरिए महिलाओं में सेहत को लेकर जागरूकता, आत्मविश्वास और शख्सियत के विकास को बढ़ावा दें। समाज में अच्छा बदलाव लाने वाली और महिला सशक्तीकरण से जुड़ी पहलों में योगदान देने का भी उनका इरादा है। उनके लिए यह ताज सिर्फ सम्मान की निशानी नहीं है, बल्कि महिलाओं को प्रेरणा देने और समाज के लिए कुछ सार्थक करने की जिम्मेदारी भी है।