मंगलवार, 20 अक्टूबर 2026

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01:03 IST

नागपुर की डॉ. श्रुति सवालाखे बनीं 'मिसेज यूनाइटेड नेशंस 2026', बोलीं: शादी सपनों का अंत नहीं

नागपुर की डॉ. श्रुति नीरज सवालाखे ने नई दिल्ली में हुए एक अंतरराष्ट्रीय सौंदर्य मुकाबले में 'मिसेज यूनाइटेड नेशंस 2026' का खिताब जीत लिया है। उनकी इस जीत से परिवार के साथ-साथ पूरे नागपुर शहर और देश में खुशी का माहौल है। जीत के बाद मीडिया से बात करते हुए डॉ. श्रुति ने बताया कि यह प्रतियोगिता पहले श्रीलंका में होनी थी

नागपुर की डॉ. श्रुति नीरज सवालाखे ने अंतरराष्ट्रीय मंच पर शहर का नाम रोशन किया है। नई दिल्ली के क्राउन प्लाज़ा में हुई 'मिसेज यूनाइटेड नेशंस 2026' स्पर्धा में वे विजेता रहीं। जीत की खबर आते ही उनके परिवार में, पूरे नागपुर में और देश भर में खुशी की लहर दौड़ गई।

डॉ. श्रुति ने जीत के बाद मीडिया से बातचीत में बताया कि यह स्पर्धा पहले श्रीलंका में होनी तय थी, मगर बाद में इसका आयोजन नई दिल्ली में किया गया। मुकाबले में कई देशों की प्रतिभागी आई थीं। उनके मुताबिक रूस, कजाकिस्तान और जापान की महिलाओं से उन्हें कड़ी टक्कर मिली। नेशनल कॉस्ट्यूम, इंटरव्यू, टैलेंट, रैंप वॉक, अलग कॉस्ट्यूम और सवाल-जवाब, कई राउंड में परख हुई।

मुख्य ताज के साथ उन्होंने 'मिसेज यूनाइटेड नेशंस अर्थ' का खिताब भी अपने नाम किया। यानी एक ही मंच से दो खिताब उनके हिस्से आए। एक रिपोर्ट के मुताबिक यह अर्थ वाला खिताब ओमान की तरफ से मिला। डॉ. श्रुति खुद कहती हैं कि वे दोनों की विजेता हैं।

नेशनल कॉस्ट्यूम राउंड के लिए उन्होंने देशभक्ति की थीम चुनी थी। पोशाक में तिरंगा था, भारतीय नारी की झलक थी और थलसेना, नौसेना व वायुसेना को भी जगह दी गई थी। बताया गया कि उनकी प्रस्तुति 'ऑपरेशन सिंदूर' और तिरंगे से प्रेरित थी। डॉ. श्रुति के मुताबिक वे दुनिया को दिखाना चाहती थीं कि भारतीय स्त्री प्रेम की मिसाल है, संस्कारों में रहकर भी अपने परिवार को साथ लेकर आगे बढ़ सकती है, और हम अपनी संस्कृति नहीं छोड़ते हुए भी तरक्की कर सकते हैं। इसी के जरिए वे हिम्मत, देशप्रेम और भारतीय पहचान का पैगाम देना चाहती थीं।

स्पर्धा के दौरान एक किस्सा भी चर्चा में रहा। बताया गया कि जब एक विदेशी प्रतिभागी की तबीयत बिगड़ती दिखी, तो डॉ. श्रुति ने डॉक्टर होने के नाते आगे बढ़कर उसकी मदद की। उनका कहना है कि कामयाबी सिर्फ इनाम या ताज का नाम नहीं है, असली बात अपना ज्ञान और तजुर्बा दूसरों के काम में लगाना है। ताज से शख्सियत की शान बढ़ती है, पर लोगों के दिल में जगह इंसानियत से मिलती है।

डॉ. श्रुति पेशे से डेंटल सर्जन और कॉस्मेटोलॉजिस्ट हैं। उन्होंने कॉस्मेटोलॉजी में दो फेलोशिप की हैं और हॉस्पिटल मैनेजमेंट में एमबीए भी किया है। इस वक्त वे नागपुर के जय इंस्टिट्यूट और भानुकृपा हॉस्पिटल में डायरेक्टर के तौर पर काम देख रही हैं। इससे पहले 'मिसेस इंडिया' स्पर्धा में भी वे कामयाबी हासिल कर चुकी हैं।

परिवार के बारे में एक रिपोर्ट में बताया गया कि वे डॉ. रवि चरडे की बेटी हैं, जबकि दूसरी रिपोर्ट में पिता का नाम डॉ. रवि सर्डे लिखा गया है। दोनों रिपोर्ट इस पर एकमत हैं कि उनके पति डॉ. नीरज सवालाखे मशहूर गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट हैं और बेटा राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय स्तर पर शतरंज का चैंपियन खिलाड़ी है। अपनी सफलता का पूरा श्रेय डॉ. श्रुति परिवार को देती हैं और कहती हैं कि पति, पिता और बेटा हमेशा उनकी ताकत रहे। भारत की नुमाइंदगी को उन्होंने गर्व का पल बताया, साथ ही इसे बड़ी जिम्मेदारी भी कहा, जिसे उनके मुताबिक उन्होंने अच्छे से निभाया।

महिलाओं के लिए उनका पैगाम साफ है। शादी सपनों का अंत नहीं है, वह तो ऐसा बगीचा है जिसमें दो आत्माएं साथ खिलती हैं। वे कहती हैं कि अपने सपनों को संजोकर रखिए और खुद वह बदलाव बनिए जो आप दुनिया में देखना चाहते हैं। उठिए, जागिए और मंजिल मिलने तक रुकिए मत। परिवार के साथ, अनुशासन और सही प्लानिंग से महिलाएं नौकरी या कारोबार की जिम्मेदारी निभाते हुए भी अपने ख्वाब पूरे कर सकती हैं। उम्र, हालात या घर की जिम्मेदारियों को अपनी हद न समझें। आत्मविश्वास और जिद हो तो हर औरत अपनी पहचान बना सकती है।

आगे की योजना के बारे में डॉ. श्रुति ने बताया कि अब वे मिसेज वर्ल्ड और मिसेज यूनिवर्स की तैयारी करेंगी। साथ ही वे अपनी मेडिकल महारत, लीडरशिप और निजी तजुर्बे से महिलाओं में सेहत को लेकर जागरूकता और आत्मविश्वास बढ़ाना चाहती हैं, और महिला सशक्तीकरण से जुड़ी पहलों में हाथ बंटाने का इरादा रखती हैं। उनके लिए यह ताज सिर्फ सम्मान की निशानी नहीं, समाज के लिए कुछ अच्छा करने की जिम्मेदारी भी है। उनका मानना है कि बाहर की खूबसूरती नजर खींचती है, लेकिन दिल अंदर की खूबसूरती जीतती है, यानी खुले विचार, अच्छा दिल और पाक रूह।

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